Dil ki Awaaj

Dil ki Awaaj दिल से लिखी कुछ कवितायें

आरव ने जैसे ही ऑफिस से बाहर कदम रखा, उसका फोन बज उठा। स्क्रीन पर काव्या का नाम चमक रहा था। उसने कॉल उठाई—काव्या: आरव, तु...
30/09/2024

आरव ने जैसे ही ऑफिस से बाहर कदम रखा, उसका फोन बज उठा। स्क्रीन पर काव्या का नाम चमक रहा था। उसने कॉल उठाई—

काव्या: आरव, तुम कहाँ हो? मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। आज तो हमें मूवी देखने जाना था, याद है ना?

आरव: काव्या, मैं ऑफिस के काम में इतना उलझ गया कि सब कुछ भूल ही गया। तुम कहाँ हो? मैं अभी तुम्हें पिक करता हूँ।

आरव ने जल्दी से गाड़ी में बैठकर बैग पीछे की सीट पर रखा और गाड़ी स्टार्ट की।

काव्या: रहने दो, अब मूड नहीं है। मैं पिछले दो घंटे से तैयार होकर तुम्हारा इंतजार कर रही थी। कभी तो मेरा ध्यान रखा करो।

आरव: देखो, काव्या, मैंने कहा ना भूल गया। अब इतनी सी बात पर मूड खराब मत करो। चलो, हम बाहर डिनर कर लेते हैं।

काव्या: नहीं, अब मैं कहीं नहीं जाऊंगी, और खाना भी नहीं बनाउंगी। जो मंगाना हो, खुद मंगा लेना।

आरव को भी गुस्सा आ रहा था, लेकिन वह खुद को शांत रखते हुए बोला—

आरव: ठीक है, बताओ क्या ऑर्डर करना है?

काव्या: जो करना है, खुद कर लो। मुझसे पूछने की जरूरत नहीं।

कहकर काव्या ने फोन काट दिया। आरव को बहुत गुस्सा आ रहा था। पूरे दिन ऑफिस में बॉस की चिकचिक, और घर पहुंचते ही बीवी के नखरे।

आरव घर पहुंचा और काव्या को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसने उसकी एक नहीं मानी। आखिरकार, आरव भी बिना खाना खाए सोने चला गया।

शादी की शुरुआत:
आरव और काव्या की शादी को अभी सिर्फ दो साल ही हुए थे। उनकी अरेंज मैरिज थी। शादी के पहले साल में दोनों बहुत खुश थे, लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे। आरव को गुरुग्राम की एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई थी, और पैकेज भी अच्छा था।

शुरुआती छह महीने बहुत अच्छे से गुजरे। आरव ने मेहनत की और उसे प्रमोशन भी मिल गया। उसने एक अच्छा सा फ्लैट खरीद लिया, लेकिन फ्लैट की ईएमआई बहुत ज्यादा थी। वह सोचता था कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतने लगा, उसे महसूस हुआ कि इतनी महंगी ईएमआई चुकाने के लिए उसे दिन-रात काम करना पड़ता था। आरव ने एक बार अपने बॉस को नए फ्लैट की पार्टी में बुला लिया था। उसके बाद से बॉस ने उसे और ज्यादा काम देना शुरू कर दिया।

दूसरी तरफ, काव्या भी धीरे-धीरे गुरुग्राम के हाई-सोसायटी लाइफस्टाइल में ढलने लगी थी। वह अक्सर दोस्तों के साथ शॉपिंग, मूवी, और डिनर पर जाती थी। उसे यह नया जीवन बहुत पसंद आने लगा था।

तंगहाली और तनाव:
आरव की जिंदगी अब एक जाल बन चुकी थी—ऑफिस में बॉस का दबाव और घर में काव्या की ऊंची उम्मीदें। वह जितना कमाता, उससे ज्यादा खर्च हो जाता। हर महीने की सैलरी खत्म होने से पहले ही क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता था।

आरव ने कई बार काव्या से कहा कि खर्चे कम करने होंगे, लेकिन काव्या का जवाब हमेशा वही होता—

काव्या: बाकी लोग भी तो इसी सोसाइटी में रह रहे हैं। तुम ही क्यों पीछे रहना चाहते हो? बस सोच का फर्क है, तुम सोचो कि सब हो जाएगा, तो हो जाएगा।

