15/05/2026
जब चंडीगढ़ में एक आदमी ने 18 साल तक चुपचाप, चोरी चोरी एक “Illegal Empire” खड़ा किया… और जब सरकार उसे बुलडोज़र से गिराने पहुँची, तो पूरा मामला ही उल्टा पड़ गया! 😂🤣😜
1950 के दशक में जब चंडीगढ़ बसाया जा रहा था, तब पहले 28 गांवों को अधिग्रहित किया, जिनकी संख्या बाद में 58 तक हो गई थी. गांवों के कच्चे-पक्के घर, कुएँ, चौपालें आदि सब तोड़ दिए गए.
इन्हीं खंडहरों के मलबे से एक आदमी चुपचाप अपना अलग ही संसार बसा रहा था. वो रात के अंधेरे में, कभी ब्रह्ममुहूर्त में, साइकिल पर निकलता और गांवों के मलबे से पत्थर, ईंटें, टूटे मिट्टी के बर्तन, पुरानी चूड़ियाँ, बिजली के फ्यूज, चीनी मिट्टी के सिंक और न जाने क्या-क्या “चुरा” कर 😂 एक सुनसान जगह इकट्ठा करता रहता. यह जगह सुखना लेक के पास जंगल में, लैंडफिल के पीछे पड़ी एक वीरान सी जगह थी.
वहां उसने एक झोंपड़ी भी डाल ली थी. वो चूंकि PWD में रोड इंस्पेक्टर था, इसलिए किसी को उस पर शक भी नहीं हुआ.
फिर आया साल 1975.
सरकार को पता चला कि सरकारी जमीन पर किसी ने कबाड़ से पूरा “Recycled Kingdom” खड़ा कर लिया है. बुलडोज़र पहुँचे… अफसर पहुँचे… लोग पहुँचे…
लेकिन जैसे ही उन्होंने उस जगह को देखा, सब मंत्रमुग्ध रह गए. जो लोग उसे गिराने आए थे, वही उसके दीवाने बन गए!
नतीजा?
सरकार ने कहा, “नेक चंद जी, इस नेक काम को सरकारी खर्चे पर जारी रखिए.” आज पूरी दुनिया उस जगह को “रॉक गार्डन” के नाम से जानती है. और उस “नेक अवैध साम्राज्य” 😂 के निर्माता थे, श्री नेक चंद.
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें बचपन से यही सीख मिली थी कि खाली नहीं बैठना चाहिए. शाम और अलसुबह उनके पास समय होता था, इसलिए टाइम पास के लिए उन्होंने यह काम शुरू किया था.
एक बार जब तत्कालीन प्रधानमंत्री चंडीगढ़ आईं, तो उन्होंने नेक चंद जी से मिलने की इच्छा जताई. सुबह उन्हें सूचना दे दी गई थी, लेकिन उन्होंने इसे मज़ाक समझ लिया. नतीजा यह हुआ कि जब इंदिरा जी वहाँ पहुँचीं, तो नेक चंद जी खुद मौजूद ही नहीं थे! 😄
नेक चंद सैनी जी पर कई विदेशी और देसी लेखकों ने किताबें भी लिखीं हैं. भारत सरकार ने उन्हें पदम श्री से सम्मानित किया था. उन्होंने 90 वर्ष से अधिक की लंबी उम्र पाई.
कभी-कभी इतिहास के सबसे खूबसूरत अजूबे… टूटे हुए सामान और एक अकेले आदमी के पागलपन से बन जाते हैं.✍️✍️✍️✍️
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