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20/06/2026

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विषय: महंगाई का रोना बंद करोथोड़ी सी महंगाई पर रोने वालो, मोदी जी नहीं होते तो, आज जो चैन की नींद सो रहे हो, तो वो भी आप...
24/05/2026

विषय: महंगाई का रोना बंद करो

थोड़ी सी महंगाई पर रोने वालो,
मोदी जी नहीं होते तो,
आज जो चैन की नींद सो रहे हो,
तो वो भी आपके नसीब में नहीं होती।

एक घर को संभालने के लिए,
कितने पापड़ बेलने पड़ते है,
वो आप और हम अच्छी तरह जानते है।

फिर देश को संभालने के लिए,
मोदीजी कैसे संभाल रहे है
ये तो वो ही जानते है।

फिर थोड़ी सी ऊंच नीच पर,
आप किसी भी निर्णय पर आना।
और मोदीजी पर कुछ कहने से,
पहले हजार बार सोच लेना।

और फिर उसके बाद भी,
मोदीजी के नेतृत्व में आप दुःखी हो,
तो फिर आप पाकिस्तान से भी बद्तर,
हालत के लिए तैयार रहना।

क्योंकि एक तरफ दुश्मन देश,
हमारी बर्बादी का इंतजार कर रहा है।
और दूसरी तरफ देश में बैठा गद्दार,
तरह तरह की साज़िशों के द्वारा,
सबको गुमराह करने का काम कर रहा है।

वैसे जो विरोध मोदीजी का चल रहा है,
वो विरोध सिर्फ मोदीजी का नहीं है।

वो विरोध बंद हुई भ्रष्टाचार की,
दुकानों को फिर से खोलने के लिए
किया जा रहा है।

वो विरोध देश को बर्बाद कर,
दुश्मनों को आबाद करने के लिये
किया जा रहा है।

वो विरोध सत्ता को पाने के लिए,
और देश को लूटने के लिए
किया जा रहा है।

और उस विरोध को जो आपने अपना लिया,
तो फिर आपकी और हमारे परिवार की,
रक्षा करने वाला लौट के वापस आना,
बहुत ही मुश्किल हो जाएगा।

इसलिए समय रहते जाग जाइए,
और हालातों को देख कर समझ जाइए।
चाहे जो कुछ भी हो जाए,
औरों की बातों में आकर,
एक सच्चे देश भक्त का साथ,
छोड़ने की भूल, भूलकर भी मत कीजिए।

जय हिंद 🇮🇳

कवि विजयराज जैन (kaviraj)

19/05/2026

To,
Ministry of Railways, Government of India
Ashwini Vaishnaw

विषय: ट्रेन में आग लगने पर बचाव
दिनांक: १८/०५/२०२६

नमस्कार आदरणीय श्रीमान अश्विनी वैष्णव जी। मैं कवि विजयराज जैन, मुंबई से हूं।

मेरी आपसे नम्र विनंती है कि, चलती हुई ट्रेन में आग पर काबू पाने के लिए ज्यादा से ज्यादा और नई तकनीक के साथ ट्रेन के हर डब्बे में बचाव सामग्री के इंतजाम किए जाए। साथ ही ट्रेन के हर डब्बे में जितने भी अधिकारी सेवा दे रहे है, उन्हें एक विशेष ट्रेनिंग मॉक ड्रिल द्वारा दी जाए, ताकि ऐसे हालत में आग से निपटने में वो सक्षम हो, जिससे यात्रियों की रक्षा और भी ज्यादा बेहतर हो।

इसके अलावा हमारे देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर यदि जरूरत पड़े तो ऐसे इंतजाम होने चाहिए ताकि अग्निमाशन दल पानी के टैंकर के साथ किसी भी प्लेटफॉर्म पर तुरंत पहुंच सके और वहां पर बचाव का कार्य करने में उन्हें कोई बाधा न आए। इसके लिए भी एक मौक ड्रिल सभी स्टेशनों पर की जाए ताकि अग्निमिशन दल को भी आगे जरूरत पड़ने पर बचाव कार्य करने में आसानी हो।

इसके अलावा जब ऐसे हालात आ जाए, तो यात्रियों को भी खुद की रक्षा कैसे करनी है, उसके लिए भी एक वीडियो बनाया जाए, ताकि उसके माध्यम से यात्रियों को जानकारी प्राप्त हो, और यात्री भी अपनी रक्षा कर सके।

समय रहते सुरक्षा के लिए हर वो कदम आगे बढ़ाने की सख्त जरूरत है। इसलिए आप मेरी इस बात को गंभीरता से ले और सुरक्षा के लिए तुरंत से तुरंत कदम बढ़ाए।

लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा चाहूंगा।
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🚩