आरव: लेकिन उनकी आमदनी हमसे बहुत ज्यादा है। हमें 20 साल तक ईएमआई चुकानी है। खर्चे कम करना जरूरी है।

काव्या: तो तुम दूसरी नौकरी क्यों नहीं ढूंढते? हो सकता है, कहीं और अच्छा पैकेज मिल जाए।

आरव ने थककर कहा—

आरव: नौकरी बदलने के लिए सेविंग होनी चाहिए। हम महीने के अंत तक कर्ज में डूबे रहते हैं। मेरी बात मानो, कुछ वक्त के लिए ये खर्चे बंद करो।

काव्या ने नाराजगी से कहा—

काव्या: तुमने ये सब बातें यहां आने से पहले क्यों नहीं सोची? मेरी कितनी बेज्जती होगी! मैंने सोसाइटी में तुम्हारी कितनी तारीफ की है, और अब तुम ये कह रहे हो कि कुछ भी मत करो?

आरव चुप रह गया। वह अंदर ही अंदर घुट रहा था। शादी से पहले वह एक छोटे शहर में कंप्यूटर इंस्टीट्यूट चलाता था, और कितना सुखी था। वह सुबह काम करता, दोपहर को घर आता, और शाम को फिर आराम से काम पर जाता। तब जीवन आसान और सुकून भरा था।

तरक्की की चाह में उसने सब कुछ छोड़ दिया था—अपने माता-पिता, अपने छोटे भाई, यहां तक कि अपने पुराने जीवन की सादगी भी। अब उसे अहसास हो रहा था कि उसने क्या खोया था।

बड़ा फैसला:
एक दिन, जब आरव ऑफिस में था, उसे बॉस ने एक और टारगेट दिया, जो लगभग असंभव था। बॉस ने कहा—

बॉस: आरव, मुझे तुम पर पूरा विश्वास है। तुम यह टारगेट जरूर पूरा कर लोगे।

आरव ने बिना सोचे अपना इस्तीफा टेबल पर रख दिया—

आरव: सर, ये रहा मेरा इस्तीफा। एक महीने का नोटिस पूरा करके मैं चला जाऊंगा।

बॉस: ये तुम क्या कर रहे हो? तुम्हारे घर की ईएमआई का क्या होगा?

आरव: सर, यही ईएमआई मेरी सारी परेशानियों की जड़ है। मैं फ्लैट बेच रहा हूँ, और अपनी पुरानी जिंदगी में वापस लौट रहा हूँ।

आरव ने ऑफिस से निकलकर फ्लैट बेचने के लिए प्रॉपर्टी डीलर से संपर्क किया।

काव्या का सामना:
शाम को जब आरव घर पहुंचा, तो काव्या ने उसे देखते ही कहा—

काव्या: आरव, हम कल कहीं घूमने चलें क्या? तुम एक दिन की छुट्टी ले लो।

आरव: अब बस एक महीने की बात है, काव्या। उसके बाद जितनी छुट्टी चाहो, मिल जाएगी।

काव्या: क्या मतलब?

आरव: मैंने नौकरी छोड़ दी है। फ्लैट बेच रहा हूँ। हम वापस अपने पुराने घर जा रहे हैं।

काव्या हक्की-बक्की रह गई। उसने गुस्से से कहा—

काव्या: ये तुमने क्या किया? सब बर्बाद कर दिया।

आरव: बर्बाद? नहीं, काव्या। ये सब कभी हमारा था ही नहीं। दूसरों की होड़ में हमने अपनी खुशियां खो दीं। एक बार सोचो, अगले 20 सालों में मैं क्या कर पाता? मेरे पास काम करने की शक्ति भी नहीं बचती, और खर्चे बढ़ते ही जाते। हमें वही चाहिए था, जो पहले था—सादगी, शांति, और संतोष।

काव्या चुप हो गई। उसने कभी इस तरह से सोचा ही नहीं था। उसकी आंखों में पश्चाताप के आंसू आ गए—

काव्या: मुझे माफ कर दो, आरव। मैं दूसरों की देखादेखी में तुम्हें और हमारी खुशियों को भूल गई थी। चलो, हम वापस चलते हैं, अपने घर।

नई शुरुआत:
एक महीने बाद, आरव और काव्या ने गुरुग्राम का फ्लैट बेच दिया और वापस अपने पुराने शहर लौट आए। आरव ने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर अपना कंप्यूटर इंस्टीट्यूट फिर से शुरू किया।

