Aseem Ahmed Abbasee

Aseem Ahmed Abbasee Aseem Ahmed Abbasee is Hindi film lyricist & Urdu Hindi poet famous for his song "Emptiness" aka "Tune mere jaana, kabhi nahin jaana".

Aseem contributed in many Hindi films. Super star Salman khan recited his poem in movie "Kaagaz". Aseem Ahmed Abbasee is an Indian writer who writes both in Hindi and Urdu languages. He is the lyricist of the song, Emptiness who went viral over net and registered 3 million likes in India itself. The song is also known as ‘Tune Mere Jaana’(Emptiness). He has been associated with numerous private al

bums of composer-singer Gajendra Verma of which Emptiness is the most popular one. He has also penned lyrics for Bollywood movies like Table no.21, Bajatey Raho and Bittoo Boss. He has also associated with cinema of Punjab and Rajasthan. He is also known as a creative writer and Hindi editor of Poets Corner Group and has been associated with many radio stations.

Baat yun hai.....!!!!
25/11/2025

Baat yun hai.....!!!!

Phir ek Ghazal huyi yaa shayad kahin ke dil ki baat qalam se nikli. ❤️❤️❤️❤️❤️
04/11/2025

Phir ek Ghazal huyi yaa shayad kahin ke dil ki baat qalam se nikli. ❤️❤️❤️❤️❤️


"लखनऊ का सफ़र" लखनऊ का सफ़र मेरे लिए न सिर्फ़ अदब के सिलसिले में कारगुज़ारी का सफ़र रहा बल्कि मेरे ज़हन पर तारीख़ी अफ़सानों और म...
09/10/2025

"लखनऊ का सफ़र"

लखनऊ का सफ़र मेरे लिए न सिर्फ़ अदब के सिलसिले में कारगुज़ारी का सफ़र रहा बल्कि मेरे ज़हन पर तारीख़ी अफ़सानों और मक़ामों से मुलाक़ात का सफ़र भी रहा. इस सफ़र के दौरान मैं उन मक़ामों से गुज़रा जिनके बारे में मैंने किताबों में पढ़ा और कहानियों में सुना या फ़िल्मों में देखा था. घर से निकलते वक़्त मुझे इस बात का इल्म नहीं था के रास्ते में मैं इन छोटे छोटे तारीख़ी स्टेशनों से भी गुज़रूँगा. रात को भरतपुर शहर की रौशनी मंद होते ही झपकी लग गयी और फिर मथुरा कब गुज़रा मालूम नहीं, मथुरा छावनी से गुज़रते वक़्त आँख फिर से खुली और मैंने पीछे छूटते "मथुरा" शहर को देखा. फिर नींद मुझ पर हावी हो गई. मालूम नहीं आगरा कब निकला? मेरी मुमानी का मैका "इटावा" रेल ने अपनी रफ़्तार से कब पार किया मुझे उसका भी अंदाज़ा नहीं. आँख खुली तब मैं इत्रों से महकते शहर कन्नौज में था. कन्नौज को मैं इत्रों के सिलसिले में तो जानता ही हूँ लेकिन उसके साथ ही इतिहास में उसका ज़िक्र प्रथ्विराज चौहान और राजा जयचंद को लेकर भी पढ़ता आया हूँ. कुछ देर कन्नौज की ख़ुश्बुदार हवाओं में रेल खड़ी रही और मैंने इस शहर की इत्र से महकती धूप अपने बदन पर ओढ़ी. इसके बाद गाड़ी हरे भरे मैदानों में भागती रही और मुझे लेकर चमड़े के कारख़ानों के शहर "कानपुर" पहुँची. शहर की पुरानी बसावट, छोटी सड़कों में फँसते ट्रेफ़िक और छोटी छोटी पुराणी दुकानों पर लोगों की ठेलम ठेल ने शहर की विरासत का बखान किया. मैंने बड़ा अच्छा मेहसूस किया. इसके बाद गाड़ी लखनऊ के पुराने मगर शाही अखलाक़ और तहज़ीब के नुमाइन्दा स्टेशनों से गुज़रने लगी. बीच शहर से गुज़रती गाड़ी और उसके दोनों तरफ़ लखनऊ के अदबी लोग, नवाबी दौर की यादगार इमारतें, मस्जिदें, हवेलियाँ, दुकानें और लोग भी. "ऐश बाग़" और "बादशाह नगर" पर लोगों के जमघट देखे. अजीब इत्तफ़ाक़ ये था के मुझे लेने मेरा दोस्त डॉक्टर सऊद शहर के आख़िरी कोने और रेल के आख़िरी टर्मिनल "गोमती नगर" आने वाला था. लिहाज़ा मैंने रेल के साथ सारा शहर पार किया और पहली दफ़ा में ही शहर को इस कोने से उस कोने तक देखने का मौक़ा मिल गया. गोमती नगर पर उतरते ही बंदर के एक भयानक पोस्टर ने इस्तक़बाल किया. सऊद के आने में वक़्त था सो मैं वहीँ बैठ गया और चाये पीते हुए इस सुनसान स्टेशन पर इस बन्दर के भयानक पोस्टर की वजह दरियाफ़्त की. जवाब वही था जिसका मुझे शुबह था. ये पोस्टर यहाँ बंदरों से ख़तरे को बताने के लिए ही लगाया गया था. मेरी ख़ुश किस्मती थी के वहाँ कोई बन्दर नहीं था. ख़ैर चाय ख़त्म करते करते सऊद भी आ पहुँचा. और मैं निकल गया इस ख़ूबसूरत शहर के सफ़र पर. 😀😀😀

