Kaviraj Vijayraj

Kaviraj Vijayraj Poets, Writer, Thinker, Life Seeker

11/04/2026

*विषय: कट्टरता से त्याग और तपस्या*

*माना कि धर्म में "त्याग और तपस्या" का पाठ पढ़ाया गया है, और उसे निभाने को बताया गया है। परंतु इस हद तक त्याग और तपस्या करना कहां से सही हो सकता है, कि आप अपने जीवन को ही दाव पर लगा दो? या फिर त्याग और तपस्या करवाने के लिए किसी अन्य की जिंदगी से खेलने के लिए उसको मजबूर कर दो?*

*धर्म का सही में अर्थ, त्याग और तपस्या प्रेम और यथा शक्ति से करना है, न कि इतनी कट्टरता से कि आप अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर दो, या फिर किसी और को करवाने में उसकी जिंदगी से खिलवाड़ कर दो।*

*यदि आप कट्टरता से त्याग और तपस्या करते है तो आप आत्महत्या करने की कोशिश कर हो, यदि आप किसी और को कट्टरता से करवा रहे हो तो आप उसकी हत्या करने की कोशिश कर रहे हो।*

*कट्टरता से किया हुआ हर कार्य गलत ही नहीं बल्कि गुनाह है, यथा शक्ति से किया हुआ कार्य ही आत्मशांति है। लेकिन आजकल हर जगह होड़ लगी है, होड़ की आड़ में लोग खुद भी गुनाह कर रहे है, और औरों को भी आग में झोंक रहे है।*

*परमात्मा ने बहुत ही सुंदर जीवन दिया है, इस जीवन का अपमान या अनादर करना एक बहुत ही बड़ा गुनाह है। आप इस जीवन को बड़ी ही ईमानदारी से और सहजता से जियो। इस जीवन को प्रेम से जियो। यह जीवन कीमती है, और इस जीवन को समझने की जरूरत है। इस जीवन के सफर में कर्म बंधन से बचना है, परंतु ऐसा नहीं कि उसकी आड़ में जीवन को खत्म करना है। मौत हर किसीको आनी है, लेकिन मौत से पहले इस तरह से कोई भी कदम मत उठाओ कि अकाल मृत्यु हो जाए।*

*त्याग और तपस्या उतनी ही करो कि विधाता की आज्ञा के बगैर जीवन को समाप्त न करना पड़े। जीवन जिसने दिया है, वही उसे समाप्त करेगा। आप ऐसा कोई भी कार्य मत करो कि जिससे आपको या किसी और को अकाल मृत्यु आ जाए। और फिर भी कर सकते हो तो सीमा पर जाकर देश और देशवासियों की रक्षा करने में अपने जीवन को लगा दो, ताकि देशवासियों की रक्षा करने का पुण्य तो मिलेगा, जो आत्महत्या करने से कई ज्यादा बेहतर होगा।*

*आजकल धर्म के ठेकेदार एवं आयोजक अपने स्वार्थ के लिए कई तरह के त्याग और तपस्या का आयोजन कर रहे है, और तो और कई परिवार के लोग भी उनके अपनो को उसमें जबदस्ती और कट्टरता से धकेल रहे है, भले ही उनको उनकी तबियत के हिसाब से अनुकूल हो या नहीं हो, जो यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।*

*ऐसे ही एक मां का कहना था कि मेरी दो वर्ष की बेटी ने पूरे प्रियूषण पर्व के आठ दिनों में चौंविहार का पालन किया। क्या आपको लगता है कि दो वर्ष की उम्र में इतनी समझ आ जाती है? या फिर जबरन उसे सूर्यास्त के बाद खाने पीने को कुछ भी नहीं दिया होगा? यह एक बहुत बड़ा सवाल है, जो हकीकत में गहराई तक जाने की जरूरत है।*

*जबरदस्ती किसी से त्याग और तपस्या करवा कर आप क्या साबित करना चाहते हो? माना उसको ऐसे में कोई तकलीफ नहीं हुई हो, लेकिन एक बार भी सोचा है कि यदि उसको कोई तकलीफ हो जाती तो उसका दोष किसको लगता?*