आरव के माता-पिता ने खुशी-खुशी उनका स्वागत किया, और जीवन फिर से उसी सादगी और शांति से भर गया था, जिसे आरव ने खो दिया था।

निष्कर्ष:
यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सच्ची खुशी भौतिक वस्तुओं या ऊंचे स्टेटस से नहीं, बल्कि सादगी, संतोष, और अपनों के साथ बिताए गए खुशहाल पलों से मिलती है। आरव और काव्या ने यह समझा कि दूसरों की होड़ में अपनी खुशियों को खोना सबसे बड़ी गलती होती है।

एक राजा की बेटी की शादी होनी थी। बेटी की यह शर्त थी कि जो भी 20 तक की गिनती सुनाएगा, वही राजकुमारी का पति बनेगा। गिनती ऐ...
27/09/2024

एक राजा की बेटी की शादी होनी थी। बेटी की यह शर्त थी कि जो भी 20 तक की गिनती सुनाएगा, वही राजकुमारी का पति बनेगा। गिनती ऐसी होनी चाहिए जिसमें सारा संसार समा जाए। जो यह गिनती नहीं सुना सकेगा, उसे 20 कोड़े खाने पड़ेंगे। यह शर्त केवल राजाओं के लिए ही थी।

अब एक तरफ राजकुमारी का वरण और दूसरी तरफ कोड़े! एक-एक करके राजा-महाराजा आए। राजा ने दावत का आयोजन भी किया। मिठाई और विभिन्न पकवान तैयार किए गए। पहले सभी दावत का आनंद लेते हैं, फिर सभा में राजकुमारी का स्वयंवर शुरू होता है। एक से बढ़कर एक राजा-महाराजा आते हैं। सभी गिनती सुनाते हैं, जो उन्होंने पढ़ी हुई थी, लेकिन कोई भी ऐसी गिनती नहीं सुना पाया जिससे राजकुमारी संतुष्ट हो सके। अब जो भी आता, कोड़े खाकर चला जाता। कुछ राजा तो आगे ही नहीं आए। उनका कहना था कि गिनती तो गिनती होती है, राजकुमारी पागल हो गई है। यह केवल हम सबको पिटवा कर मज़े लूट रही है।

यह सब नज़ारा देखकर एक हलवाई हंसने लगा। वह कहता है, "डूब मरो राजाओं, आप सबको 20 तक की गिनती नहीं आती!" यह सुनकर सभी राजा उसे दंड देने के लिए कहने लगे। राजा ने उससे पूछा, "क्या तुम गिनती जानते हो? यदि जानते हो तो सुनाओ।" हलवाई कहता है, "हे राजन, यदि मैंने गिनती सुनाई तो क्या राजकुमारी मुझसे शादी करेगी? क्योंकि मैं आपके बराबर नहीं हूँ, और यह स्वयंवर भी केवल राजाओं के लिए है। तो गिनती सुनाने से मुझे क्या फायदा?"

पास खड़ी राजकुमारी बोलती है, "ठीक है, यदि तुम गिनती सुना सको तो मैं तुमसे शादी करूँगी। और यदि नहीं सुना सके तो तुम्हें मृत्युदंड दिया जाएगा।" सब देख रहे थे कि आज तो हलवाई की मौत तय है। हलवाई को गिनती बोलने के लिए कहा गया।
राजा की आज्ञा लेकर हलवाई ने गिनती शुरू की:

"एक भगवान,
दो पक्ष,
तीन लोक,
चार युग,
पांच पांडव,
छह शास्त्र,
सात वार,
आठ खंड,
नौ ग्रह,
दस दिशा,
ग्यारह रुद्र,
बारह महीने,
तेरह रत्न,
चौदह विद्या,
पन्द्रह तिथि,
सोलह श्राद्ध,
सत्रह वनस्पति,
अठारह पुराण,
उन्नीसवीं तुम और
बीसवां मैं…"

सब लोग हक्के-बक्के रह गए। राजकुमारी हलवाई से शादी कर लेती है! इस गिनती में संसार की सारी वस्तुएं मौजूद हैं। यहाँ शिक्षा से बड़ा तजुर्बा है।

दोस्तो कहानी पसन्द आई हो तो एक लाइक और अपने परिजनों, विशेष रूप से न्यू पीढ़ी यानि बच्चों को अवश्य सुनाएं ताकि शिक्षा व अनुभव की ये धरोहर संजोई जा सके।
!! जय श्री राम!!

