25/04/2021
कंकड़..
कभी तो एक ही जगह
कई दिन ठहरे रहते हैं.. –
कभी खुद चलने लगते हैं
कभी गलती से छूं लूं गर इन्हें,
बहुत तकलीफ देते हैं..
कभी मसल दूं गुस्से में,
तो खून खून कर देते हैं
कभी निकल कर आँखों से
पानी के जैसे बहते हैं
तेरी याद के कुछ कंकड़
मेरी आंखोँ मैं रहते हैं !