*यदि ऐसे में किसी को कुछ हो जाता है, तो उसका दोषी कौन होगा?*

*भागों मत जागो। परमात्मा ने आपको बुद्धि इसलिए दी है कि आप खुद सही और गलत को समझकर चल सको, न कि धर्म की आड़ में किसी के बहकावे में आकर कुछ भी कर दो। "धर्म का डर" और "धर्म का लोभ" ये दोनों बातों ने आपकी आंखों पर ही नहीं, बल्कि आपकी बुद्धि पर भी पट्टी बांध रखी है।*

*कवि विजयराज जैन (kaviraj)*
*Facebook, Insta & YouTube: Kaviraj Vijayraj*

10/04/2026

लालच में जो अंधा हो जाए

09/04/2026

प्रार्थना

02/04/2026

Responsblity

*विषय: भोजनशाला बंद क्यों?* *आप सभी को मेरा प्रणाम एवं जय जिनेंद्र, जय हिंद। आज विश्व में कई देशों की लड़ाई के कारण सभी ...
11/03/2026

*विषय: भोजनशाला बंद क्यों?*

*आप सभी को मेरा प्रणाम एवं जय जिनेंद्र, जय हिंद। आज विश्व में कई देशों की लड़ाई के कारण सभी देशों में बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में रसोई गैसे की पूर्ति पूर्ण नहीं होने के कारण कई होटल शहरों में बंद हो रही है, और इसका असर हर धर्म या समाज की चल रही भोजनशाला पर भी पड़ रहा है।*

*लेकिन मुझे अपने जैन धर्म और समाज की भोजनशाला के बंद होने के निर्णय पर बहुत ही चिंता हो रही है। क्या हम इतने भी सक्षम नहीं है कि ऐसे समय में भोजनशाला को चालू रखे?*

*भोजनशाला के लाभ लेने वाले लाभ तब लेते है, जब वो अपने अन्य गांव या शहर से किसी अन्य शहरों पर किसी कारण वहां आकर बसे होते है, यदि ऐसी में उनको यह व्यवस्था नहीं मिले तो वो कहां जायेंगे? एक जैन को पूर्ण रूप से जैन और सात्विक भोजन यदि कही मिलता है तो वो अपने घर के बाद सिर्फ जैन भोजनशाला में ही मिलता है। और अब यदि वो अकेले किसी जगह रहता है तो वो वहां के नजदीकी अपने संघ की भोजनशाला में ही जाता है। इसके बाद बात आती है होटल की, तो वहां पर उसे न चाहते हुए भी खाना पड़ता है, जबकि वहां पर जैन भोजन तो होता है, पर पूर्ण रूप से जैन नहीं होता है।*

*जैन संघ और जैन समाज आज खुद की ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों की भी मदद करने में हमेशा आगे रहा है, और सक्षम भी है। अब ऐसे में सक्षम जैन समाज ही पीछे हट जाएगा तो हमारा जैन साधर्मिक भाई वो कहां जाएगा? यह बहुत ही गहराई से सोचने का विषय है। हम इतने भी कमजोर या विवश नहीं है।*

*जैन भोजनशाला में सिर्फ वो लोग ही लाभ लेते है जो कभी घर पर किसी अड़चन का कारण होता है, या फिर कोई परिवार से दूर अकेले रहता हो। अन्यथा सभी अपने अपने घर पर ही खाना खाते है।*

*जहां तक मै समझता हूं कि, ऐसे गंभीर हालात में, हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए, न कि उनका साथ छोड़ना चाहिए। इसलिए रसोई गैसे की यदि कोई कमी आ रही है तो समाज के हर घर को अपने अपने संघ की भोजनशाला में उसका साथ देने की जरूरत है। यदि भोजनशाला के संघ में जुड़े हुए सभी घर, रसोई गैसे की यदि साल में १,२,या ३ सिलेंडर भी भेट कर दे तो कई सारे सिलेंडर की व्यवस्था, भोजनशाला में हो सकती है। वैसे हर कोई नहीं कर पाएगा लेकिन जितने भी कर सकेंगे तो शायद भोजनशाला को बंद करने की नौबत कभी नहीं आएगी। इसके अलावा हर जैन संघ और जैन भामाशाली हर जगह बहुत मजबूत है, वो चाहे तो क्या नहीं कर सकते है। रसोई गैसे की व्यवस्था तो कर ही सकते है। मैं अपने संघ को सालाना ३ सिलेंडर भेट करने को तैयार हूं और इसके बाद भी मैं और भी देने की कोशिश करूंगा कि इससे भी ज्यादा भेट कर सकू।*