एक शादी_शुदा स्त्री, जब किसी पुरूष से मिलती है,उसे जाने अनजाने मे अपना दोस्त बनाती है, तो वो जानती है की...... न तो वो उ...
06/09/2024

एक शादी_शुदा स्त्री, जब किसी पुरूष से मिलती है,
उसे जाने अनजाने मे अपना दोस्त बनाती है, तो वो जानती है की...... न तो वो उसकी हो सकती है
और न ही वो उसका हो सकता है।

वो उसे पा भी नही सकती और खोना भी नही चाहती.....!
फिर भी वह इस रिश्ते को वो अपने मन की चुनी डोर से बांध लेती है....।

तो क्या वो इस समाज के नियमो को नही मानती?
क्या वो अपने सीमा की दहलीज को नही जानती?

जी नहीं !!!
वो समाज के नियमो को भी मानती है।
और अपने सीमा की दहलीज को भी जानती है।
मगर कुछ पल के लिए वो अपनी जिम्मेदारी को भूल जाना चाहती है।
कुछ खट्टा... कुछ मीठा
आपस मे बांटना चाहती है।

जो शायद कही और किसी के पास नही बांटा जा सकता है
वो उस शख्स से कुछ एहसास बांटना चाहती है।
जो उसके मन के भीतर ही रह गए है कई सालों से
थोडा हँसना चाहती है,
खिलखिलाना चाहती हैं।

वो चाहती है की कोई उसे भी समझे।
बिन कहे सारा दिन सबकी फिक्र करने वाली स्त्री चाहती है की कोई उसकी भी फिक्र करे...।
वो बस अपने मन की बात कहना चाहती है
जो रिश्तो और जिम्मेदारी की डोर से आजाद हो।

कुछ पल बिताना चाहती है
जिसमे न दूध उबलने की फिक्र हो, न राशन का जिक्र हो....न EMI की कोई तारीख हो।
आज क्या बनाना है,
ना इसकी कोई तैयारी हो
बस कुछ ऐसे ही मन की दो बातें करना चाहती है
कभी उल्टी_सीधी , बिना सर_पैर की बाते
तो कभी छोटी सी हंसीओर कुछ पल की खुशी...
बस इतना ही तो चाहती है
आज शायद हर कोई इस रिश्ते से मुक्त एक दोस्त ढूंढता है
धन्यवाद 🙏

दर्शेको से भरे एक सिनेमाघर में ये फिल्म शुरू होने से पहले पर्दे पर ये तस्वीर जारी हुई और एक धीमा संगीत चलता रहा। शुरू मे...
04/09/2024

दर्शेको से भरे एक सिनेमाघर में ये फिल्म शुरू होने से पहले पर्दे पर ये तस्वीर जारी हुई और एक धीमा संगीत चलता रहा। शुरू में दर्शकों को लगा कि शायद स्वच्छता अभियान के लिए जागरुकता फ़ैलाने के लिए कोई विज्ञापन है लेकिन जब इस तस्वीर को चलते हुए 10 मिनट से ज्यादा हो गये तो की दर्शक चिड़चिड़े होने लगे। चीखने और चिल्लाने लगे।कई दर्शक सिनेमाघर छोड़कर बाहर जाने लगी ।

तभी तस्वीर हट गयी और एक आवाज आने लगी। कि " ये राजू है जो कि अपने घर से 1500 किलोमीटर दूर मजदूरी करता है । ये हर बार जब छुट्टियों में अपने गांव आता है तो इसी तरह शौचालय में यात्रा करने को मजबूर रहता है। 1500 किलोमीटर की यात्रा में 20 घंटे से अधिक टायलेट सीट को यूं ही देखना इसकी मजबूरी है। आप लोग केवल 10 मिनट तक ये सीन देखकर चिड़चिड़े हो गये, पर ये तो पूरे 20 घंटे तक यही सब देखता है वो भी भयंकर बदबू के बीच। ये इसका शौक नहीं मजबूरी है।

इसलिए ईश्वर ने आपको जितना दिया है उससे खुश रहे। और आज के बाद किसी मजबूर मज़दूर का मज़ाक़ उड़ानें से पहले ये जरुर सोच ले कि आप की जरूरत की चीज़ आप तक पहुंचाने वाला राजू फैक्ट्री तक पहुंचने के लिए किस तरह संघर्ष करता है।

