17/07/2026
रोज़ उद्घाटन पर उद्घाटन... अरे सम्राट जी, खाली उद्घाटन होगा की धरातल पर कुछ काम भी होगा ?
इधर आप रोज़ फीता काट रहे हैं, उधर बिहार के कर्मचारी, आपके अपने विधायक तक पैसे के लिए रो रहे हैं, गिड़गिड़ा रहे हैं। पीठ पीछे 1000 बातें कर रहे हैं कि सरकार के पास पैसा ही नहीं है।
यहाँ तक कि आपके ही NDA के सहयोगी विधायक अनंत सिंह ने तो ऑन कैमरा कह दिया कि, "अरे सरकार के पास पैसा ही नहीं है, तो विकास क्या होगा? विधायक फंड तक नहीं मिल रहा है।"
तो फिर आप बताइए... जो रोज़ उद्घाटन किए जा रहे हैं, उनका पैसा कब रिलीज़ होगा? ताकि ज़मीन पर भी काम शुरू हो सके।
और शायद आपको याद न हो, इसलिए मैं याद दिला देता हूँ...
चुनाव के समय बिहार सरकार ने घोषणा की थी कि IPRD के माध्यम से यूट्यूबर्स, चैनल संचालकों और कंटेंट क्रिएटर्स को सरकार की जनहित योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने के लिए भुगतान किया जाएगा।
इस घोषणा के बाद हजारों लोगों ने अपनी जेब से पैसा खर्च किया, दूर-दूर जाकर वीडियो बनाए, कैमरा, एडिटिंग, ट्रैवल सब अपने खर्च पर किया और सरकार के कामों को जनता तक पहुँचाया।
लेकिन आज लगभग एक साल नई सरकार को होने को आया, सरकार ने उन लोगों को 1 रुपया तक नहीं दिया।
बिहार के कई छोटे यूट्यूबर और स्वतंत्र चैनल आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसी तरह अपना चैनल चला रहे हैं, कोई उधार लेकर काम कर रहा है।
हाँ, बड़े यूट्यूबर और बड़े चैनल मालिकों का क्या... उन्हें तो नेताओं की दलाली, रंगदारों से उगाही, भ्रष्ट अधिकारियों को वीडियो दिखाकर डराने और सेटिंग के पैसों में हिस्सा मिल ही जाता हैं, यहाँ तक ही "ट्रान्सफर-पोस्टिंग उद्योग" ये चैनल वाले अपने आप को बना दिए हैं IAS / IPS की "ट्रान्सफर-पोस्टिंग कराने के नाम पर अधिकारियो से पैसा वसूलते हैं अपने आप को मंत्री जी का मुख्यमंत्री जी का करीबी बताकर लेकिन छोटे क्रिएटर क्या करें? उनका घर कैसे चले?
मुझे तो अब ऐसा लगने लगा है कि कुछ हो या न हो, सरकार दिवालिया ज़रूर हो रही है।
सम्राट चौधरी जी रोज़ बड़े-बड़े दावे करते हैं कि बिहार में यह होगा, वह होगा। लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही दिख रही है। हर तरफ फंड की कमी, भुगतान में देरी और आर्थिक तंगी की बातें सुनाई दे रही हैं।
हमें तो ऐसा लगता है कि अगर यही हाल रहा तो बिहार की आर्थिक स्थिति और खराब होगी।
कम से कम नीतीश कुमार के समय ऐसी चर्चा हर तरफ नहीं सुनाई देती थी कि विधायक फंड नहीं मिल रहा, भुगतान अटका पड़ा है या सरकार के पास पैसे की कमी है।
आज जो हालात दिखाई दे रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि बिहार की व्यवस्था गंभीर वित्तीय चुनौतियों से गुजर रही है।
बाकी हमारा काम हैं सच्चाई आप तक पहुचाना नही तो आंख पर पट्टी बांधकर गुणगान करने वाले तो बहुत हैं !
Samrat Choudhary