*सरकार ने फिलहाल २१ दिन की जगह २५ दिन की रसोई गैसे को देने का निर्णय लिया है, न कि सरकार ने यह कहां है कि, खत्म हो गया है, और अब मिलेगा नहीं।*

*मैं जैन समाज से हर संघ में चलने वाली भोजनशाला के महान ट्रस्टियों से निवेदन करता हूं कि, भोजनशाला को बंद करने का निर्णय वापस ले और उसका हल निकालकर उसे चालू रखकर अपनी योग्यता को कायम रखें, बजाए पीछे हटने से।*

*और संघ के सभी पुण्यशालियों से भी मै निवेदन करता हूं कि,आप शक्ति और व्यवस्था अनुसार अपने अपने संघ की भोजनशाला में रसोई गैसे के सिलेंडरवकी भेट करे, ताकि ऐसे समय में हम भोजनशाला को बंद नहीं होने दे*

*ऐसे समय में यह जिम्मेदारी सिर्फ ट्रस्टियों की ही नहीं, बल्कि हर एक उस घर की है, जो उस संघ से जुड़े है। इसलिए अपनी अपनी जिम्मेदारी को अपना फर्ज समझकर जितना हो सके उतना सहयोग देने की कृपा करे।*

*भोजनशाला में कुछ कुछ वस्तुओं की कमी कर, निम्न स्तर पर भी भोजन की व्यवस्था की जा सकती है, जैसे मिठाई न हो, दो तीन सब्जी की जगह एक ही हो, इसके अलावा और भी जो उचित हो।*

*लिखने में कोई गलती हुई हो तो क्षमा चाहता हूं। मिच्छामि दुक्कद्दम।।*

*कवि विजयराज जैन (kaviraj)*
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*विषय: रिश्ते में Attitude or Let's go**रिश्ते अगर बिगड़ सकते है, तो फिर से ठीक भी हो सकते है, लेकिन बस शर्त यह है कि इस...
06/03/2026

*विषय: रिश्ते में Attitude or Let's go*

*रिश्ते अगर बिगड़ सकते है, तो फिर से ठीक भी हो सकते है, लेकिन बस शर्त यह है कि इसके लिए दोनों मिलकर सच में ठीक करने की कोशिश करे तो, वरना किसी एक के करने से कभी भी ठीक नहीं होगा। कई बार ऐसे देखा गया है कि, रिश्ते जब बिगड़ जाते है तो दूरियां भी बन जाती है।*

*और एक समय के बाद जब कोई एक फिर से सब कुछ भुलाकर, रिश्ते को जोड़ने की कोशिश करता है, तो दूसरा वाला अहंकार में आकर और भी ज्यादा कठोर बन जाता है, और ऐसे में रिश्ते को ठीक करने वाले को ठेस पहुंच जाती है, और फिर वो पहले से भी ज्यादा कठोर बन जाता है। और फिर वो दुबारा जोड़ने की कोशिश तो क्या, कभी भी सोचेगा भी नहीं। और तो और पहले से भी ज्यादा नफरत करने लग जाएगा।*

*ऐसे चलते चलते जब कुछ दिन गुजर जाते है, तो इस बार दूसरा वाला थोड़ा सरल बन जाता है, और वह भी रिश्ते को ठीक करने की कोशिश करता है, लेकिन अब वो पहले वाला इतना आसानी से मानने को तैयार नहीं होता है, क्योंकि वह यही सोचता है कि जब उसने जोड़ने की कोशिश की थी, तब तो यह थोड़ा भी साथ देने को तैयार नहीं था, तो फिर अब वो भी क्यों दे, और फिर वो दूसरा वाला भी पहले से भी ज्यादा कठोर बन जाता है।*