िहार िहारी

चश्मा साफ करते पति ने कहा याद है हमारे समय मे मोबाइल नही था।*पत्नी*पर ठीक 5 बजकर 55 मिनट पर मैं पानी का ग्लास लेकर दरवाज...
28/08/2024

चश्मा साफ करते पति ने कहा याद है हमारे समय मे मोबाइल नही था।
*पत्नी*

पर ठीक 5 बजकर 55 मिनट पर मैं पानी का ग्लास लेकर दरवाज़े पे आती और आप आ पहुँचते।

*पति*

मैंने तीस साल नौकरी की पर आज तक मैं ये नहीं समझ पाया कि मैं आता इसलिए तुम पानी लाती थी या तुम पानी लेकर आती थी इसलिये मैं आता था।

*पत्नी*

हाँ... और याद है.. तुम्हारे रिटायर होने से पहले जब तुम्हें डायबीटीज़ नहीं थी और मैं तुम्हारी मनपसन्द खीर बनाती तब तुम कहते कि आज दोपहर में ही ख़्याल आया कि खीर खाने को मिल जाए तो मज़ा आ जाए..।

*पति*

हाँ... सच में...ऑफ़िस से निकलते वक़्त जो भी सोचता, घर पर आकर देखता कि तुमने वही बनाया है..।

*पत्नी*

और तुम्हें याद है, जब पहली डिलीवरी के वक़्त मैं मैके गई थी और जब दर्द शुरु हुआ मुझे लगा काश तुम मेरे पास होते और घंटे भर में तो जैसे कोई ख़्वाब हो...तुम मेरे पास थे..।

*पति*

हाँ... उस दिन यूँ ही ख़्याल आया कि ज़रा देख लूँ तुम्हें..।

*पत्नी*

और जब तुम मेरी आँखों में आँखें डाल कर कविता की दो लाइनें बोलते...

*पति*

हाँ और तुम शरमा के पलकें झुका देती और मैं उसे कविता की 'लाइन' समझता...

*पत्नी*

और हाँ जब दोपहर को चाय बनाते वक़्त मैं थोड़ा जल गई थी और उसी शाम तुम बर्नोल की ट्यूब अपनी ज़ेब से निकाल कर बोले, इसे अलमारी में रख दो...

*पति*

हाँ... पिछले दिन ही मैंने देखा था कि ट्यूब ख़त्म हो गई है। पता नहीं कब ज़रूरत पड़ जाए, यही सोच कर मैं ट्यूब ले आया था...

*पत्नी*

तुम कहते आज ऑफ़िस के बाद तुम वहीं आ जाना। सिनेमा देखेंगे और खाना भी बाहर खा लेंगे...

*पति*

और जब तुम आती तो जो मैंने सोच रखा हो तुम वही साड़ी पहन कर आती...

फिर नज़दीक जा कर उसका हाथ थाम कर कहा- हाँ, हमारे ज़माने में मोबाइल नहीं थे, पर हम दोनों थे।

*पत्नी*

आज बेटा और उसकी बहू साथ तो होते हैं पर बातें नहीं, व्हाट्सएप होता है, लगाव नहीं टैग होता है, केमिस्ट्री नहीं कमेन्ट होता है, लव नहीं लाइक होता है, मीठी नोकझोंक नहीं अनफ़्रेन्ड होता है, उन्हें बच्चे नहीं कैन्डीक्रश सागा, टैम्पल रन और सबवे सर्फ़र्स चाहिए।

*पति*

छोड़ो ये सब बातें, हम अब Vibrate Mode पर हैं, हमारी Battery भी 1 लाइन पे है।

अरे!!! कहाँ चली?

*पत्नी*

चाय बनाने...

*पति*

अरे... मैं कहने ही वाला था कि चाय बना दो ना...

*पत्नी*

पता है, मैं अभी भी कवरेज क्षेत्र में हूँ और मैसेज भी आते हैं...

दोनों हँस पड़े

*पति*

हाँ, हमारे ज़माने में मोबाइल नहीं थे...

