Kavish Abhijeet

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"बोझिल पलकों पर ठहरी नमी और अंतस की ये उलझनें... जैसे वक्त ठहर गया है, पर बेचैनी थमती नहीं। खुद को पुकारता हूँ, पर जवाब ...
15/03/2026

"बोझिल पलकों पर ठहरी नमी और अंतस की ये उलझनें...
जैसे वक्त ठहर गया है, पर बेचैनी थमती नहीं।

खुद को पुकारता हूँ, पर जवाब नदारद है। 🌫️

#अभिजीत_की_लेखनी_से
#हिंदीpoetry

अब मलाल क्या करें? 😌 हालात ने हमें वक्त से पहले ही संजीदा कर दिया। ज़िंदगी ने बहुत कुछ सिखाया है। 💔  #जीवन_के_अनुभव  #अभ...
12/03/2026

अब मलाल क्या करें? 😌 हालात ने हमें वक्त से पहले ही संजीदा कर दिया। ज़िंदगी ने बहुत कुछ सिखाया है। 💔

#जीवन_के_अनुभव
#अभिजीत_की_लेखनी_से

"History Repeat" हुई फिर से, भारत का वही अंदाज़ है,"History Defeat" कर हमने, दिखा दिया कौन वर्ल्ड का सरताज है!अद्भुत, अव...
08/03/2026

"History Repeat" हुई फिर से, भारत का वही अंदाज़ है,
"History Defeat" कर हमने, दिखा दिया कौन वर्ल्ड का सरताज है!

अद्भुत, अविश्वसनीय, अजेय भारत!

विश्वविजेता भारतीय क्रिकेट टीम का अभिनंदन! 🇮🇳

भीड़ बहुत है, पर अपना कोई नहीं... ज़िंदगी की आज़माइशों से बस अब थोड़ा सुकून चाहिए। ✨               #सुकून  #अभिजीत_की_ले...
07/03/2026

भीड़ बहुत है, पर अपना कोई नहीं... ज़िंदगी की आज़माइशों से बस अब थोड़ा सुकून चाहिए। ✨

#सुकून #अभिजीत_की_लेखनी_से

भारतीय राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनका नाम केवल पद से नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए कामों से पहचाना जाता है। बि...
06/03/2026

भारतीय राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनका नाम केवल पद से नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए कामों से पहचाना जाता है। बिहार की राजनीति में #नीतीश_कुमार जी ऐसा ही एक नाम हैं। एक समय था जब बिहार का नाम आते ही “जंगलराज”, बदहाल सड़कों, कमजोर प्रशासन और पलायन की चर्चा होती थी। लेकिन पिछले दो दशकों में राज्य ने जिस बदलाव को देखा, उसमें नीतीश कुमार की भूमिका से इनकार करना कठिन है।

इन बीस वर्षों में सड़कों का जाल बिछा, गांव-गांव तक कनेक्टिविटी बेहतर हुई, सरकारी स्कूलों की स्थिति बदली और शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू हुईं। खासकर लड़कियों के लिए चलाई गई साइकिल और छात्रवृत्ति योजनाओं ने सामाजिक सोच को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। जो परिवार कभी बेटियों की पढ़ाई को पांचवीं या आठवीं के बाद रोक देते थे, वे भी उन्हें इंटरमीडिएट तक पढ़ाने लगे। यह केवल योजना नहीं थी, बल्कि समाज में एक शांत लेकिन गहरा परिवर्तन था।

सरकारी नौकरियों की बहाली हो, पंचायतों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना हो या प्रशासनिक व्यवस्था को अपेक्षाकृत मजबूत करना—इन सबने बिहार की छवि बदलने में योगदान दिया। धीरे-धीरे वही राज्य, जिसे कभी पिछड़ेपन के उदाहरण के रूप में पेश किया जाता था, विकास और सुशासन की चर्चा में भी आने लगा।

