19/02/2018
दिन भर कचरा बीन, कुछ मांग, कुछ गुजारा कर दस वर्षीय मोनू अब शाम हुए तन - मन का थका घर को आया था...
माँ उसका ही इन्तजार कर रही थी, सुबह बस रात की मन मारकर बचाई हुई दो रोटियां खाकर निकला था पर अंजाम आज रात का भी यही था, भूख आखों से झलक रही थी, मुंह से भलेही ना कहे वो माँ को,,
उसे देखते ही माँ सामने भागी "आ गया मेरा बच्चा, आजा, थक गया होगा, आजा मैं तुझे खाना देती हूँ...बोल क्या खाएगा मेरा बेटा...."
स्नेह में डूब चुके मोनू ने जाने अनजाने अनायास ही कह "माँ, खीर मिल जाए तो आनन्द ही आ जाए"...फिर एकदम चुप हो गया..
माँ थरथराते गले से बोली "बेटा खीर..?... पर आज तो दूध ही नहीं है चीनी भी नहीं है,,, कैसे खिलाऊँ मैं तुझे खीर"
"कोई बात नहीं ऐ माँ, तूँ उदास क्यों होती है, मैं खा लूंगा ना खीर,दूध और चीनी ही तो नहीं है, कोई बात नहीं, तूं आज मुझे ये चावल खिला दे, कल कहीं से दूध मिलेगा वो पी लूंगा, और परसों तक कहीं चीनी भी मिलेगी ही, फिर बन जाएगी ना खीर..?,और इस तरह तेरा बेटा तीन - चार दिन लगातार खीर खाएगा"
"माँ, तूं तो जानती होंगी की हम गरीबों के पकवान यूँ ही किश्तों में बनते हैं, वो अलग बात है की उन अमीरों के यहाँ शादी वगेरह की ख़ुशी मनाने के लिए भी पचासों पकवान खाने से ज्यादा जमीन पर फेंकने के लिए बनाए जाते है"
बच्चे की बातें सुन माँ की अपनी व्यथा पर आँखें भर आई थी वो बस बिना कुछ कहे उससे लिपट गई....!
#शायद ज्यादा रोमांचित कहानी ना लिख पाया, पर बस मर्म समझ लेना..... 🙏
- Om Anjaan🙏