वाक़ई बहुत कुछ छुट गया और बहुत कुछ छुट जायेगा। शायद हम अंतिम पीढ़ी हैं जिसे प्रेम, स्नेह, अपनेपन ,सदाचार और सम्मान का प्रसाद वर्तमान पीढ़ी को बाँटना पड़ेगा। जरूरी भी है।

 #पुरुष  #शराब क्यूं पीते हैं ??सुबह-सुबह नहा धोकर काम पर जाने के लिए तैयार होते हुए बीवी से कहा जल्दी लंच पैक कर दो, ऑफ...
21/04/2024

#पुरुष #शराब क्यूं पीते हैं ??
सुबह-सुबह नहा धोकर काम पर जाने के लिए तैयार होते हुए बीवी से कहा जल्दी लंच पैक कर दो, ऑफिस के लिए देर हो रही है...
तभी बेटे ने कहा पापा मुझे कल फीस जमा
करनी है...
ठीक है बेटा शाम को आकर देता हूँ...
बेटी ने कहा पापा स्कूल में फैंसी ड्रेस कंपीटिशन है, मुझे 'परी' की ड्रेस चाहिए...
ओके बेबी, शाम को लेता आऊंगा...
पिता जी बोले, बेटा मेरे चश्मे का काँच टूट गया है, इसे
लगवा देना और तेरी माँ की आँखों के ऑपरेशन की तारीख मिल गई है,अस्पताल में भर्ती कराना है...
जी पिता जी मैं शाम को ऑफिस से एडवांस
ले लूँगा...
जाते जाते पत्नी जी ने कहा, घर का राशन खत्म होने वाला है, किराने वाले को यह लिस्ट देते जाना और शाम
को लेते आना...
अच्छा जी अब मैं चलता हूँ, यह कह वो घर से
चल दिया,
रास्ते में स्कूटर पंचर हो गया और ऑफिस पहुचने में
देर हो गई...
ऑफिस पहुचने पर बाॅस ने घड़ी की ओर
देखा, और कहा आइए सर...
वो समझ गया देरी की वजह से बाॅस नाराज
हैं,
खैर सोचा आज जल्दी जल्दी काम निपटा लेता हूँ, ताकि बाॅस खुश हो जाये क्योंकि शाम एडवांस भी लेना है...
काम को जल्द निपटाने के चक्कर में एक गलती हो
गई, बाॅस खुश होने की जगह और नाराज हो गए,
एडवांस मांगने की हिम्मत ही नहीं हुई...
खैर दिन बीता छुट्टी हुई,
अब घर पर क्या कहूंगा, यह सोचकर परेशान हो गया,
तभी साथी कर्मचारी ने कहा, क्या बात है यार बहुत परेशान दिख रहे हो,
उसने सारी व्यथा अपने दोस्त को बताई और कहा यार दिल करता है, रेल कि पटरी पर लेट जाऊं...
दोस्त ने कहा चल परेशान ना हो , मेरे साथ चल, दोनों ने साथ पी और अपने अपने घरों की ओर चल दिए,
घर पहुंच कर उसने कहा कि एडवांस नहीं
मिल पाया.
फिर घर में कुछ ये हुआ........
बेटा माँ से: मम्मी पापा ने शराब पी , पर मुझे
फीस नहीं दी...
बेटी: मेरी ड्रेस नहीं लाये और शराब पी ली...
पिता: चश्मा लाने के लिए पैसे नहीं थे और शराब के
लिए थे...
माँ: भूल गया है तू, अपना पेट काट काट कर पाला था तूझे, शराब के लिए पैसे है, माँ के लिए नही.
और अंत में पत्नी ने कहा, अब राशन की जगह हमे भी शराब ही पिला दो...
-------------------------------
कुछ जानने योग्य तथ्य...
पिता का चश्मा 500Rs
माँ का ऑपरेशन 3000Rs
बेटे की फीस 700Rs
बेटी की ड्रेस 1200Rs
घर का राशन 5000Rs
शराब जो कि दोस्त ने पिलाई 300 रूपये,
क्या इन 300 रूपयों से घर की जरूरतें पूरी
हो जाती ???
एक मर्द अपने परिवार के लिए हर संभव प्रयास करता है,
उसे प्यार और सम्मान दे,
उसकी मजबूरियों को समझने की कोशिश
करें...!!

