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Original contents

08/05/2022

मातृ दिवस पर विशेष:

कहते हैं संसार मे माँ से बड़ा कोई भगवान नही होता,
जिनकी चरणों मे जन्नत वा दिल मे ममता का वास हैं होता,
विकट परिस्थितियों मे भी माँ का आंचल अपनी सन्तान के लिये कभी छोटा नही होता,
खुद लड़खड़ाती हैं पर संतान को चलना सिखाती हैं,
देख कर आंसू संतान के, खुद अकेले दुनिया से लड़ जाती हैं,
ये माँ हैं साहेब... हार कहाँ मानती हैं,
जहाँ दवा ना काम आये वहाँ उसकी दुआ भी लग जाती हैं।
माँ के त्याग और बलिदान को तुम भूल ना जाना मित्र,
जिस ने तुम को जीवन भर सराहा, वृध्दावस्था मे उसे वृधाश्रम छोड़ ना आना तुम।।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

इक्तेफाकन कहुँ या बदकिस्मती, आज भीड़ मे एक चेहरे पर नजर पड़ी।फिर भूली बिसरी किस्से-कहानियो की, दिल मे दबी एक किताब खुली।।ल...
20/03/2022

इक्तेफाकन कहुँ या बदकिस्मती, आज भीड़ मे एक चेहरे पर नजर पड़ी।
फिर भूली बिसरी किस्से-कहानियो की, दिल मे दबी एक किताब खुली।।
लब खुले इस्तकबाल हुआ, जब एक दुसरे का हाल-चाल लिया।
लफ्जो की कसक वा आंखों से छलकती नमी, आज भी वही कमी बयाँ कर रही।।
कि अंजाम ने दुख दिया हैं, वरना यादें तो प्यारी थी।
कैसे बयाँ कर किसी से वो दौर, कि तेरी-मेरी भी कभी गहरी यारी थी।।


*महिला दिवस पर विशेष:*नारी ही क्यूँ परित्याग करे,नित जीवन क्यूँ नर उसका हर सुख हरे,विलासिता पूर्ण जीवन क्यूँ सिर्फ नर जी...
08/03/2022

*महिला दिवस पर विशेष:*

नारी ही क्यूँ परित्याग करे,
नित जीवन क्यूँ नर उसका हर सुख हरे,
विलासिता पूर्ण जीवन क्यूँ सिर्फ नर जीये,
क्यूँ झूठा बल दिखला कर नारी को अबला कहे,
क्यूँ आवरण की छाव मे घुट-घुट के जीवन जीये,
आत्मबल से 21वी सदी मे नारी ने बदलीं ये परिपाटी.....
पुरुषो के साथ देखो कन्धे से कन्धा मिलाती ये नारी,
समाज का उपहास उड़ाती की देखो नारी क्या नहीं कर पाती?
उन्नत समाज के अग्रणी पथ पर खडी यह नारी,
विश्व परिदृश्य मे अपनी अभिन्न छाप व एहमियत बतलाती।।

विश्व महिला दिवस की हार्दिक बधाई।।

* *

19/11/2021

समय ने पूछा मुझ से, क्या तूने मंज़िल पायी।
कुछ सोचा तो मन मे दबी तीस, अश्रुओं मे छलक आयी।।
याद आये जीवन के सफर मे, छूटें कुछ अनमोल पड़ाव।
बिना जिनके मिली मंज़िल, आज भी हमे रास ना आयी।।

दिल भी थोडा अक्खड़ हैं, मंज़िल पे जो बैठा हैं।
इस उम्मीद मे की जो छूट गये हैं पीछे, आ जाएंगे एक-एक कर के।।
मांग के माफी अपनी गल्तियों की, हम आगे बढ जाएंगे।
क्यूँ की,
अफसोस के वजन तले दबे मन से, अब आगे का सफर गवारा नहीं।।


05/11/2021

कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी का वार, अपने संग लाया धनतेरस का त्योहार।
मंत्रोचारण से भरे वातावरण मे, श्री कुबेर व माँ लक्ष्मी को सब पुकारे अपने द्वार।।
सोने के रथ व चांदी कि पालकी पर हो के सवार, माँ लक्ष्मी का आगमन हो आप के द्वार।
आप के लगन, श्रद्धा भाव व उत्साह को देख कर, माँ लक्ष्मी दे ऐसा वरदान।।
कि सब संकट हर ले आप के।
और करे परिवार पर सुख, समृद्धि व धन की बरसात।।

