12/01/2021
संगीत ध्यान का सुगमतम उपाय है। जो संगीत में डूब सकते हैं उन्हें डूबने के लिए और दूसरी चीज को खोजने की कोई आवश्यकता नहीं है। संगीत अदभुत मादकता है। संगीत परम सुरा है। उसमें डूबते—डूबते तुम्हारे विचार चले जायेंगे, तुम्हारा अहंकार चला जायेगा। संगीत को ध्यान समझो।
संगीत में रस हो तो सब छोड़ा जा सकता है, संगीत नहीं छोड़ा जा सकता। अगर संगीत ही तुम्हारा संन्यास बने तो बन जाने देना। इतना साहस तो होना चाहिए। इतना दाव पर लगाने की हिम्मत तो होनी चाहिए। तभी जीवन में कुछ फलता है। तभी जीवन में कुछ उपलब्ध होता है। बाकी सब चीजें गौण हैं। तुम्हारी आत्मा की यही आवाज है अगर, तो इसी आवाज के साथ चलो।
"शास्त्रीय संगीत सभी की समझ में नहीं पड़ सकता। ऐसी अपेक्षा रखना भी गलत है। शास्त्रीय संगीत के लिए एक अलग तरह की संवेदनशीलता चाहिए एक अलग तरह की ग्राहकता चाहिए। एक बड़ा ही कोमल, स्वरमंजा, छंदबद्ध हृदय चाहिए।
शास्त्रीय संगीत कोई फिल्मी संगीत नहीं है कि तुम जैसे हो वैसे ही रहते समझ में आ जाये।
शास्त्रीय संगीत तो एक साधना है। तुम जैसे हो वैसे ही समझ में नहीं आयेगा; तुम्हें अपने को रूपांतरित करना होगा। शास्त्रीय संगीत तो एक चुनौती है; वर्षों की श्रम और साधना से समझ पाओगे, सुन पाओगे।"
ओशो
"मराैै है जोगी मरौ-प्रवचन-10"