21/11/2025
यह तस्वीर मेरे परिवार के लिए दैवीय संकेत और गहरे संतोष का क्षण है।
तस्वीर में मेरे पूज्य जीजाजी श्री अमित गौतम (दमोह जिले से म.प्र. पुलिस में कार्यरत), मेरी दीदी, और भांजी दुर्गा गौतम, भोपाल की हमारी मार्गदर्शक आईजी रुचिवर्धन मिश्र दीदी (पुलिस मुख्यालय, भोपाल में आईजी) के साथ, हैदराबाद के कान्हा शांति वनम की पावन भूमि पर हैं।
मेरा मन तुरंत कुछ ही महीने पीछे, सितंबर के पवित्र दिनों में लौट जाता है जब मैं ये तस्वीर देखते है। मैं स्वयं अपनी माँ के साथ कान्हा शांति वनम गया था दुर्गाष्टमी के कुछ दिन पहले। वह मात्र चार दिन की यात्रा नहीं थी—वह मेरे जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट थी।
शरद नवरात्रि की उन पवित्र तिथियों में, कान्हा शांति वनम की दिव्य ऊर्जा ने मेरे हृदय पर ऐसा अमिट निशान छोड़ा कि मुझे सहज मार्ग की गहराई में उतरने का मर्म समझ आया और मैं एक अभ्यासी बनने की राह पर चल पड़ा। और अब, देखिए यह कैसा अद्भुत, रोंगटे खड़े कर देने वाला संयोग है जहाँ मेरा हृदय आध्यात्मिक शांति पाया, आज ठीक उसी स्थान पर मेरे जीजाजी को मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से आधिकारिक रूप से यह आत्मिक ज्ञान अर्जित करने के लिए भेजा गया है!
यह पुलिस की आंतरिक व्यथा और शुजाआत से भरा समाधान है मैं इस पहल की सराहना केवल एक रिश्तेदार के नाते नहीं कर रहा, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति होने के नाते कर रहा हूँ जिसने पुलिस की आंतरिक व्यथा को करीब से समझा है। दो साल क्राइम रिपोर्टिंग के दौरान मैंने भोपाल में पुलिसकर्मियों के गहन तनाव और असीमित जिम्मेदारी के बोझ को देखा है। आम जनता कल्पना भी नहीं कर सकती कि उनकी नौकरी कितनी थका देने वाली और भावनात्मक रूप से निचोड़ देने वाली होती है।
यह जानते हुए, मध्य प्रदेश पुलिस का यह कदम शुजाआत से भरा है! पुलिस के आला दर्जे के अधिकारियों ने इस गंभीर विषय को समझा और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
अनुबंध का उद्देश्य साफ है: पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए तनावमुक्ति, भावनात्मक संतुलन और समग्र कल्याण सुनिश्चित करना। यह पहल करुणा और दूरदर्शिता का प्रमाण है।
आईजी रुचिवर्धन मिश्र दीदी जैसी अधिकारियों के कुशल समन्वय में, यह पहल एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों के जीवन में शांति और सकारात्मकता लाएगी।
इस मानवीय और कल्याणकारी प्रयास के लिए मध्य प्रदेश पुलिस को मेरा कोटि-कोटि नमन। जब विभाग अपने कर्मचारियों के हृदय का ध्यान रखता है, तो वह सेवा दिव्य बन जाती है!