09/06/2026
9 जून 2024 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने का जो जश्न आज 2026 में मनाया जा रहा है, उसकी जमीनी हकीकत देश का आम नागरिक अच्छी तरह जानता है।
12 साल के कथित "सुशासन" का हिसाब पेश किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या देश की 140 करोड़ जनता खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल महसूस कर रही है?
80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देना अगर उपलब्धि है, तो यह भी स्वीकार करना होगा कि देश की बड़ी आबादी आज भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई है। विकास का असली मतलब लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि उन्हें हमेशा सरकारी सहायता पर निर्भर रखना।
90 से अधिक नए हवाई अड्डे और 140 वंदे भारत ट्रेनें गिनाई जा रही हैं, लेकिन आम आदमी पूछ रहा है कि क्या उसकी यात्रा सस्ती हुई या महंगी? जो सफर कभी ₹100–₹200 में हो जाता था, वह आज कई गुना महंगा पड़ रहा है।
1.45 लाख किलोमीटर सड़कों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ते टोल टैक्स का बोझ भी जनता ही उठा रही है।9 जून 2024 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने का जो जश्न आज 2026 में मनाया जा रहा है, उसकी जमीनी हकीकत देश का आम नागरिक अच्छी तरह जानता है।
12 साल के कथित "सुशासन" का हिसाब पेश किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या देश की 140 करोड़ जनता खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल महसूस कर रही है?
80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देना अगर उपलब्धि है, तो यह भी स्वीकार करना होगा कि देश की बड़ी आबादी आज भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई है। विकास का असली मतलब लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, न कि उन्हें हमेशा सरकारी सहायता पर निर्भर रखना।
90 से अधिक नए हवाई अड्डे और 140 वंदे भारत ट्रेनें गिनाई जा रही हैं, लेकिन आम आदमी पूछ रहा है कि क्या उसकी यात्रा सस्ती हुई या महंगी? जो सफर कभी ₹100–₹200 में हो जाता था, वह आज कई गुना महंगा पड़ रहा है।
1.45 लाख किलोमीटर सड़कों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ते टोल टैक्स का बोझ भी जनता ही उठा रही है।
4 करोड़ पक्के घर और 10 करोड़ गैस कनेक्शन की बात होती है, लेकिन ₹400 का गैस सिलेंडर ₹1,100 तक पहुंचने का दर्द भी लोगों ने झेला है।
स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का प्रचार हुआ, लेकिन सरकारी अस्पतालों में बेड, डॉक्टर और संसाधनों की कमी की शिकायतें आज भी खत्म नहीं हुई हैं।
2014 में देश पर लगभग ₹55 लाख करोड़ का कर्ज था, जो आज बढ़कर ₹170 लाख करोड़ से अधिक बताया जाता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास का लाभ आखिर किसे मिला?
नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन जैसे फैसलों का असर करोड़ों छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों ने अपनी जिंदगी में महसूस किया।
देश की बुनियाद IIT, IIM, AIIMS, ISRO और BARC जैसे संस्थानों ने मजबूत की थी। आज जरूरत इस बात की है कि विकास का मूल्यांकन प्रचार से नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और आम नागरिक के जीवन स्तर से किया जाए।
लोकतंत्र में सवाल पूछना देशविरोध नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार है। सत्ता किसी की भी हो, जनता के प्रति जवाबदेही सबसे ऊपर होनी चाहिए।
सोचिए, सवाल पूछिए और अपने विवेक से निर्णय लीजिए।
4 करोड़ पक्के घर और 10 करोड़ गैस कनेक्शन की बात होती है, लेकिन ₹400 का गैस सिलेंडर ₹1,100 तक पहुंचने का दर्द भी लोगों ने झेला है।
स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का प्रचार हुआ, लेकिन सरकारी अस्पतालों में बेड, डॉक्टर और संसाधनों की कमी की शिकायतें आज भी खत्म नहीं हुई हैं।
2014 में देश पर लगभग ₹55 लाख करोड़ का कर्ज था, जो आज बढ़कर ₹170 लाख करोड़ से अधिक बताया जाता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास का लाभ आखिर किसे मिला?
नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन जैसे फैसलों का असर करोड़ों छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों ने अपनी जिंदगी में महसूस किया।
देश की बुनियाद IIT, IIM, AIIMS, ISRO और BARC जैसे संस्थानों ने मजबूत की थी। आज जरूरत इस बात की है कि विकास का मूल्यांकन प्रचार से नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और आम नागरिक के जीवन स्तर से किया जाए।
लोकतंत्र में सवाल पूछना देशविरोध नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार है। सत्ता किसी की भी हो, जनता के प्रति जवाबदेही सबसे ऊपर होनी चाहिए।
सोचिए, सवाल पूछिए और अपने विवेक से निर्णय लीजिए।