*धनतेरस की हार्दिक शुभकामनायें।*

* *

05/11/2021

दीपों का उत्सव हैं आया,
अपने संग नव उत्साह हैं लाया।
रंगोली से सजा ये आंगन,
हर उम्मीदो को करता हैं रौशन।।
महामारी के मध्य फैले अन्धकार मे,
जगमग दीप जगाता आशा की एक नयी किरण।
रिश्तो मे घुली कडवाहट को भूल,
सब को सहर्ष गले लगाना।।
घर का अंधियारा मिटाने की होड़ मे,
अपने मन भीतर छुपे मैल को जलाना भूल ना जाना।
इस दिवाली रहेगा आपका बेसब्री से इन्तज़ार,
ना भी आये आप तो हम ना भूलेगे आप के नाम का अपने घर मे एक दिया जलाना।।

शुभ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

* *

30/08/2021

कारगार की चार दिवारी मे, गूंजी किलकारी हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी के रंग मे, देखो रंग गयी दुनिया सारी हैं।।
जन्म दिया देवकी माँ ने, लालन-पालन के कारण माँ यशोदा कहलाती हैं।
बाल्यकाल मे नाम था कान्हा, पर स्वयं भगवान विष्णू के अवतारी हैं।।
मथुरा नगरी का किया उद्धार, कंस से मुक्ति जब दिलायी हैं।
छप्पन भोगो से भी ज्यादा, माखन जिनको प्यारा हैं।।
गोपियो के संग रास रचाते, एक मुस्कान से सब कष्ट हर लेते।
ऐसे नटखट नंद-गोपाल को, राधारानी अति प्यारी हैं।।

कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये।


22/08/2021

राखी का त्योहार ज्यो आता।
दूर बसे भाई-बहन को पास ले आता।
हाथ की कलाई पे सजी प्रेम की डोरी देख।
नीरस मन खुशियों से भर जाता।।
कर देती है ये सारे गिले-शिकवे दूर।
इतनी मजबूत होती है ये कच्चे धागे की पावन डोर।।
जब आंच आये बहन की आन-बान-शान पर।
तू निसंकोच राखी की कर्तव्यबेदि पर चढ जाना।।
इस भागम-भाग जीवन मे राखी का बडा हैं मोल।
हे भाई! तू चंद सिक्को की खनक मे इसे ना तोल।।


19/08/2021

क्या ले कर आये थे, और क्या ले कर जाएंगे।
दिलो मे नफरत भरे इस जहान मे, हम अपना एक अलग मुकाम बनाएँगे।।
स्वार्थ की इस दुनिया मे, सब को एक नयी राह दिखाएँगे।
तुम अपना उल्लू सीधा करना, हम उम्मीदों को पंख लगाएँगे।।
निराशा के इस अन्धकार मे, हम परिवर्तन का सुर्य उगाएंगे।
तुम हांड-माँस के पुतले बने रहना, हम एक दिन मनुष्य से इन्सान बन जाएंगे।।


18/08/2021

श्रावण का जब मास हैं आता,
शिव भक्ति मे जन-मानस दूब जाता,
शाखो पे पड़े झूले देख,
सहसा सजनी का मन इठलाता,
रिमझिम बारिश तन-मन हैं भिगाता,
प्रियवर के आने की आस जगाता,
वियोग का दर्द तब दूर हो जाता,
प्रियतम जब घर वापस आता,
चंचल चितवन तब प्रसन्न हो जाता,
नवजीवन का मन ख्वाब सजाता,
श्रावण का जब मास हैं आता।।


17/08/2021

बदले की इस आग ने देखो, कैसा वीभत्स रूप दिखाया हैं।
बिन माचिस चिन्गारी के, हर रिश्ते को झुल्साया है।।
कहने को तो सब अपने हैं, पर मुख पर मीठे व पीठ पीछे डसते हैं।
विपत्ति बटाने कोई हाथ मिला ना, जीवन मे ऐसा भी एक पल आया हैं।।


17/08/2021

झूठ उन के इस कदर हम को छलनी कर गये।
खुद को संभालना चाहा बहुत लेकिन ठिठक कर गिर गये।।
दूर जाने का इरादा लेकर, फिर उन्हीं के हमसफर हो गये।
क्या पता कब रंजिशे के इस खेल मे, हम बन्दिशो के गुलाम हो गये।।

(रंजिश - मन मुटाव, बन्दिश - बन्धन)

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