09/07/2026
अरे प्रभु अब जागो
रामलला को लूट लिया, अब बद्रीनाथ की बारी,
हे प्रभु, तेरा ये मानव, तुझ पर पड़ गया भारी ।
पहले जो कहता था, 'प्रभुजी, तेरा तुझको अर्पण',
अब तो सेवादार कर रहे, अपने ही प्रभु का तर्पण।
तिलक लगायें माथे में, लिए आरती हाथ,
दान दक्षिणा और आभूषण, खुद कर रहे साफ।
रामलला की जन्मभूमि पर, मंदिर भव्य बनाया,
दान दक्षिणा ज्यों ही आई, टिन्नू मिन्नू ने खाया।
हे हरि ! , अब तुम्हारी बारी, इनसे बच के रहना,
इनकी करनी का दंड इन्हें, देना, बिल्कुल न सहना।
सारे असुर खत्म जान के, शस्त्र तुमने हैं त्यागे,
दान, चढ़ावा, श्रद्धा की खातिर, दे रहे हैं भक्त अभागे।
तुम्हें सोता जान के ही, ये टिन्नू मिन्नू जागे,
ठूंस चढ़ावा बोरों में, अपने घर को भागे।
धर्म के ठेकेदारों को, ये बांटें उनका भाग,
सोचो, कितनी लगती होगी, भक्तों के दिल में आग।
लेकिन जग की माया से, प्रभु तुम्हें क्या काम,
नव- सृजित इन असुरों का, कर दो काम तमाम।
केदार में बैठे भोले बाबा, अब ना ध्यान लगाओ,
मंदिर के टिन्नू मिन्नू से, पहले खुद को बचाओ।
जिससे पहले ये टिन्नू मिन्नू, तुम्हें बेच के खायें,
दान दक्षिणा से खरीदी, आडी से घर जायें,
उससे पहले इन असुरों को, अपनी शक्ति दिखाओ,
इनको, इनकी जगह में भेजो, तनिक भी ना सकुचाओ।
वरना भक्त सोचेंगे "प्रभुजी, कुछ भी ना कर पाये",
राजनीति के इन प्यादों को, सबक नहीं दे पाये ।।