SSY Poetry

SSY Poetry Poetry of Principal Sumer Singh Yadav

20/02/2024

चौहा
दो में से यदि एक गया तो,स्पष्ट एक पूरा बच जाय।दोनों में से एक गया तो, कुछ भी बाकी रहता नाय।जोड़े में से एक गया तो, बच पाता ना कोई एक।ये गणित है प्यार का असली,ना इसमें कोई अतिरेक।

19/02/2024

चौहा
सारी दुनिया के खातिर ही, करता मैं प्रभु से फरियाद ।थूक हाथ पर स्वयं ओट ले,सब को ऐसी दे औलाद। मात-पिता का सभी घरों में, रहे सर्वदा पूरा राज।मान तथा सम्मान के लिए, होवे न कोई मोहताज।

17/02/2024

चौहा
तीनों भाई आज रात से, न्यारे न्यारे सारे होय।मात खड़ी है चौक बीच में, उसे ना साझे रखे कोय।
तीनों ने फिर हार मान के, राह निकाली अद्भुत एक।दस दिन रखिए बारी बारी, कितना सुंदर नेक विवेक!

16/02/2024

चौहा
आते जाते राहों में तो, कई मिलाते रहते हाथ।असल हाथ तो वो होता है, जो दुर्दिन में देवे साथ।चलते चलते राहों में तो, कई पूछते रहते हाल।हाल पूछना वो होता है, जो विपति में लेय संभाल।

15/02/2024

चौहा
मात पिता की बात सर्वदा,सारे सुनो लगाकर गौर।सुननी फिर ना कभी पड़ेगी,बात किसी भी नर की और।मात पिता समझाते जब हैं , वो जीवन का स्वर्णिम दौर।
दौर गौर गर नहीं करी तो, पीछे नहीं कहीं भी ठौर।

14/02/2024

बसन्त पचॅंमी की बधाई
मेरे सारे मित्रों के ,जीवन में सदा बसंत रहे।
सरस्वती की कृपा,उन पर सदा अनंत रहे।
वीणावादिनी के पुजारी, वे जीवन पर्यंत रहें।
उनके कर्मों से देश का, नाम सदा जीवंत रहे।
कर्मों से वे कृष्ण रहें , स्वभाव से सब संत रहें।
बलवंत रहें, दयावंत रहें ,जयंत रहें ,यशवंत रहें।
ग्रीष्म रहे हेमंत रहे, पर वे सदा ही कंत रहें।
सेवक रहें ,सावंत रहें ,पर हरदम तेजवंत रहें।
उनके सम्मुख आने से, पहले बाधा का अंत रहे।
हे हंस वाहिनी माते, आशीष तेरा बेअंत रहे ।

12/02/2024

वाणी पिक की जब भी चाहे, बेशक कागा देय दबाय।लेकिन अपने कॅंठ को मीठा, किसी तरह भी कर नहीं पाय।
निंदक कितना चाहे कर लो, सज्जन प्राणी को बदनाम।खुद सज्जन वो नहीं बन सके,बदले ना छल से परिणाम

11/02/2024

कागज की तो डिग्री सारी,झट से असफल होय जनाब।प्रश्न पूछती असल जिंदगी, कोई सूझे नहीं जबाब ।पढ़कर गुणना ना सीखा तो, जीवन समझो किया खराब।परामर्श है आप खोलिए, अनुभव रूपी असल किताब।

09/02/2024

लोभ एक अभिशाप है, जब होवे बेरोक।
ना खुद ना परिवार के, करे न पूरे शौक।
ना खाए ना खान दे, हरदम रोकम-टोक।
लोभी के दोनों गए, लोक और परलोक।

08/02/2024

मन के अंदर ना रखो, बात करे जो घात।
त्वरित विरेचन कीजिए,स्वस्थ रहे जज्बात।
मन से शीघ्र निकाल दो,बात करे जो घात।
जल्द विरेचन ना हुआ, होगा फिर आघात।

06/02/2024

अवबोधन (Perception)

कान न होते सर्प के, सुने न कोई बात।
तथ्य आस पड़ोस के, रहते उसको ज्ञात।
रहते उसको ज्ञात, सुने सब अवबोधन से।
लेना कुछ भी नाय,किसी के संबोधन से।
कहे प्राचार्य राव, सदा गप सप से बचना।
अंतर्मन से देख, समय की सारी घटना।

05/02/2024

ताला और पहचान
(Locked Profile on Facebook)

पर्दादारी किसलिए,किया न कोई पाप।
ताला है पहचान पे, खूब मित्र हैं आप?
खूब मित्र हैं आप, बात जो गुप्त छिपाए।
पहले मानो मित्र, साथ ये शर्त लगाये।
कहे प्राचार्य राव, तरीका यह अपनाओ।
पहले लो पहचान, बाद में मित्र बनाओ।

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