17/05/2025
❤️!! कृष्ण से कृष्ण को मांगिए !!❤️
एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी। किसी फकीर ने सम्राट से भिक्षा मांगी थी। सम्राट ने उससे कहा-'जो भी चाहते हो, मांग लो। फकीर ने अपने छोटे से भिक्षापात्र को आगे बढ़ाया और कहा- बस इसे स्वर्ण मुद्राओं से भर दें। सम्राट ने सोचा इससे सरल बात और क्या हो सकती है! लेकिन जब उस भिक्षा पात्र में स्वर्ण मुद्राएं डाली गई, तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असंभव था। सम्राट ने अपना सारा खजाना खाली कर दिया, लेकिन अद्भुत पात्र न भरा । तब उस सम्राट ने पूछा- इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है? वह फकीर बोला- कोई विशेष रहस्य नहीं। यह पात्र मनुष्य के हृदय से बनाया गया है। क्या आपको ज्ञात नहीं है कि मनुष्य का हृदय कभी भी भरा नहीं जा सकता ? धन से,पद से-किसी से भी भरो,वह खाली ही रहेगा,क्योंकि हृदय तो परमात्मा को पाने के लिए बना है। शांति - संतृप्ति चाहिए ? तो अपने संकल्प को कहिए कि "भगवान श्रीकृष्ण" के सेवा के अतिरिक्त और मुझे कुछ भी नहीं चाहिए।
"कृष्ण से कृष्ण को ही मांगिए..