At the city of nawabs Lucknow for a mushayera. Visited the famous beautiful bada Imam baara.😀
04/10/2025

At the city of nawabs Lucknow for a mushayera.
Visited the famous beautiful bada Imam baara.😀


पिछले दिनों “तन्वी द ग्रेट” देखने पहुँचा.  ये मेरे लिए इज़्ज़त की बात थी के अनुपम खेर सर ने मुझे इस फ़िल्म के प्रीमियर पर इ...
23/07/2025

पिछले दिनों “तन्वी द ग्रेट” देखने पहुँचा.  ये मेरे लिए इज़्ज़त की बात थी के अनुपम खेर सर ने मुझे इस फ़िल्म के प्रीमियर पर इनवाईट किया था. मैं उनके प्यार के लिए उनका शुक्र-गुज़ार हूँ. “तन्वी द ग्रेट” का रिव्यु देना मेरे लिए आसान नहीं है क्यूँकि आप भी मेरे अपने हैं और इस फ़िल्म को आप तक लाने वाले भी मेरे अपने हैं. इसलिए मुझे अपने रिव्यु  में बैलेंस बनाए रखना होगा,  लेकिन मैं शर्त लगा कर कह सकता हूँ के ये फ़िल्म देखने के बाद आप फ़िल्म और मूवी के बीच का फ़र्क जान जायेंगे.  Writing, Acting, Music, Direction सब कुछ क़ाबिल ए तारीफ़ है।

अगर आप सोच रहे हैं के मैं फ़िल्म की तारीफ़ ही किये जा रहा हूँ, कमी तो कुछ बताई नहीं, लेकिन ये फ़िल्म हमें सिखाती ही यही है के कमियाँ ढूँढना बंद करो. कमी होना कमी नहीं है, वो उस चीज़ के वजूद की नींव है. मेरा अपना एक शेर है:

हर इक शय की कमी में ही असल सच्चाई है उसकी,
अगर पत्थर के दिल होता तो फिर पत्थर नहीं होता,

तो मेरे भाई फ़ौरन जाइये और “तन्वी द ग्रेट”  देखिए.
वाक़ई ग्रेट फ़िल्म है.
- असीम अहमद अब्बासी 
(हिंदी फ़िल्म गीतकार एवं लेखक)




On the Red Carpet: 😊At the premiere of “Tanvi the great”, A great directorial comeback by   sir. Certainly a must watch ...
17/07/2025

On the Red Carpet: 😊

At the premiere of “Tanvi the great”,
A great directorial comeback by sir.
Certainly a must watch film.

“शहर में रात ही आती है सीधे दिन के बाद,शाम तो गाँव के खेतों में उतर जाती है.”एक लंबे सफ़र से लौट तो आया हूँ, मगर पूरा नही...
30/06/2025

“शहर में रात ही आती है सीधे दिन के बाद,
शाम तो गाँव के खेतों में उतर जाती है.”

एक लंबे सफ़र से लौट तो आया हूँ, मगर पूरा नहीं लौटा। मेरा दिल उन्हीं दिलकश मनाज़िर में रह गया है। इन दिनों कुछ नासाज़ हूँ लेकिन गुज़िश्ता सफ़र की ख़ूबसूरत और ज़िंदगी को एक बड़े हादसे के बाद भी आगे बढ़ाने के लिए हिम्मत देती याद मुझे हौंसला दे रही है। जल्द ही पूरी तरह से अच्छा होकर आपसे नए काम के साथ मिलूंगा। (इंशा अल्लाह).


बीते वक़्त में सफ़र कर रहा हूँ। भोपाल की ऐतिहासिक ताज उल मसाजिद के बाद भोजपुर का हज़ारों साल पुराना मंदिर और अब पहुँचा हूँ...
17/06/2025

बीते वक़्त में सफ़र कर रहा हूँ। भोपाल की ऐतिहासिक ताज उल मसाजिद के बाद भोजपुर का हज़ारों साल पुराना मंदिर और अब पहुँचा हूँ पंचमढ़ी की हज़ारों बरस पुरानी ग़ुफ़ाओं को देखने। लिख रहा हूँ और उससे ज़्यादा पढ़ रहा हूँ।😀🙏

Thousand year old temple at Bhojpur near Bhopal with my beloved friend Rahul Sagar, Shivangi & Urdu.😀😀😀😀
16/06/2025

Thousand year old temple at Bhojpur near Bhopal with my beloved friend Rahul Sagar, Shivangi & Urdu.😀😀😀😀

At Taj ul masjid Bhopal 😀
15/06/2025

At Taj ul masjid Bhopal 😀

23/04/2025

Address

Mumbai

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Aseem Ahmed Abbasee posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to Aseem Ahmed Abbasee:

Share

Category