Parwaan Mewati

Parwaan Mewati Writer & Shayar

03/08/2025

यहाँ मैं अजनबी हूँ!.✍️

03/08/2025

मैं यहाँ हूँ.....यहाँ हूँ
यहाँ🙏🙏

12/03/2025

एक नई सी नज़्म आपकी बज़्म में 👇👇

ऐ मेरी क़ौम के लोगों तुम्हें संभलना होगा
राह में काँटे हैं बहुत पर तुम्हें चलना होगा

अब ना रहबर है कोई और ना सहारा कोई
तुम हो मझधार में, कश्ती ना,किनारा कोई

याद करते हैं जो बस वक़्त इलेक्शन में हमको
धोकेबाज़ निकले वो,समझे थे मसीहा जिनको

सियासी भेड़ियों ने खाया है नोच कर के हमें
वोट हमने दिया था अपना सोचकर के जिन्हें

सच का अलम लेकर के तुम्हें चलना होगा
ऐ मेरी क़ौम के लोगों तुम्हें संभलना होगा

कभी "गाँधी" ने कहा था मुल्क़ की शान हमें
सियासत वाले समझतें हैं फक़त गुरदान हमें

ये वो मिट्टी है जिसने गोरों का घमंड तोड़ा था
पूरी दुनिया को "तब्लीग" से हमी ने जोड़ा था

आप लोगों से बस है यही एक गुज़ारिश मेरी
मैं तो "शायर" हूँ बस है इतनी सिफारिश मेरी

भूखे रह लेना भले खाना ना खाना ऐ यारों
काटकर पेट भी बच्चों को "पढ़ाना" ऐ यारों

तालीम का परचम लेकर आगे बढ़ना होगा
ऐ मेरी क़ौम के लोगों तुम्हें संभलना होगा

राह में काँटे है बहुत पर तुम्हें चलना होगा
ऐ मेरी क़ौम के लोगों........................!

~Parwaan Khan

07/03/2025

◆ #मोहब्बत_क्या_है???????◆


मेरे नज़दीक मोहब्बत इल्हामी शय है
ये आसमानों से उतरती है


दिल की पाक शफ़्फ़ाफ़ ज़मीन पर
ये मोहब्बत अज़ान-ए-फ़ज्र के बाद उतरती हुई पाक सहर है


ये इतनी पाक है जितना जिसका तख़य्युल पाक है
मोहब्बत इस क़दर पाकीज़ा होती है जितना जिस का ख़ून पाक होता है


मोहब्बत उस को कहते हैं जब रोज़ा-दार इफ़्तार के वक़्त
इक पानी का गिलास सामने रखा हो, उस आवाज़ का इंतिज़ार करता है कि कब हुक्म हो
उस आवाज़ का इंतिज़ार मोहब्बत है


मोहब्बत वो मंज़िल है जिस के रास्ते पे चलने वाले दिल आब-ए-ज़मज़म से धुले होते हैं


मोहब्बत रिज़्क़ है उन आँखों का जो महबूब का दीदार बा-वज़ू हो कर करती हैं


मोहब्बत का गुलशन
इज़्ज़त की ख़ुशबू से महकता है


ये मोहब्बत वो जज़्बा है जिस के तहत गर्मी की शिद्दत प्यास की हिद्दत में
छाँव की जगह पर परिंदों को पानी रखा जाए

ये मोहब्बत वो मंज़िल है जिस पे पहुँचने के लिए इक प्यासे कुत्ते को पानी पिलाना पड़ता है


मोहब्बत नाम ज़बान पे आने से पहले सोच को बा-वज़ू हो जाना चाहिए


और जिन्होंने नाम-ए-मोहब्बत को उतरन की तरह पहना है
जिन्होंने मोहब्बत को ही धोका दिया है
उन पे फिर मोहब्बत अज़ाब बन के उतरती है
मोहब्बत रूठ जाती है

क्यूँकि ये इज़्ज़त है
ऐसी इज़्ज़त जो मोहब्बत से पहले दिल की सरज़मीन पे उतरे

और इज़्ज़तें बुलंद रहें हमेशा मोहब्बतों से
जहाँ इज़्ज़त की सर-बुलंदी रहेगी वहाँ मोहब्बत हमेशा ज़िंदा रहेगी


और जिन लोगों ने
मोहब्बत को कारोबार बनाया है

वो लोग मोहब्बत की मीम से ना-बलद हैं
उन के वास्ते मोहब्बत नाम के चंद दिन होते हैं

फिर बहाने और अपनी ग़लीज़ फ़ितरत के पेश-ए-नज़र
कभी ये दर कभी वो दर

कभी यहाँ झुका कभी वहाँ झुका

अरे सुनो....

मोहब्बत के नाम पे त'अल्लुक़ात को लिबास से जल्द बदलने वाले इंसान
तौहीन मत करो मोहब्बत की

इस इल्हामी शय को इस पाक जज़्बे को पाक रहने दो। 🙏🙏

30/01/2025

सोचा ही नहीं था मैंने कभी तेरे जैसा दोस्त
मुंह फेर लेगा मुझसे मेरी मुफ़लिसी देखकर

~Parwaan Khan

#हालात_ऐ_ज़िंदगी
#शुक्रिया🙏🙏
#इनायतें🙏🙏

27/01/2025

#इंकलाबी_नज़्म 👇👇

आज भी बर्बाद हैं हम,,,,कल भी बर्बाद रहेंगे
हां ये दौर भी याद रहेगा, ये दिन भी याद रहेंगे

जहां हमारे भाईयों की लाशों पर
ताली बजवाई जाती हो
जहां सियासी मंचो से
मां बहनों की गाली दी जाती हो

हां ये दौर भी याद रहेगा,ये दिन भी याद रहेंगे

जहां रुखसत होते हुऐ जनाजों पर
पत्थर बरसाएं जाते हो
जहां ठोंडाओं के इशारों पर
झूठे 376 लगवाए जाते हो

हां ये दौर भी याद रहेगा,ये दिन भी याद रहेंगे

जहां गैरों का दिल बहलाने के लिए
अपने चोर बताए जाते हो
जहां मां बहनों के सामने
खुल्ले(रण्डी)नाच नचाए जाते हो

हां ये दौर भी याद रहेगा,ये दिन भी याद रहेंगे

जहां एक लड्डू और चाय की खातिर
दिनभर जिंदाबाद के नारे लगाए जाते हो
जहां गोत्रपाल के नाम पर मुझ जैसे
इंकलाबी शायर पर ताने मारे जाते हो

हां ये दौर भी याद रहेगा,ये दिन भी याद रहेंगे
आज भी बर्बाद हैं हम,,,कल भी बर्बाद रहेंगे

~Parwaan Khan ✍️

Address

Okhla

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Parwaan Mewati posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to Parwaan Mewati:

Share

Category