16/03/2024
‘साहिर समग्र’ : साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल, नज़्म और गीतों में
बहर (छंद) एवं क़ाफ़िया का अध्ययन - 11/70
अछांदस जैसी दिखती प्रस्तुत कविता की हरेक पंक्ति में ‘ग़ालगां’ संधि के दो या चार या छह आवर्तनों का प्रयोग किया गया है।
कविता :-
आप क्या जाने मुझको समझते हैं क्या
मैं तो कुछ भी नहीं
इस क़दर प्यार इतनी बड़ी भीड़ का
मैं रखूँगा कहाँ
इस क़दर प्यार रखने के क़ाबिल नहीं मेरा दिल, मेरी जाँ
मुझको इतनी मुहब्बत ना दो दोस्तों,
सोच लो दोस्तों
इस क़दर प्यार कैसे सँभालूँगा मैं
मैं तो कुछ भी नहीं
प्यार इक शख़्स का भी अगर मिल सके
तो बड़ी चीज़ है ज़िन्दगी के लिए
आदमी को मगर ये भी मिलता नहीं, ये भी मिलता नहीं,
मुझको इतनी मुहब्बत मिली आपसे
ये मेरा हक़ नहीं, मेरी तक़दीर है
मैं ज़माने की नज़रो में कुछ भी ना था
मेरी आँखों में अब तक वो तस्वीर है
इस मुहब्बत के बदले मै क्या नज़्र दूँ
मैं तो कुछ भी नहीं
इज्ज़तें, शुहरतें, चाहतें, उल्फ़तें,
कोई भी चीज़ दुनिया में रहती नहीं
आज मै हूँ जहाँ कल कोई और था
ये भी इक दौर है, वो भी इक दौर था
आज इतनी मुहब्बत ना दो दोस्तों
के मेरे कल के ख़ातिर न कुछ भी रहे
आज का प्यार थोड़ा बचा कर रखो
मेरे कल के लिए
कल जो गुमनाम है, कल जो सुनसान है
कल जो अनजान है, कल जो वीरान है
मैं तो कुछ भी नहीं
मैं तो कुछ भी नहीं
- साहिर लुधियानवी
(साहिर समग्र : पृष्ठ क्रमांक 391/2)
फ़िल्म : दाग़
संगीत : लक्ष्मीकान्त – प्यारेलाल
कंठ : राजेश खन्ना
Youtube Link : https://www.youtube.com/watch?v=WXYUMdrLNzA
(फ़िल्म में यह कविता संवाद के रूप में ही है।)
कहीं-कहीं पर रदीफ़-क़ाफ़िया का प्रयोग हुआ है। यहाँ पर पंक्ति के कुछ अंतिम शब्दों को तथा कौंस में उसके क़ाफ़िया और क़ाफ़िया-व्यवस्था को दर्शाया है, रदीफ़ नहीं। मगर इससे आप रदीफ़ का भी अंदाज़ा आसानी से लगा सकते हैं।
ना दो दोस्तों - सोच लो दोस्तों
(दो-लो = ओकारांत)
मिल सके – के लिए – आपसे
(सके-लिए-से = एकारांत)
तक़दीर है – तस्वीर है
(तक़दीर-तस्वीर = ईकार+र)
इज्ज़तें – शुहरतें – चाहतें – उल्फ़तें
(अकार+तें)
और था – दौर था
(और-दौर = औकार+र)
ना दो दोस्तों - बचा कर रखो
(दोस्तों-रखो = ओकारांत)
न कुछ भी रहे - कल के लिए
(रहे-लिए = एकारांत)
सुनसान है – वीरान है
(सुनसान-वीरान = ईकार+न)
बहर (छंद) : हरेक पंक्ति में ‘ग़ालगां’ संधि के दो या चार या छह आवर्तनों का प्रयोग।
ल = लघु = 1 मात्रा
गा = गुरु = 2 मात्रा
ऊपर बिंदी मुख्य पद्यभार
नीचे बिंदी गौण पद्यभार
पहले बंद की तक़्ती (गणविभाजन) :-
ग़ा, ल, गां/ ग़ा, ल, गां/ ग़ा, ल, गां/ ग़ा, ल, गां/
आ, प, क्या/ जा, ने, मुझ/ को, स, मझ/ ते, हैं, क्या/
ग़ा, ल, गां/ ग़ा, ल, गां/
मैं, तो, कुछ/ भी, न, हीं/
Uday Shah
115/A, Dharmin Nagar,
Kabilpore,
Navsari – 396424 (Gujarat).
(M) +91-9428882632
Website : https://sites.google.com/site/udayshahghazal/
Youtube Link : https://www.youtube.com/user/udaysshah10/videos
Welcome to my website. My Research On TaalShastra, ChhandShastra and KafiyaShastra of Ghazal In Hindi & Gujarati (1) ग़ज़लधारा : ग़ज़ल का छंदशास्त्र एवं तालशास्त्र ग़ज़ल का तालशास्त्र प्रस्तु....