*अब यहां पर बात दोनों की देखी जाए, तो दोनों अब झुकने को तैयार नहीं होते है, और दोनों के बीच में इतनी नफरत बढ़ जाती है कि, एक दूसरे की हर बात के विपरीत चलने लग जाते है, और आगे जाकर उसका परिणाम बहुत ही बुरा हो सकता है।*

*वैसे बात तो कोई बड़ी नहीं थी, बस अपनी अपनी जिद्द के कारण दोनों के बीच में एक छोटी सी नोंकझोंक ने अहंकार को महत्व दे दिया। और इस अहंकार उन दोनों के बीच में आग और आग में घी डालने का काम करना शुरू कर दिया, और इसी कारण बात बढ़ती जाती है, जब तक दोनों मिलकर उसको खत्म नहीं कर देते है। जबकि बात कितनी भी बड़ी क्यों न हो, आखिर उसको एक समय के बाद अनदेखा करने में ही भलाई होती है।*

*ऐसे माहौल में प्रेम से बना घर कमजोर हो जाता है, और फिर जर्जर होकर बिखरने की नौबत आ जाती है, और तो और दुःखी और क्रोधित होकर न जाने क्या क्या हो जाता है, जो आजकल आए दिन एक न एक खबर देखने को मिलती है।*

*यदि दोनों जन थोड़ा सा गहराई से सोच ले और अपने अहंकार से बाहर आकर, सरलता से पेश आ जाए, और यह समझ ले कि न उसकी गलती है, न मेरी, बस दोनों के देखने का नजरिया अलग है, दोनों के तरीके अलग है, दोनों की सोच अलग है, और किसी की भी गलत नहीं है। अपनी अपनी जगह पर दोनों सही है। और उस बात को Let's go कर दे तो सारा झगड़ा ही खत्म हो सकता है।*

*आजकल ऐसा खासकर जीवनसाथी के साथ ज्यादा चल रहा है, और कितने रिश्ते टूटने की कगार पर है, और कितने तो टूट चुके है।*

*यदि छोटी मोटी नोंकझोंक के बाद तुरंत दोनों जन आपस में बैठकर गलतफहमी और अहंकार को दूर कर सरलता से बात करना शुरू कर दे, और प्रेम को थोड़ा सा परोस दे, और एक दूसरे को समझ ले, और उसका सुधार कर ले, तो फिर से रिश्ते की एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। और रोज रोज का दिमाग में जो बेवजह का टेंशन चलता रहता है, वो सारा का सारा दूर हो जाता है।*

*दुःख और क्रोध में इंसान के दिमाग की शक्ति कमजोर और नकारात्मक हो जाती है, और खुशी में वही पर शक्ति सकारात्मक होकर बढ़ जाती है, और हर कार्य में सफलता मिलती है। इसलिए ऐसा माहौल न बनने दे, की जिससे रिश्ता टूट कर बिखर जाए, और खुद ही खुद के कदमों पर कुल्हाड़ी मार दो।*

*जीवन में इन शब्दों के कारण बहुत से रिश्ते टूट गए है। जिद्द, अहंकार और क्रोध और वही इन शब्दो के कारण प्रेम के साथ साथ रिश्ते हमेशा चलते है। सरलता, बातों में मिठास, भरोसा और अनदेखा करना।*

*कवि विजयराज जैन (Kaviraj)*
*Kaviraj Vijayraj*

To,आदरणीय देवेंद्र फडणवीस जी,आदरणीया सुनेत्रा पवार जी,आदरणीय एकनाथ शिंदे जी,आदरणीया रितु तावड़े जी,आदरणीय देवेन भारती जी...
05/03/2026

To,
आदरणीय देवेंद्र फडणवीस जी,
आदरणीया सुनेत्रा पवार जी,
आदरणीय एकनाथ शिंदे जी,
आदरणीया रितु तावड़े जी,
आदरणीय देवेन भारती जी।

