15/05/2020
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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इंतजार शत्रु है,
उस पर यकीन मत करो
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे महसूस हुआ है
कि हर बात का एक मतलब होता है
यहां तक कि घास के हिलने का भी
हवा का खिड़की से आने का
और धूप का दीवाप पर
चढ़कर चले जाने का।
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