17/03/2020
आरक्षण का देखें खेल बन जायेंगे प्रोफेसर, फ़िर निकट भविष्य में इन्ही के निर्देशन में होगी किसी शोधार्थी की शोध!
आखिर आरक्षण से प्रोफेसर या शिक्षक बनने से किसी का भी क्या भला सिवाए आरक्षण से लाभ प्राप्त अभ्यर्थी के जो फ़िर प्रमोशन आरक्षण मांगेगा!
हर क्षेत्र मे आरक्षण दो मगर शिक्षा में गुरु योग्य हो, अवसर सबको मिले लेकिन आरक्षण से शिक्षक न बनाया जाए, सरकार सुविधाएँ दे जो कि दे भी रहि हैं हर स्तर पर लेकिन गुणवत्ता महाविद्यालयों की बनाना प्राथमिकता हो,
मैं पूछता हूँ शिक्षक आरक्षण से क्यों बनाया जाये???
आरक्षण दो मगर एक शिक्षक योग्य मिले ये बच्चों का मूलभूत हक हो,
ऐसी व्यवस्था से प्राप्त शिक्षक से ना जाने कितने बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा! किसी बच्चों पर शिक्षक थोपा नही जाना चाहिए,
शिक्षकों का मान सम्मान उनकी प्रतिभा होती हैं!
समान्य की मेरिट -179
अनुसूचित जाति की मेरिट -51
अनुसूचित जनजाति की मेरिट-78
इस दर्द को कौन समझेगा जो 178 मे बाहर हुवा होगा उसके सामने 51 अन्दर होगा!
178 अंक वाला गलत जाति में जन्म लिया या फ़िर उसके साथ भेदभाव हुवा, उसमे आजीवन पढाई कर इसी दिन का सपना देखा होगा
178 को ना नौकरी मिलेगी ,ना वो आरक्षण मांगेगा ना उसे प्रमोशन मिलेगा , उसे भी एक बार ही जिन्दगी जीनी हैं फ़िर ये खिलवाड़ क्यों?
26% अंक लेकर पास होने वाला प्रोफेसर सौ प्रतिशत सवाल हल करने वाले विद्यार्थी की कॉपी कैसे चेक करेगा जरा इसे स्पष्ट करें.?