07/12/2022
प्यार, इश्क, मोहब्बत ये शब्द सुनने में कितने खूबसूरत लगते हैं, लेकिन इनका मतलब समझना उतना ही मुश्किल है. ना जाने कितने दीवानों ने प्यार को शब्दों के दायरे में कैद करने की कोशिश की है, मगर हमेशा असफल रहे हैं, क्योंकि प्यार शब्दों का मोहताज नहीं.
कभी आप मासूमियत में हुई चाहत को प्यार समझ लेते हैं, तो कभी चंद मुलाक़ातों की उल्फत को मोहब्बत. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आप एक ऐसे पागलपन के जुनून को इश्क मान लेते हैं और संबंधों के दलदल में फंसते चले जाते हैं.
रिश्ते अक्सर पतंग की एक डोर की तरह होते हैं, जितनी पक्की डोर प्यार की वो पतंग आसमान में उतनी ही उचाई पर उड़ेगी. मगर कच्ची डोरियां सिर्फ उलझन को ही न्योता देती हैं.