30/01/2023
एक पागल सी वो।
देर रात छत पर कानो में ईअर फ़ोन लगाएँ। वो गाने सुनते हुए,टहलते हुए, गुनगुनाते हुए तुम्हें दिखेगी।
चारों ओर सन्नाटा होगा उसके पर वो अपने अंदर
बेचैनी, शोर और सवाल लिये मिलेगी।
वो अकेली तो है। पर किसी की मोहताज नही है।
वो किसी का भविष्य है। पर इस बात से अनजान। क्यू की कोई उसका आज नही।
जो दर्द है उसकी आँखो में। वो किसी से मिले नही है उसे। उसने कमाएँ है। मोहब्बत के बदले में।
वो तुम्हें भरे बाज़ार में भी मिलेगी।जिसके चारों ओर लोगों का मेला होगा।
पर उसकी आँखे मानो किसी एक को पागलों की तरह ढूँढती हुई दिखेगी।
वो लोगों से मिलेगी भी पर उनमें घुल नही पाएगी।
वो घूम आएगी पूरे बाज़ार में पर जो चाहिए वो ढूँढ़ नही पाएगी।
वो जो चंद हँसी है उसकी। वो किसी ने दिए नही उसे ।
उसने क़ीमत अदा की है अनगिनत आंसुओं की।
वो तुम्हें रातों को जगती हुई भी मिलेगी।
किसी कोने में चुप चाप बैठी हुई। पर अंदर ही अंदर भागती हुई।
पूरी दुनिया से बिछड़ी हुए, खुद से ख़फ़ा और किसी ग़ैर से पूरी तरह जुड़ी हुई।
रास्ते है मगर उन पे उसे जाना नही।अटक गयी है जहां उसका कोई ठिकाना नही।
यें जो जागती रातें है उसकी। उसे किसी से मिले नही।
ख़रीदा है उसने। चंद ख़ूबसूरत लम्हों के बदले में।
उसे झूठे वादों ने नही संग बीताए हसीन लम्हों ने रुलाया है।
किसी ने कुछ वक्त देके उसे उसी वक्त के लिए तरसाया है।
उस सख्श का उसका ना होने से ज़्यादा।उसके बदल जाने का मातम है।
लोग पल भर में बदल जाते है और बदनाम मौसम है।
वो पागल है पर समझदार बनने की पूरी कोशिश करतीं है।
दूनिया से नही ख़ुद की हार से डरती है।
वो परेशान है खुद के सवालों से उसको उसी का साथ चाहिए जिसके लिए वो एक मात्र विकल्प है।पर……………………
वो तुम्हें टूटी हुई ज़रूर मिलेगी पर बिखरी हुई नही।
वो मोहब्बत को पा कर निखर जाने वालों में से है।
और नाहासिल मोहब्बत में सबर से संवर जाने वालों में से भी है।
वो जो भी है। जैसी भी है। किसी के बिना अधूरी। पर खुद में पूरी भी है।
किसी बेहतर को भले पाया ना हो उसने।पर वो बेहतर से भी बेहतरीन है।
बेस्वाद सी लगती होगी किसी को पर असल में।चटपटी नमकीन है।
किसी को फ़र्क़ नही पड़ता उसके फ़र्क़ पड़ने से। पर वो खुद में नायाब है।
किसी के लिए एक हादसा वो। पर खुद में अमूल्य किताब है।
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