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शाम को लोकल ट्रेन की भीड़ को चीरते हुए वे दोनों साथ घर लौटते। ट्रेन की खिड़की से आती हवा में राधिका के उड़ते बाल अक्सर अ...
09/09/2025

शाम को लोकल ट्रेन की भीड़ को चीरते हुए वे दोनों साथ घर लौटते। ट्रेन की खिड़की से आती हवा में राधिका के उड़ते बाल अक्सर अबीर के चेहरे को छू जाते। अबीर कुछ कहता नहीं, लेकिन मन ही मन उन पलों की तस्वीरें बना लेता।

👦 अबीर (हल्की मुस्कान के साथ):
"तुम जानती हो, तुम्हें देखते ही ऑफिस की सारी थकान मिट जाती है।"

👧 राधिका (आँख मारते हुए):
"फिर से शुरू हो गया तुम्हारा फिल्मी डायलॉग! तुम तो पूरी तरह से किसी फिल्म के हीरो लगते हो।"

👦 अबीर:
"तो फिर तुम मेरी हीरोइन हो... मुंबई की राधिका।"

👧 राधिका (हँसते हुए, छेड़ते हुए):
"मैं तो स्टेज की हीरोइन हूँ, फिल्मों की नहीं।"

🎙️ :
इसी तरह एक दिन वे मरीन ड्राइव गए। समंदर के किनारे बैठकर लहरों की आवाज़ सुन रहे थे दोनों। आसपास कपल्स, हँसी, बातें, हलचल — मगर उनके लिए तो जैसे वक़्त थम गया था।

👧 राधिका (समंदर की ओर देखते हुए):
"अबीर, तुम्हें पता है, जब मैं स्टेज पर खड़ी होती हूँ, तब भी डर लगता है।"

👦 अबीर (हैरानी से):
"तुम? तुम तो सबको मंत्रमुग्ध कर देती हो!"

👧 राधिका:
"डरती हूँ कि कोई जान ना जाए कि एक्टिंग के पीछे मैं असल में क्या छुपा रही
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मुंबई शहर… रौशनी से चमचमाता, शोरगुल से भरा हुआ।सुबह-सुबह लोकल ट्रेनें दौड़ती हैं, और रात को समंदर की लहरों की आवाज़ में ...
09/09/2025

मुंबई शहर… रौशनी से चमचमाता, शोरगुल से भरा हुआ।

सुबह-सुबह लोकल ट्रेनें दौड़ती हैं, और रात को समंदर की लहरों की आवाज़ में मानो शहर भी चैन की सांस लेता है।

इस शहर में किसी के लिए ये एक सपना है, तो किसी के लिए एक डरावना ख्वाब।

इसी भीड़ के बीच एक युवक धीरे-धीरे चल रहा था—उसका नाम था आबीर।

👦 आबीर (ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए, धीरे से बुदबुदाते हुए):

"इस शहर में लोग हैं हजारों… लेकिन मेरे पास खड़े होने वाला कोई नहीं।"

🎙️ :

आबीर आया है कोलकाता से, नौकरी की तलाश में।

यहाँ आकर उसे मिली है — व्यस्तता, अकेलापन और हर दिन की जद्दोजहद।

किराए का छोटा सा कमरा, खिड़की के पास आसमान का एक टुकड़ा — इन्हीं में उसके दिन कटते हैं।

लेकिन एक दिन, अचानक उसकी ज़िंदगी बदल गई।

🎙️ :

एक बरसात की शाम, मुंबई सेंट्रल स्टेशन की भीड़ में भीगती हुई खड़ी थी एक लड़की।

भीगे बाल उसके चेहरे पर चिपके हुए, हाथ में भीग चुकी किताब।

उसकी आंखों में थी एक अजीब सी शांति।

पहली बार आबीर ने उसे देखा — राधिका।
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09/09/2025

🎙️ : मुंबई शहर… रौशनी से चमचमाता, शोरगुल से भरा हुआ। सुबह-सुबह लोकल ट्रेनें दौड़ती हैं, और रात को समंदर की लहरों की आ.....

नदी के किनारे एक छोटा-सा गाँव था। भोर की रौशनी में काश के फूल लहरा रहे थे, और पक्षियों की चहचहाहट से चारों ओर जीवन जाग उ...
09/09/2025

नदी के किनारे एक छोटा-सा गाँव था। भोर की रौशनी में काश के फूल लहरा रहे थे, और पक्षियों की चहचहाहट से चारों ओर जीवन जाग उठा था। इसी गाँव में रहता था अरिंदम — बचपन से ही शांत, शर्मीला और सोचने-विचारने वाला स्वभाव।

उसका इकलौता दोस्त थी मिताली। दोनों साथ में स्कूल जाते, पेड़ों पर चढ़ते, नदी किनारे बैठकर खेलते।

👦 अरिंदम (बचपन की आवाज़, उत्साह में):
“मिताली! देख, नदी में कचुरिपाना (जलकुंभी) खिली है, जल्दी आ!”

👧 मिताली (हँसते हुए):
“आ रही हूँ, तू अकेले मज़ा लेगा क्या?”

🎙️ Narration:
बचपन के दिन बड़े शांत और मधुर थे।
लेकिन एक दिन, अरिंदम के पिता, जो गाँव के स्कूल में शिक्षक थे, उन्होंने फैसला किया — अरिंदम को उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता भेजा जाएगा।

विदा के दिन, नदी किनारे खड़ी मिताली ने कहा —

👧 मिताली:
“तू लौटेगा न?”

👦 अरिंदम (चुपचाप सिर हिलाते हुए):
“हम्…”

🎙️ Narration:
कोलकाता की ज़िंदगी में अरिंदम खो गया — पढ़ाई के बोझ में। मिताली के खत आते थे, लेकिन वह जवाब देर से देता।
गाँव का प्यार और शहर की सच्चाई के बीच उसका मन उलझने लगा।

एक दिन, मिताली के घरवालों ने तय किया — उसका विवाह एक अमीर व्यापारी के बेटे से होगा।
मिताली ने विरोध किया, लेकिन परिवार और समाज के दबाव में उसे झुकना पड़ा।
बरसात की एक रात, उसने अरिंदम को एक चिट्ठी लिखी —
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