लेकिन समय की अपनी गति होती है। कोई भी व्यक्ति कितना ही सक्षम क्यों न हो, उम्र और ऊर्जा की सीमाओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकता। राजनीति में भी यह उतना ही सत्य है जितना जीवन के अन्य क्षेत्रों में।
लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद यदि कोई नेता स्वयं ही जिम्मेदारी किसी नई पीढ़ी को सौंप दे, तो यह केवल पद छोड़ना नहीं बल्कि एक परिपक्व राजनीतिक निर्णय माना जाता है। हालांकि इस मामले में नीतीश जी थोड़े पीछे रह गए।

आज बिहार भी एक ऐसे दौर में खड़ा है जहां नई चुनौतियां सामने हैं—रोजगार, पलायन, शिक्षा की गुणवत्ता, और बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप अवसरों का निर्माण। इन समस्याओं को समझने और हल करने के लिए शायद एक नई सोच और नई ऊर्जा की जरूरत है।

यदि किसी नेता ने अपने लंबे कार्यकाल में राज्य को एक दिशा दी है, तो यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वह सही समय पर आगे की राह किसी और के लिए खोल दे। इससे उसकी उपलब्धियां कम नहीं होतीं, बल्कि इतिहास में उसका स्थान और स्थिर हो जाता है।

नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता के लिए भी यही सबसे बड़ी उपलब्धि होगी कि उन्होंने बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दी और समय आने पर उसी आत्मविश्वास के साथ नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर दिया। भविष्य चाहे जो भी हो, बिहार के राजनीतिक इतिहास में उनका नाम उस दौर के रूप में दर्ज रहेगा जब राज्य ने अपनी छवि बदलने की कोशिश की और उसमें काफी हद तक सफल भी हुआ।

उमीद है यह सेवानिवृत्ति एक हद तक सम्मानित ही मानी जाएगी, बिहार भले विकसित राज्यों की श्रेणी में आ नहीं सका हो, पर उस रास्ते पर अग्रसर करने के लिए तो नीतीश जी का नाम जरूर स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
अंततः एक बात से तो उनके धुर विरोधी भी इनकार नहीं कर सकते कि आज की राजनीतिक दलदल से खुद को बेदाग निकाल ले जाना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
भावी राजनीति और भविष्य के लिए आदरणीय मुख्यमंत्री जी को शुभकामनाएं 🙏

#नीतीशकुमार

भारत की फ़िज़ाओं को सदा याद रहूँगाआज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा"।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, महान क्रान्ति...
27/02/2026

भारत की फ़िज़ाओं को सदा याद रहूँगा
आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा"।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, महान क्रान्तिकारी चंद्रशेखर आजाद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।

#चन्द्रशेखर_आजाद #बलिदान_दिवस

"अशेष स्मृतियाँ"मानस पटल पर बिखरी हुई,कुछ अशेष स्मृतियाँ,अंतःकरण को झकझोरती,कुछ सहज-असहज स्थितियां।                     ...
26/02/2026

"अशेष स्मृतियाँ"
मानस पटल पर बिखरी हुई,
कुछ अशेष स्मृतियाँ,
अंतःकरण को झकझोरती,
कुछ सहज-असहज स्थितियां।

हर बार अतीत की ओर ढकेलतीं,
वो पुरानी परछाइयाँ,
न मिटती हैं, न रुकती हैं,
बस बन जाती हैं मजबूरियाँ।

वर्तमान की दहलीज पर खड़ा,
मैं आज भी ठिठका सा हूँ,
उन यादों के भंवर में फँसा,
एक अधलिखा सा किस्सा हूँ।

वो कसक जो दिल में दबी है,
वो टीस जो अनकही सी है,
वक्त तो आगे बढ़ गया, पर
रूह वहीं ठहरी हुई सी है।

हकीकत से लड़ते हुए अब थक गई हैं ये कोशिशें,
कि फिर उन्हीं मोड़ों पर खड़ी मिलती हैं ये परिस्थितियां।

~~ ©️®️ अभिजीत आनंद 'काविश'

#अभिजीत_की_लेखनी_से
#हिंदीसाहित्य #कविता

कुछ रिश्ते आवाज़ नहीं करते,बस धीरे-धीरे भीतर कुछ तोड़ देते हैं…और फिर इंसान मुस्कुराना सीख लेता है,ताकि किसी को उसके टूट...
06/02/2026