दिनांक: ०५-०३-२०२६

नमस्कार,
जय हिंद, जय महाराष्ट्र

विषय: टैक्सी माफियाओं की मनमानी और दादागिरी पर तुरंत कारवाही कीजिए।

आदरणीय/आदरणीया जी आप मेरा सादर प्रणाम स्वीकार करे। मैं आपसे नम्र निवेदन करता हूं कि रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एवं अन्य स्टेशन पर काली पीली टैक्सी वाले मीटर से कही पर भी आने को तैयार नहीं होते है। वो अपनी मनमानी से किराया मांगते है, और मीटर से चलने के लिए बोलने पर आने से मना कर देते है, और वहां पर जितने भी टैक्सी वाले खड़े होते है वो सभी एकता बनाकर ऐसी मनमानी कर रहे है। ऐसे में थके हारे बाहर से वापस लौटे हुए यात्रियों को मजबूरन विवश होकर दुगुना और तीन गुणा किराया देना पड़ता है। इसके अलावा मुंबई में और भी अन्य कई जगहों पर भी नजदीक की जगह पर आने को तैयार नहीं होते है, और खास कर जहां कोई बाजार है, वहां पर जाने के लिए या वहां से कही और जगह पर जाने के लिए भी जल्दी तैयार नहीं होते है। और कई टैक्सी वाले तो वहां पर भी दुगुना, तीन गुणा या उससे भी अधिक किराए की मांग करते है। और एक बात टैक्सी वालों के मीटर की भी समय समय पर जांच होनी चाहिए, ताकि मीटर में गड़बड़ी कर अधिक पैसा लेकर लूटपाट न कर सके।

वैसे आपने अवैध घुसपैठियों को बाहर कर और अवैध जगह पर कर रहे धंधे से फेरियों को हटाकर, मुंबई को और भी ज्यादा साफ सुथरा, और खूबसूरत बनाने में बहुत अच्छा कार्य किया है। ऐसे में वहां पर भीड़ तो कम हुई ही, साथ में जनता को वहां पर जाने, आने में बहुत आसानी हुई है। और तो और भीड़ की आड़ होने वाले छोटे मोटे चोर लुटेरों से भी राहत होने की गुंजाइश हो गई है। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप पूरे मुंबई में अवैध किराया मांगने वाले टैक्सी वालो पर और कही जाने पर ना बोलने वालों पर तुरंत कारवाही करे। ताकि संपूर्ण जनता को राहत मिले।

आज मनमानी करने वाले टैक्सी वालो के कारण बुजुर्ग, महिलाओं, एवं बच्चों को और भी ज्यादा परेशानी हो रही है। इसलिए आप से नम्र निवेदन है। की आप तुरंत कारवाही करे। और ऐसे अवैध किराया मांगने वाले टैक्सी वालों का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करे, और ईमानदारी से काम करने वालो की भर्ती करे। और साथ ही ऐसी और भी जगहों पर जहां भी ऐसी मनमानी हो रही है, वहां पर भी कारवाही कर वहां पर पुलिस कर्मी की भी तैनाती करे, ताकि वो ऐसे टैक्सी वालो पर वही पर ही कारवाही करे।

दिनांक ०५/०३/२०२६ को सुबह करीब ६.३० बजे मैं अपनी यात्रा पूर्ण कर वापस दादर रेलवे स्टेशन पर गुजरात मेल द्वारा पहुंचा और वहां पर मैंने टैक्सी वालो की बहुत मनमानी देखी। वहां से मेरे घर ताड़देव जाने के लिए कहां तो कोई भी मीटर से आने को तैयार नहीं था, और किसी ने ५०० रुपए की, तो किसी ने ६०० रुपए की तो किसी ने ४५० रुपए किराए की मांग की और अंत में मुझे ३५० रुपए देना पड़ा, जबकि वहां तक यदि मीटर से जाए तो १६० से १८० रुपए मीटर ही आता है।

मुझे उम्मीद है आप इस पर तुरंत और कठोर कदम उठाकर कारवाही करेंगे, और साथ ही हमेशा के लिए ऐसी हो रही अवैध वसूली को बंद करवाएंगे। जिससे आने वाले समय में न तो कोई टैक्सी वाला कही जाने से मना करेगा और न ही, मनमर्जी से अवैध किराया लेगा, और न ही मीटर में गड़बड़ी कर लुट करेगा।

लिखने में कोई गलती हुई हो तो क्षमा मांगता हूं। मिच्छामी दुक्कड़म ।

जय हिंद 🇮🇳 जय महाराष्ट्र 🚩

कवि विजयराज जैन (kaviraj)
Kaviraj Vijayraj

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