Kavya Rachna Ek Prawaah

Kavya Rachna Ek Prawaah New poems written by me (Abhishek kr Singh~Balaji)

नारायण नारायण🙏आज इस बात को सार्वजनिक तौर पर कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है की, मैं आज राम जन्मभूमि अयोध्या के राम मंदिर...
22/01/2024

नारायण नारायण🙏
आज इस बात को सार्वजनिक तौर पर कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है की, मैं आज राम जन्मभूमि अयोध्या के राम मंदिर में दीनदयालु प्रभु श्री राम जी के प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हो सकता इस बात से मर्माहत हूँ और वहीं इस बात से ये दिल का दर्द और भी ज़्यादा बढ़ रहा है की कई लोगों को वहाँ विशिष्ट और अतिविशिष्ठ आमंत्रण पत्र प्राप्त करके उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है 🙏 जाने माता सबरी के भाग्य किसे किसे प्राप्त हैं 💞
वैसे इसका निराकरण तो प्रभु स्वयं ही करेंगे की इस महान अनुष्ठान में शामिल होने का सौभाग्य और असौभाग्य 💔
माफ़ कीजिएगा किंतु - जिन्हें - चाहे राजनीतीवाद, भाईवाद, दलवाद या अन्य किसी भी वाद के माध्यम से- वहाँ पहुँच कर प्रसाद पाने के भागी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है उनसे बस सिर्फ़ जलन ही हो सकती है ❤️‍🔥

एक दिन मेरे राम ने मुझे प्यार से बुलाया
एक दिन मेरे श्याम ने मुझे प्यार से बुलाया।
गले से लगाकर आहिस्ता से मुझे समझाया, क्या - अरे यही -
जो राम का नहीं है वो किसी काम का नहीं।
जग का मैं विधाता, त्रेता का राम हूँ गीता का वक्ता मैं द्वापर का श्याम हूँ, मैं ही इस श्रृष्टि का सार और मैं ही नि:सार हूँ ।
लिखा नियति मेरा ख़ुद मेरे लिये भी टला नहीं, है विधान पहले ही नियत तू काम किए जा ।
क्या होगा ना होगा अंजाम, से अनजान, तू काम किए जा,
नाम लेकर मेरा तू हर काम किए जा।
एक बार नहीं सौ बार नहीं हर बार किए जा, छोड़ परिणाम मुझ पर तू काम किए जा।
तब से ही मैं कहता हूँ दोस्तों राम राम किए जा श्याम श्याम किए जा।
दुख हो या सुख राम राम किए जा, राम नाम से बंधा हर काम किए जा, जो भी हो परिणाम राधे-श्याम किए जा। अरे नहीं कुछ तो कम से कम खुस होंगे हनुमान तू राम राम किये जा।

Ask~बालाजी

नारायण नारायण दिल्ली की एक सुनहली शाम गतिशील मेट्रो ट्रेन से ली गई कुछ तस्वीरें 📷हाँ भौतिक शास्त्र से - सापेक्ष गति सिद्...
21/12/2023

नारायण नारायण
दिल्ली की एक सुनहली शाम गतिशील मेट्रो ट्रेन से ली गई कुछ तस्वीरें 📷
हाँ भौतिक शास्त्र से - सापेक्ष गति सिद्धांत का एक साक्ष्य
उड़ती चिड़िया और मेट्रो एक ही दिशा में गतिमान, तुलनात्मक रूप से स्थिर सूरज के सापेक्ष
चिड़िया समय के साथ पीछे जाती हुई दिखती है

नारायण नारायण🙏आप सभी को शारदीय नवरात्र के पूर्णाहुति और दशहरा एवं विजयादशमी की शुभकामनाएँ 🙏 अपने स्वयं के अंदर की दस बुर...
24/10/2023

नारायण नारायण🙏
आप सभी को शारदीय नवरात्र के पूर्णाहुति और दशहरा एवं विजयादशमी की शुभकामनाएँ 🙏
अपने स्वयं के अंदर की दस बुराइयों का अंत करने का प्रण लेने की सीख देते इस पर्व की संस्कृति को नमन 🙏
जय माँ भवानी 🚩🙏

19/01/2023
है देश तिरंगे के नीचे, निर्भय इक आकार बना |तन-मन-धन और रंग-धर्म, मिलकर इक पहचान बना,अखिल विश्व के नक्से पर अखिल विश्व के...
04/12/2016

है देश तिरंगे के नीचे, निर्भय इक आकार बना |
तन-मन-धन और रंग-धर्म, मिलकर इक पहचान बना,
अखिल विश्व के नक्से पर
अखिल विश्व के नक्से पर, पुन गर्वित छवी हिन्दुस्तां बना
धवल-शिखर से नील-जलधि तक,
धवल-शिखर से नील-जलधि तक, मनोरम इक आकार बना |
है देश तिरंगे के नीचे, निर्भाय इक आकार बना

