23/06/2026
गाई कजरी पसरे कजरा, सावन में सांवरिया
तोहरे महल बीच, रोवे तोहर तिरिया -२
आंगन आकाश ताके, बरखे बरखा सेज प
का बितित हेया बुझीतऽ, हमरा करेज प -२
अन्न पानी भावई न, बेसुध भेल शरीरीया -२
तोहरे महल बीच.........................-२
झूला झूलित अंखियां, ताकीत सिवान हे
तोरा बिना देखऽ होइत, जवानी जिआन हे -२
फूलई बाकी फरई नहिये, तोरा बिन लतरीया -२
तोहरे महल बीच.........................-२
रजनी लगित हेया, सबकुछ छिना गेल
सोलहों सिंगार मोर, पाकी में सना गेल -२
बिरहऽ में बिरहिन भेल, तोहर इ गुजरीया -२
तोहरे महल बीच.........................-२
(२३/०६/२०२६)
#गीतकार_रजनी_कान्त #कवि_रजनी_कान्त #मगहियाछौंड़ा #मगहीलोकगीत #मगहीगीत #मगही #मगहीकजरी Actor Rajni Kant Kushwaha