कवि विजयराज जैन (Kaviraj)
Kaviraj Vijayraj

11/04/2026

*विषय: कट्टरता से त्याग और तपस्या*

*माना कि धर्म में "त्याग और तपस्या" का पाठ पढ़ाया गया है, और उसे निभाने को बताया गया है। परंतु इस हद तक त्याग और तपस्या करना कहां से सही हो सकता है, कि आप अपने जीवन को ही दाव पर लगा दो? या फिर त्याग और तपस्या करवाने के लिए किसी अन्य की जिंदगी से खेलने के लिए उसको मजबूर कर दो?*

*धर्म का सही में अर्थ, त्याग और तपस्या प्रेम और यथा शक्ति से करना है, न कि इतनी कट्टरता से कि आप अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर दो, या फिर किसी और को करवाने में उसकी जिंदगी से खिलवाड़ कर दो।*

*यदि आप कट्टरता से त्याग और तपस्या करते है तो आप आत्महत्या करने की कोशिश कर हो, यदि आप किसी और को कट्टरता से करवा रहे हो तो आप उसकी हत्या करने की कोशिश कर रहे हो।*

*कट्टरता से किया हुआ हर कार्य गलत ही नहीं बल्कि गुनाह है, यथा शक्ति से किया हुआ कार्य ही आत्मशांति है। लेकिन आजकल हर जगह होड़ लगी है, होड़ की आड़ में लोग खुद भी गुनाह कर रहे है, और औरों को भी आग में झोंक रहे है।*

*परमात्मा ने बहुत ही सुंदर जीवन दिया है, इस जीवन का अपमान या अनादर करना एक बहुत ही बड़ा गुनाह है। आप इस जीवन को बड़ी ही ईमानदारी से और सहजता से जियो। इस जीवन को प्रेम से जियो। यह जीवन कीमती है, और इस जीवन को समझने की जरूरत है। इस जीवन के सफर में कर्म बंधन से बचना है, परंतु ऐसा नहीं कि उसकी आड़ में जीवन को खत्म करना है। मौत हर किसीको आनी है, लेकिन मौत से पहले इस तरह से कोई भी कदम मत उठाओ कि अकाल मृत्यु हो जाए।*

*त्याग और तपस्या उतनी ही करो कि विधाता की आज्ञा के बगैर जीवन को समाप्त न करना पड़े। जीवन जिसने दिया है, वही उसे समाप्त करेगा। आप ऐसा कोई भी कार्य मत करो कि जिससे आपको या किसी और को अकाल मृत्यु आ जाए। और फिर भी कर सकते हो तो सीमा पर जाकर देश और देशवासियों की रक्षा करने में अपने जीवन को लगा दो, ताकि देशवासियों की रक्षा करने का पुण्य तो मिलेगा, जो आत्महत्या करने से कई ज्यादा बेहतर होगा।*

*आजकल धर्म के ठेकेदार एवं आयोजक अपने स्वार्थ के लिए कई तरह के त्याग और तपस्या का आयोजन कर रहे है, और तो और कई परिवार के लोग भी उनके अपनो को उसमें जबदस्ती और कट्टरता से धकेल रहे है, भले ही उनको उनकी तबियत के हिसाब से अनुकूल हो या नहीं हो, जो यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।*

*ऐसे ही एक मां का कहना था कि मेरी दो वर्ष की बेटी ने पूरे प्रियूषण पर्व के आठ दिनों में चौंविहार का पालन किया। क्या आपको लगता है कि दो वर्ष की उम्र में इतनी समझ आ जाती है? या फिर जबरन उसे सूर्यास्त के बाद खाने पीने को कुछ भी नहीं दिया होगा? यह एक बहुत बड़ा सवाल है, जो हकीकत में गहराई तक जाने की जरूरत है।*

*जबरदस्ती किसी से त्याग और तपस्या करवा कर आप क्या साबित करना चाहते हो? माना उसको ऐसे में कोई तकलीफ नहीं हुई हो, लेकिन एक बार भी सोचा है कि यदि उसको कोई तकलीफ हो जाती तो उसका दोष किसको लगता?*

*यदि ऐसे में किसी को कुछ हो जाता है, तो उसका दोषी कौन होगा?*

*भागों मत जागो। परमात्मा ने आपको बुद्धि इसलिए दी है कि आप खुद सही और गलत को समझकर चल सको, न कि धर्म की आड़ में किसी के बहकावे में आकर कुछ भी कर दो। "धर्म का डर" और "धर्म का लोभ" ये दोनों बातों ने आपकी आंखों पर ही नहीं, बल्कि आपकी बुद्धि पर भी पट्टी बांध रखी है।*

*कवि विजयराज जैन (kaviraj)*
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