शहिद भगत औ बुद्ध-विवेका,
शहिद भगत औ बुद्ध-विवेकानंद का, स्वप्न इक साकार बना
संस्कृती-सभ्यता औ परम्परा का, मिश्रित आर्यावर्त महान बना
सत्य ज्ञान औ विज्ञान पथ पर,
सत्य ज्ञान औ विज्ञान पथ पर, निर्मित राष्ट्र महान चला
है देश, है देश तिरंगे के नीचे, निर्भय इक आकार बना |

युवा शक्ति प्रश्फुटित होकर, राष्ट्र श्रिजन आधार बना
सज़ल-सबल कर,
सज़ल-सबल कर-लयबद्ध हो, परिवरतन का प्रमाण बना
है देश है देश तिरंगे के नीचे, निर्भय इक आकार बना |

राष्ट्रहित को राष्ट्रधर्म मान, कर्मभुमि पर बलीदान हुआ
जगदगुरू-जगपालक
जगदगुरू-जगपालक-हिमवासी का, पूजक, मनुज महान बना
है देश, है देश तिरंगे के नीचे, निर्भय इक आकार बना
है देश तिरंगे के नीचे, निर्भय इक आकार बना

~ask

26/11/2016

जिसे दर्पण मे देखा है, वो ख्वाबो का मसीहा है

जिसे दर्द मे देखा है वो सहन का पुतला है
जिसे साहस मे देखा है वो उम्मीदो का सेहरा है

जिसे दर्पण मे देखा है, वो ख्वाबो का मसीहा है

जिसे जज्जबातो मे देखा है वो सबर का परिचय है
जिसे हालातो मे देखा है वो हिम्मत का इशारा है

जिसे दर्पण मे देखा है, वो ख्वाबो का मसीहा है

जिसे नियत मे देखा है वो किस्मत का सलीका है
जिसे मन मे देखा है वो खुद का छाया है

जिसे दर्पण मे देखा है, वो ख्वाबो का मसीहा है
जिसे दर्पण मे देखा है, वो ख्वाबो का मसीहा है

Social poem ...
26/11/2016

Social poem ...

One more poem.
26/11/2016

One more poem.

Jeevan Charitra.किस पल मे क्या करोगे यहां आयना यही है |ये  ज़िन्दगी की घड़ी है यहां सूई ना रुकी है |किस किस से अब मिलोगे ...
21/11/2016

Jeevan Charitra.

किस पल मे क्या करोगे
यहां आयना यही है |

ये ज़िन्दगी की घड़ी है
यहां सूई ना रुकी है |

किस किस से अब मिलोगे
यहां हर एक कीमती है |

किस दिल मे क्या छुपा है
यहां रजेशा सभी हैं |

क्या रूप ये सजा है
यहां दीदार को सभी हैं |

किस बात पे यूँ खफा हो
यहां खुदगर्ज तो सभी हैं |

किस बात की खुसी है
यहां माया हि सभी है

क्यूँ इंतिजार मे खड़ा है
यहां मस्ती मे सभी हैं |

~ask.

20/11/2016

Demonetisation
Halat e bayan kya karun,
Yahan bayan e halat hai;
Najr e inayat kya karun,
Yahan katar e najar hai;
Khamosi ki shiddat hai,
Ya shiddate khamosh hain;
Darakht e shakh me pebast tha,
Ab gardish e aam wo note hai;

Ye Mr PM ji ke black money ke against huye surgical strike ke baad ke stithi ka shukshm varnan hai.
Jisme
pratham do pankti banker aur aam janta ka halat bayan karti hai.
Dusri do pankti har taraf katar baddh logo ko aur kai chando 👧ke ek saath najar ke samne hone ki stithi baya karti hai.
Tisri do panktiya un gutan bhari mushkan ke naam hai jinki kai yojnayen dhwast ho rahi hain inme kuchh jayaz to kuchh najayaz bhi hain.
Antim yani chouthi do panktiyan us lal aur peeli note ki kahani bayan karti hai jo ab tak sanduko me tah dar tah saja kar rakhi jaati thi ab bemol kagaj ka tukda ban gayi.

~ask.

20/11/2016

वो शाम हि क्या ज़िसमे लाली ना हो,
वो सुबह हि क्या ज़िसमे अंगढाई ना हो |
वो निशा हि क्या ज़िसमे दर्द ना हो,
वो दिवस हि क्या ज़िसमे तमस ना हो |
वो अदा हि क्या ज़िसके जलवे ना हो,
वो जवानी हि क्या ज़िसके दिवाने ना हो |
वो घड़ी हि क्या ज़िसमे वक्त ना हो,
वो वक्त हि क्या ज़िसमे हकिकत ना हो |
वो पढे हि क्या ज़िसमे समझ ना हो,
वो समझ हि क्या ज़िसमे लेखनी ना हो |

Ask.

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