03/10/2025
सतना में पारसी नाटक “सीता वनवास” द्वारा मंच पर संस्कृति, करुणा और धर्मसंकट का अद्भुत चित्रण
प्राप्त्याशा लोक एवं संस्कृति प्रवर्तन समिति ने एक बार फिर अपनी नाट्य परंपरा को जीवित रखते हुए 1 अक्टूबर को बहुप्रसिद्ध पारसी नाटक "सीता वनवास" की
भव्य प्रस्तुति दी। नाटक के लेखक आगा हश्र काश्मीरी हैं और निर्देशन किया अजय दाहिया ने। सह-निर्देशन की जिम्मेदारी मानसी शिवहरे ने निभाई।
सीता वनवास नाटक एक बहुप्रसिद्ध पारसी शैली का नाटक है, दो घंटे से अधिक अवधि का नाटक है, जिसे निरंतर दो महीने की नाट्य कार्यशाला में तैयार किया गया था। रामायण के उत्तरकांड पर आधारित यह नाटक सीता के आत्म द्वंद, मानसिक वेदना, और कारुणिक पक्ष को दर्शाता है । जब श्रीराम राजधर्म और लोकमत के दबाव में माता सीता को वनवास भेज देते हैं। यह प्रसंग भारतीय समाज और स्त्री की पीड़ा का गहरा दर्पण प्रस्तुत करता है। मंचन के दौरान कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और संवाद अदायगी से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
सीता की वेदना, राम का धर्मसंकट और समाज की कठोरता—तीनों का संतुलित चित्रण दर्शकों के हृदय को छू गया। मंच सज्जा, वेशभूषा और संगीत ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे और बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे। नाटक के अंत में समिति के सदस्यों ने बताया कि उनकी कोशिश केवल मनोरंजन करना नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना है।
मंच पर उपस्थित कलाकारों में राम की भूमिका में अजीत दाहिया, सीता की भूमिका में उमा पाण्डेय, लव - मानसी पाण्डेय, कुश - दीपक विश्वकर्मा, वाल्मीकि और दुर्मुख की भूमिका में अजय दाहिया, लक्ष्मण - अमर केवट, हनुमान - अंश पाण्डेय, रजक और वशिष्ठ की भूमिका में हिमांशु कुशवाहा, रजकी, पृथ्वी और मांडवी की भूमिका अनामिका पाण्डेय ने, श्रुतिकीर्ति, अंगद, और नगरजन की भूमिका में प्राची विश्वकर्मा, साथ ही उर्मिला और विभीषण की भूमिका में श्रुति सेन ने जीवंत अभिनय प्रदर्शित कर दर्शकों को बार बार तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया।
साथ ही संगीत पक्ष हारमोनियम में नीलेश पाठक, ढोलक और झांझ में क्रमशः दिलीप नामदेव और अनिकेत विश्वकर्मा ने चार चांद लगा दिए। छायांकन संजय दाहिया ने किया, मेकअप किया था, अंजली विश्वकर्मा, रूबी केवट और प्रिया विश्वकर्मा ने, वस्त्र विन्यास दीपा दाहिया ने किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम सरपंच श्री बाबूलाल कुशवाहा भी उपस्थित थे ।
प्रस्तुति में अन्य रूप से सहयोगी व्यक्ति