एक बार एक साधारण व्यक्ति ने खुश होकर एक पत्रकार महोदय को नई साइकिल भेंट कर दी , पर उसमें कैरियर नहीं था।पत्रकार महोदय बह...
01/04/2024

एक बार एक साधारण व्यक्ति ने खुश होकर एक पत्रकार महोदय को नई साइकिल भेंट कर दी , पर उसमें कैरियर नहीं था।

पत्रकार महोदय बहुत खुश हुए और कैरियर लगवाने एक दुकान पर चले गए ।

पत्रकार महोदय ने दुकानदार से बड़े तेवर में कहा कि " मैं एक बड़ा पत्रकार हूँ इसलिए मुनासिब रेट में एक बढ़िया सा कैरियर इस साइकिल में झटपट लगा दो "।

दुकानदार ने कैरियर तो लगा दिया, लेकिन फ़िर पता नहीं उसके दिमाग में क्या सूझा कि उसने साइकिल से स्टैंड खोलकर हटा दिया।

पत्रकार ने बड़े अचरज़ में इसका कारण पूछा, तो दुकानदार बोला— " श्रीमान एक पत्रकार का कैरियर और स्टैंड दोनों एक साथ नहीं हो सकते। अगर स्टैंड लोगे , तो समझो कैरियर गया और अगर कैरियर बनाओगे तो स्टैंड नहीं ले सकते "।

कभी कोई मुझसे पूछे की तुमने सारी जिंदगी क्या किया? तो मैं कहूंगा कि इंतज़ार...
30/03/2024

कभी कोई मुझसे पूछे की तुमने सारी जिंदगी क्या किया? तो मैं कहूंगा कि इंतज़ार...

ऐसी भी हैं कुछ महिलायेंआजीवन सुरक्षा के लिए पिता, भाई, पति, बेटा चाहिए शादी के लिए पैसे वाला या  कमाऊ लड़का चाहिएलेकिन प...
10/03/2024

ऐसी भी हैं कुछ महिलायें

आजीवन सुरक्षा के लिए पिता, भाई, पति, बेटा चाहिए
शादी के लिए पैसे वाला या कमाऊ लड़का चाहिए
लेकिन पुरुषों का हर वक्त विरोध करना
जिसकी खाना, उसके ही खिलाफ हर वक्त जहर उगलना......ऐसी भी है कुछ महिलाएं

सास बहू की लड़ाई
ननद भौजाई की लड़ाई
देवरानी जेठानी को लड़ाई
महिला ही महिला की दुश्मन पर,
दोषी बनाकर पुरुष को निशाना बनाना.....ऐसी भी है कुछ महिलाएं

जो बेटा, भाई कल तक परिवार बिना रह नहीं सकता था,
शादी करके आते ही पति का घर तोड़ो
पति को उसके ही घर वालों से लड़ा कर अलग करो......ऐसी भी है कुछ महिलाएं

स्वतंत्रता के नाम पर अंग प्रदर्शन करना
डांस के नाम पर सपने जिस्म के मांस के टुकड़ों का प्रदर्शन करना,
अपनी हवस मिटाने के लिए एक पर पुरुष संग होटल में जाना
पर जब कुछ भी आउट ऑफ कंट्रोल हो तो पुरुष पर झूठे आरोप लगा पुरुष पर दोष मढ देना,
बिस्तर पर पुरुष चाहिए
बच्चा जन्म देने के लिए पुरुष चाहिए, पर पुरुष को कभी मान ना देना .......ऐसी भी है कुछ महिलाएं

कुछ लोगो को बुरा लगेगा, क्षमा कीजियेगा मुझे भी पता है सब एक जैसी नहीं होती इसलिए अगर आप ऐसी नहीं हैं तो दिल पर मत लीजियेगा पर दिल पर हाथ रख कर कहिये क्या ये झूठ है ।

Note :- बाकी सभी संस्कारी महिलाओं, माताओं, बहनों को सादर नमन 🙏🙏🙏

05/02/2020

आज नदी किनारे की शाम याद आई
उनके साथ बिताए वो पल याद आई
एक वक़्त था जब उनकी लत था मैं
आज वक़्त है कि उनके मोबाइल में भी ब्लॉक हुँ मैं
आज के दिन ही उन्होंने किसी और का दामन थामा था
आज ही के दिन उन्होंने मुझे छोड़ा था
मैं आज भी करता हूँ उनका इंतज़ार
लेकिन छोड़ दिया उन्होंने, मुझे बेज़ार
उनकी याद आई हर वो बात आई
नदी किनारे की शाम याद आई

Address

Patna New City
800001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dil ki Awaaj posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share