08/11/2024
*उन सभी को नमन*
*जो अपने परिवार के लिए*
*21 से 55 वर्ष घर सम्भालने में*
*व्यस्त रही। आज उनके*.
*लिए समर्पित एक*
*छोटी सी रचना*
*भेज रही हूं । 🙏*
*कैसे कटा 21 से 55*
*तक का यह सफ़र,*
*पता ही नहीं चला ।*😔
*क्या पाया, क्या खोया,*
*क्यों खोया,*
*पता ही नहीं चला !*😒
*बीता बचपन,*
*गई जवानी*
*कब आया बुढ़ापा,*
*पता ही नहीं चला ।*🤔
*कल बेटी थे,*
*कब सास बन गये,*
*पता ही नहीं चला !*😊
*कब माता से*
*नानी एवं दादी बन गये,*
*पता ही नहीं चला ।* 😜
*कोई कहता सठिया गयी,*
*कोई कहता छा गयी,*
*क्या सच है,*
*पता ही नहीं चला !*😉
*पहले माँ बाप की चली,*
*फिर पति की चली,*
*फिर चली बच्चों की,*
*अपनी कब चली,*
*पता ही नहीं चला !*😀
*पति कहते*
*अब तो समझ जाओ,*
*क्या समझूँ,*
*क्या न समझूँ,*
*न जाने क्यों,*
*पता ही नहीं चला !*🤷♀️
*दिल कहता जवान हूँ मैं,*
*उम्र कहती है नादान हूँ मैं,*
*इस चक्कर में कब*
*घुटनें घिस गये,*
*पता ही नहीं चला !*😱
*सफेद हो गये बाल,*
*लटक गये गाल,*
*लग गया चश्मा,*
*कब बदली यह सूरत*
*पता ही नहीं चला !*
*समय बदला,*
*मैं बदली*
*बदल गई* *मित्र-*
*मंडली भी*
*कितने छूट गये,*
*कितनी रह गयी सहेली ,*
*पता ही नही चला*😨
*कल तक अठखेलियाँ*
*करते थे सहेली के साथ,*
*कब सीनियर सिटिज़न*
*की लाइन में आ गये,*
*पता ही नहीं चला !*😒
*बहु, जमाईं, नाते, पोते,*
*खुशियाँ आई,*
*कब मुस्कुराई उदास*
*ज़िन्दगी,*
*पता ही नहीं चला ।*😊
*जी भर के जी लो प्यारी सखियों*
*फिर न कहना कि ..*
पूरी उम्र कब बीत गई😢
*"मुझे पता ही नहीं चला*😇