KAYA yoga prana Vidya muz.

KAYA yoga prana Vidya muz. Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from KAYA yoga prana Vidya muz., Arts and entertainment, Damuchak Road, Muzaffarpur.

16/11/2024
15/07/2021

कोई भी परोपकार करने के लिए जो सबसे पहली और आवश्यक चीज़ आपके पास होनी चाहिए वो है आपकी ख़ुशी। हर इन्सान को किसी भी काम को करने से पहले अपनी ख़ुशी पहले देखनी चाहिए। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है न कि अपनी ख़ुशी पहले कैसे रखें जबकि हमेशा से ये ही सीखते आये हैं कि अपनी ख़ुशी का बलिदान करके भी दूसरों की ख़ुशी पहले देखनी चाहिए। सवाल ये भी उठता है कि अगर अपनी ख़ुशी पहले देखेंगे तो परोपकार कैसे करेंगे? दोनों एक दूसरे के बिल्कुल opposite हैं।

तो उत्तर ये है कि अगर आप किसी की मदद बाहरी प्रेरणा या extrinsic motivation की वजह से कर रहे हैं तो वो परोपकार है ही नहीं, परोपकार तो वो होता है जिसका स्रोत आंतरिक प्रेरणा या intrinsic motivation होता है। शायद आप ये नहीं जानते कि आप दूसरों को ख़ुशी तभी दे पाएंगे जब आप स्वयं खुश होंगे। Sacrifice करना एक अच्छी बात है लेकिन वहीँ जहाँ sacrifice करने से आपको ख़ुशी मिल रही हो। अगर कोई अपनी ख़ुशी को बार- बार मार कर sacrifice करता है तो एक दिन वो frustration का रूप ले लेता है जिसके negative effects भी हो सकते हैं।

ये human nature है कि अगर हम अपने जीवन से परेशान या दुखी हैं तो दूसरों के खुशहाल जीवन को देख कर हम सच्चे मन से उसे कभी appreciate नहीं कर सकते। एक हारा हुआ इंसान कभी भी किसी जीतने वाले इंसान को सच्चे मन से बधाई नहीं दे पाता इसके पीछे उसकी कोई दुर्भावना नहीं होती बल्कि अपनी ही आत्मग्लानि होती है। इसलिए किसी का भी कल्याण करने की पहली सीढ़ी है अपने मन की ख़ुशी और संतुष्टि; और क्षमा करनेकी प्रक्रिया में भी यही नियम लागू होता है।

एक प्रसन्न रहने वाला व्यक्ति दूसरों को अधिक देर तक अप्रसन्न नहीं देख सकता। ऐसा कहा जाता है कि जिसके पास जो होता है वही वो दूसरों को देता है। जो वस्तु आप के पास उपलब्ध ही नहीं वो आप किसी को कैसे दे सकते है? आम के पेड़ से हमेशा आम ही प्राप्त करने की उम्मीद की जा सकती है किसी और फल की नहीं। ये याद रखिये कि अगर आप अन्दर से positive हैं और खुश हैं तो अपने आस- पास भी positivity ही फैलायेंगे। 🙏❤️🙏

14/07/2021
13/07/2021

जातस्य हि ध्रुवों मृत्युधृवाम जन्म मृतुस्य च
जिसने जन्म लिया है, उसका मरना भी सुनिश्चित है और मरे हुए का जन्म भी सुनिश्चित है । इस पूरी सृष्टि में जन्म मरण का कार्यक्रम ही घूम घूम कर चल रहा है । हर जन्म लेने वाले को एक दिन शरीर छोड़ने के लिए विवश होना पड़ता है । चाहे कोई जीवन जीने की कितनी भी प्रबल इच्छा रखें , अपनी मृत्यु से बच पाना संभव नहीं है। एक न एक दिन हमें काल की विकराल रूप में चले ही जाना होता है । यह एक ऐसा ध्रुव सत्य है जिसे ना तो झुठला पाना संभव है और ना ही उसका सामना करने से बचा जा सकता है ।
जो लोग मृत्यु से घबराते हैं , वह जीवन का उद्देश्य पूर्ण भाव से जीने के स्थान पर लापरवाही से जीने का प्रयत्न करते हैं। वह यह सोचते हैं कि जीवन की यही अल्प क्षण है इसमें जितना ज्यादा आनंद जीवन का उठाया जा सके उतना मुझे उठा लेना चाहिए। इसके लिए उचित या अनुचित की परवाह नहीं करते, बल्कि कई बार तो उपभोग की आतुरता उनसे ऐसे कार्य करती है, जिनकी गणना निष्क्रियता में नहीं की जा सकती है ।
इसकी विपरीत जो मृत्यु को एक उत्सव की तरह मानते हैं, वे जीवन को एक लक्ष्य एक दिशा के साथ जीते है । वे कर्मफल पर विश्वास रखते हैं और शुभ काम करने में विश्वास रखते हैं।
कुकर्मी को दुर्गति का सामना करना पड़ता है; जबकि मृत्यु को उत्सव मानकर चलने वाले, जीवनरूपी अवसर का सम्यक उपयोग करते हैं व सौभाग्य के अधिकारी बनते हैं।

Address

Damuchak Road
Muzaffarpur
842001

Telephone

+919955965703

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when KAYA yoga prana Vidya muz. posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to KAYA yoga prana Vidya muz.:

Share