27/04/2026
सखिया कहूं कइसे हम बतिया
पिया ककड़ी के भतिया न -२
मर धंस जाये अगुआ नतिया
पिया ककड़ी के भतिया न -२
जब-जब जाईं सेज, कोना में सटक जाये
केतनो बोलाई बाकी, उ न पलट आये -२
कटे उनखा मनावित रतिया
पिया ककड़ी के भतिया न -२
हम ही सेयान सखी, पियवा अनाड़ी
खाये ला रोवऽ हेया, मट्ठा के ढाढ़ी -२
धरी बांह त काटऽ हे दंतिया
पियवा ककड़ी के भतिया न
रजनी हे चमकीत न, चांद के चंदनिया
घुघा हे उघरीत न, रोवे सुघर धनिया -२
ओरचन ढीला न कैल नतिया
पिया ककड़ी के भतिया न -२
(२७/०४/२०२६)
#गीतकार_रजनी_कान्त #कवि_रजनी_कान्त #मगहीलोकगीत #मगहियाछौंड़ा #मगहीगीत #मगही #मगहीझूमर Actor Rajni Kant Kushwaha