09/09/2025
शाम को लोकल ट्रेन की भीड़ को चीरते हुए वे दोनों साथ घर लौटते। ट्रेन की खिड़की से आती हवा में राधिका के उड़ते बाल अक्सर अबीर के चेहरे को छू जाते। अबीर कुछ कहता नहीं, लेकिन मन ही मन उन पलों की तस्वीरें बना लेता।
👦 अबीर (हल्की मुस्कान के साथ):
"तुम जानती हो, तुम्हें देखते ही ऑफिस की सारी थकान मिट जाती है।"
👧 राधिका (आँख मारते हुए):
"फिर से शुरू हो गया तुम्हारा फिल्मी डायलॉग! तुम तो पूरी तरह से किसी फिल्म के हीरो लगते हो।"
👦 अबीर:
"तो फिर तुम मेरी हीरोइन हो... मुंबई की राधिका।"
👧 राधिका (हँसते हुए, छेड़ते हुए):
"मैं तो स्टेज की हीरोइन हूँ, फिल्मों की नहीं।"
🎙️ :
इसी तरह एक दिन वे मरीन ड्राइव गए। समंदर के किनारे बैठकर लहरों की आवाज़ सुन रहे थे दोनों। आसपास कपल्स, हँसी, बातें, हलचल — मगर उनके लिए तो जैसे वक़्त थम गया था।
👧 राधिका (समंदर की ओर देखते हुए):
"अबीर, तुम्हें पता है, जब मैं स्टेज पर खड़ी होती हूँ, तब भी डर लगता है।"
👦 अबीर (हैरानी से):
"तुम? तुम तो सबको मंत्रमुग्ध कर देती हो!"
👧 राधिका:
"डरती हूँ कि कोई जान ना जाए कि एक्टिंग के पीछे मैं असल में क्या छुपा रही
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