03/09/2024
परिवार ही राष्ट्र का आधार है- नंद किशोर यादव
संस्कार भारती,बिहार प्रदेश, कला संस्कृति एवम युवा विभाग,बिहार सरकार, प्लस फाउंडेशन एवम गांधी स्मृति एवम दर्शन समिति,नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में नरगा कोठी स्थित पूरनमल बाजोरिया शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में आज अंगिका कला उत्सव का शुभारंभ हुआ।
यह दो दिवसीय कला उत्सव सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी जीवन शैली जैसे महत्वपूर्ण विमर्शों पर केंद्रित है। कला उत्सव से पहले चित्रकला, हस्तशिल्प, मूर्तिकला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
अंगिका कला उत्सव के प्रथम दिन बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री नंदकिशोर यादव, खगड़िया लोकसभा के सांसद श्री राजेश वर्मा, संस्कार भारती के क्षेत्र प्रमुख डॉ. संजय कुमार चौधरी, मंजूषा कला चित्रकार श्री मनोज कुमार पंडित, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मीरा झा एंव रंग निर्देशक डॉ. अमित रौशन ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत रूप से कला उत्सव का शुभारंभ किया।
संस्कार भारती ध्येय गीत के बाद अपने उद्घाटन संबोधन में नंदकिशोर यादव जी ने कहा कि "हम प्रकृति पूजक हैं, पर्यावरण संरक्षण का बोध हमें परिवार से ही मिलता है। हमारे दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता हमें पेड़ों के संरक्षण एंव पौधारोपण के बारे में बताते हैं। हमारी संस्कृति को कुछ अपने लोग ही समाप्त कर रहे हैं।
भोग केंद्रित जीवन शैली के कारण केवल परिवार नहीं टूट रहें है बल्कि संबंधों में भी स्वार्थपरता घर करती जा रही है। हम सभी भारत माता की संतान हैं, हमारे बाद राष्ट्र का स्वरूप क्या होगा, इसपर हमें चिंतन करने की आवश्यकता है। इसी से नागरिक कर्तव्य का बोध स्वत: आ जाएगा। श्री नंदकिशोर यादव जी ने युवा पीढ़ी से अपील करते हुए कहा कि आप अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में भी पढ़ाई करें, अपनी मातृभाषा को कभी नहीं त्यागे, अपनी भाषा व कला के साथ जुड़ते हुए राष्ट्र प्रथम का बोध रखते हुए कार्य करें।
कार्यक्रम में खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद श्री राजेश वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कार भारती द्वारा आयोजित इस प्रकार का कार्यक्रम संस्कार और संस्कृति को विकसित कर नई पीढ़ी को सौंपने का कार्य कर रही है। आज हमें अपने संस्कार और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर चलने की जरूरत है। यह सौभाग्य की बात है कि यह कार्यक्रम अंगिका भाषा पर आधारित है। अंगिका हमारी मातृभाषा है, संस्कार भारती ने मुझे अवसर दिया इस कार्यक्रम के माध्यम से सेवा देने का, इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं। मैं अंगिका भाषा क्षेत्र के लिए कुछ कर सकूं यह मेरा परम सौभाग्य होगा।
कार्यक्रम में आकाशवाणी भागलपुर की पूर्व उद्घोषिका व साहित्यकार डॉ. मीरा झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कार शब्द में ही संस्कृति का निर्माण होता है। हम संस्कार के माध्यम से ही संस्कृति का संरक्षण कर सकते हैं। अंगिका क्षेत्र का बहुत पुराना इतिहास रहा है, यह धरती पूज्य धरती है। अंगिका भाषा के विकास में हम सबको साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। हम भाषा, कला और साहित्य के आधार पर ही नागरिक कर्तव्य का बोध करा सकते हैं। आज हमें स्वदेशी जीवन शैली अपनाने की जरूरत है। इसके लिए युवाओं को आगे आना होगा।
कार्यक्रम में सिद्धहस्त मंजूषा चित्रकार श्री मनोज कुमार पंडित ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कार भारती मतलब भारतीय संस्कार। मंजूषा कला के विकास में सामाजिक समरसता का भाव दिखाई देता है, साथ ही इस कला उत्सव के जो मुख्य पांच विषय हैं-सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी जीवन शैली, यह सभी विषय मंजूषा कला में निहित है। यही मंजूषा की सबसे बड़ी विशेषता है।
कार्यक्रम में रंग निदेशक एवं प्रदर्शन कला अनुदान योजना, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के विशेषज्ञ समिति के सदस्य डॉ. अमित रौशन ने कहा कि हमें अपने क्षेत्रीय व स्थानीय भाषा में नाटक करने की आवश्यकता है। अंगिका भाषा में नाटक की प्रस्तुति बहुत कम होती है। नाटक समाज के स्वरूप को प्रदर्शित करती है, अगर नाटक क्षेत्रीय व स्थानीय भाषा में हो तो इसका प्रभाव समाज पर ज्यादा दिखेगा। संस्कार भारती द्वारा आयोजित इस कला उत्सव के पांच विषयों पर विभिन्न कला के आयामों द्वारा भी कार्य करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में संस्कार भारती के क्षेत्र प्रमुख व संगीत नाटक अकादमी संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य डॉ. संजय कुमार चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अंग प्रदेश की हमेशा से अपनी विशेषता रही है। परिवार में सभी रिश्तों का महत्व होता है। संयुक्त परिवार की संकल्पना पर उन्होंने कहा कि व्यक्ति के समुचित व्यक्तित्व निर्माण में परिवार के सभी सदस्यों की भूमिका होती है। आज एकल परिवार के कारण हम पारिवारिक भावनाओं से दूर होते जा रहे हैं। हम समाज से भी दूर होते जा रहे हैं। गाय, गंगा और गांव से नागरिक कर्तव्य का बोध होता है। गांव के पारंपरिक भोजन को हम भूलते जा रहे हैं, हम आज फास्ट फूड की ओर जा रहे हैं। यह सब बिंदुओं पर हम सबको मिलकर चिंतन करने की आवश्यकता है। कला में बहुत सामर्थ्य है। अंगिका भाषा के विकास में संस्कृति दर्शन करने की आवश्यकता है।
उद्घाटन सत्र के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नृत्य, गायन, वादन एंव काव्य गोष्ठी की गई। कार्यक्रम में कला उत्सव संयोजक संदीप भगत, बिहार संगठन मंत्री वेद प्रकाश, दक्षिण बिहार के महामंत्री संजय पोद्दार, प्राचार्य डॉक्टर राजकुमार ठाकुर , गौरी शंकर मिश्र, अभय कुमार, संजय कुमार,राहुल तिवारी, राजीव शुक्ल विशेष रूप से उपस्थित थे।