28/10/2026
2023 में जब शादी हुई थी, तो संभव ने सीना ठोककर कहा था—मुझे दहेज का एक रुपया नहीं लेना🥹😭स्वाभिमान से शुरू हुआ यह सफर सिर्फ दो साल बाद ₹3 करोड़ के गुजारा भत्ते के अंतहीन दलदल में बदल गया😟
एक बूढ़े बाप के कांपते हाथों में मोबाइल था और स्क्रीन पर अपने 30 साल के बेटे का यह आखिरी संदेश। जब तक वह कुछ समझ पाते, नोएडा की एक 42 मंजिला इमारत की बालकनी से सब कुछ खत्म हो चुका था🥹🥺
नीचे फर्श पर बिखरा हुआ वह शरीर सिर्फ एक इंसान का नहीं था—उसमें एक पिता के अरमान, एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के सपने और एक बेबस बाप की लाचारी दम तोड़ चुकी थी😡😡
कहानी संभव जैन की है, लेकिन सवाल हर उस मध्यमवर्गीय परिवार के कलेजे को चीर रहा है जो अपने बच्चों को खून-पसीने से पढ़ा-लिखाकर बड़ा करता है🤬🤬
घर में एक नन्हा बेटा था, जिसकी सांसें अक्सर बीमारियों से लड़ती थीं। संभव ने अपनी जिंदगी भर की पाई-पाई उस मासूम के इलाज में झोंक दी। जब पैसे कम पड़े, तो जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर खड़े अपने पिता के सामने हाथ फैलाए। बाप ने भी बेटे की गृहस्थी और जिंदगी बचाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई से ₹1 करोड़ जुटाकर दे दिए🥺😳
लेकिन समझौतों की भूख शांत नहीं हुई। बाकी बचे ₹2 करोड़ की मांग, कानूनी मुकदमों की धमकियां और हर दिन बढ़ता मानसिक तनाव..😱😱
एक तरफ बीमार बच्चे की फिक्र, दूसरी तरफ खाली बैंक खाता, और सामने कोर्ट-कचहरी का अंतहीन चक्रव्यूह। संभव अंदर से टूट चुका था। उसने अपनी हार मान ली और उस 42वीं मंजिल से छलांग लगा दी।😭🥹😭
इस देश में दहेज लेना अपराध है—और बिल्कुल होना चाहिए। लेकिन जब कानूनों की आड़ में किसी इंसान को इस कदर निचोड़ दिया जाए कि उसके पास मरने के अलावा कोई रास्ता न बचे, तो उस व्यवस्था को क्या नाम दिया जाए😫😩
एक पुरुष सिर्फ एक बैंक अकाउंट या एटीएम मशीन नहीं होता। उसके सीने में भी एक दिल होता है, जो अपनों की खातिर धड़कता है और जब उस पर हद से ज्यादा जुल्म का बोझ लाद दिया जाए, तो वह भी टूट जाता है🥺😳
गुजारा भत्ता जरूरतमंद को सहारा देने के लिए होना चाहिए, किसी को जीते-जी कब्र में उतारने का हथियार नहीं। जब तक वैवाहिक विवादों में पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और वास्तविक परिस्थितियों को निष्पक्षता से नहीं देखा जाएगा, तब तक ऐसे कितने ही बेटे खामोशी से टूटते रहेंगे।🙏😭🙏
अलविदा संभव... व्यवस्था शायद तुम्हें भूल जाएगी, लेकिन एक बाप के सीने में तुम्हारी वह आखिरी चिट्ठी ताउम्र सुलगती रहेगी।
यदि कोई साथी गंभीर मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 14416 पर बता सकते है।
दिमाग को झकझोर देने वाली पोस्ट समाज में हो रहे खेल को दर्शाती है।अब कौन देगा उसके बाकी के बच्चे हुए 2 करोड़ उसके मा बाप जिनका कुछ नहीं बचा।
या वो बीमार बच्चा।😭😭😭😭
डूब के मार जाना चाहिए उस सिस्टम को जिसने उस औरत का साथ दिया जिसने ऐसी स्थिति में पैसे को चुना।
ओर डूब के मार जाना चाहिए उस सिस्टम को जिसने उस औरत का साथ दिया जिसका ईमान मर चुका था।
सच में लिखते हुए रोना आ गया।
पता नहीं कितने मजबूर लोग इस स्थिति में होंगे।
भगवान उनकी रक्षा करे।🙏🙏🥹😭🥹😭 ,