कुछ रिश्ते आवाज़ नहीं करते,
बस धीरे-धीरे भीतर कुछ तोड़ देते हैं…
और फिर इंसान मुस्कुराना सीख लेता है,
ताकि किसी को उसके टूटने की ख़बर न हो।

अगर ये अल्फ़ाज़ कहीं आपके मन से टकराएँ,
तो समझिए — आप अकेले नहीं हैं।

#वफ़ा #टूटे_रिश्ते #ख़ामोशी #दर्द #अभिजीत_की_लेखनी_से

जिस भरोसे ने सबसे पहले मुख मोड़ा,आज वही पूछता है कि कौन हूँ मैं।जिसने संबंधों को भी अनुबंधों में तौला,उसके प्रश्नों के आ...
02/02/2026

जिस भरोसे ने सबसे पहले मुख मोड़ा,
आज वही पूछता है कि कौन हूँ मैं।
जिसने संबंधों को भी अनुबंधों में तौला,
उसके प्रश्नों के आगे अब — मौन हूँ मैं।

कभी-कभी ख़ामोशी
सबसे सटीक उत्तर होती है।

— अभिजीत आनंद ‘काविश’

#मौन #खामोशी #रिश्ते #साहित्य #हिंदीकविता

"मौन टूटा, शब्दों ने जन्म लिया, देर से ही सही, अस्तित्व स्वीकार हुआ।"💬 ये पोस्ट सिर्फ़ उठे हुए मुद्दे की नहीं, बल्कि जड़...
29/01/2026

"मौन टूटा, शब्दों ने जन्म लिया,
देर से ही सही, अस्तित्व स्वीकार हुआ।"

💬 ये पोस्ट सिर्फ़ उठे हुए मुद्दे की नहीं, बल्कि जड़ में बसे आरक्षण की वास्तविकता को सामने लाती है।

#सच्चाई #जागरूकता #हक़ #आरक्षण #लोकतंत्र #साहित्यिक_संग्राम #स्वर_जागरण #सुप्रीम_कोर्ट

गणतंत्र सिर्फ़ उत्सव नहीं,एक निरंतर सवाल है।जब समरसता की खाई और चौड़ी की जाए,न्याय की नीतियाँ भीतर से खोखली लगें,और मौन ...
26/01/2026

गणतंत्र सिर्फ़ उत्सव नहीं,
एक निरंतर सवाल है।
जब समरसता की खाई और चौड़ी की जाए,
न्याय की नीतियाँ भीतर से खोखली लगें,
और मौन की चिता पर खड़ा तंत्र मुस्कुराए—
तो चुप रहना विकल्प नहीं रहता।

यह पोस्ट किसी के विरुद्ध नहीं,बल्कि उस व्यवस्था से सवाल है जो बराबरी को भाषण और असमानता को नीति बना दे।
आज गणतंत्र दिवस है,और सवाल पूछना ही सच्ची श्रद्धांजलि।

✍️ अभिजीत आनंद ‘काविश’

#गणतंत्रदिवस

#लोकतंत्र
#सवाल
#अभिव्यक्ति

#कटाक्ष

जब प्रकृति खुद रंग-श्रृंगार में उतर आए,तो मौसम नहीं… एहसास बदलते हैं। 🌿नव-कपोलों पर खिलती हँसी,मन-वीणा पर बजता ऋतुराज का...
24/01/2026

जब प्रकृति खुद रंग-श्रृंगार में उतर आए,
तो मौसम नहीं… एहसास बदलते हैं। 🌿
नव-कपोलों पर खिलती हँसी,
मन-वीणा पर बजता ऋतुराज का मधुर स्वर—
यही तो है बसंत,
जहाँ प्रेम, उमंग और उम्मीद एक साथ सांस लेते हैं। 🌼✨
आपके लिए बसंत क्या लेकर आया है —
यादें, रंग या कोई नई शुरुआत? 💛

~~ अभिजीत आनंद ‘काविश’

#बसंत_आया
#ऋतुराज
#हिंदी_साहित्य
#कविता_प्रेम
#प्रकृति_की_बातें
#बसंत_बहार

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