Bhagat singh Vs Gandhi

Bhagat singh Vs Gandhi जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती है.. लोगो क? बात से बात बनती है ........ शायद कुछ मसला हल हों जाये

टीआरएफ का नाम सुना है न?हाँ वही, पहलगाम अटैक वाले नीच लोगों का संगठन द रेसिस्टेंट फ्रन्ट। ये खुद को कश्मीर के ऑपरेटर बता...
23/05/2026

टीआरएफ का नाम सुना है न?

हाँ वही, पहलगाम अटैक वाले नीच लोगों का संगठन द रेसिस्टेंट फ्रन्ट। ये खुद को कश्मीर के ऑपरेटर बताते हैं। पर रेपोर्टिंग सारी अपने पापा ऑर्गनाइज़ेशन एलईटी को ही करते हैं।

पहलगाम हमले से 3 रोज़ पहले 3 नीच, जिनमें एक का नाम फ़ैसल जट था; सारी रेपोर्टिंग बॉर्डर पार बैठे सैफुलाह जट उर्फ लँगड़ा को कर रहा था।

लँगड़ा जट इनका मास्टरमाइन्ड था। 21 अप्रैल को फ़ैसल जट ने कश्मीर बैसरन में वहाँ के लोकल इन्फॉर्मर्स (हमारे लिए गद्दार) परवेज़ और बशीर अहमद के घर बैठकर खाना खाया, आराम किया, पहलगाम में क्या सुरक्षा है कितनी लापरवाही, इन सबकी डीटेल्स ली, बदले में 3 हज़ार रुपए दिए और जाते वक़्त कंबल और कुछ एक्स्ट्रा फूड लेकर निकल लिए।

22 अप्रैल को, हमले के दिन, वो मस्त पेड़ के नीचे बैठकर ठूस रहे थे। परवेज़ और बशीर ने उन्हें देखा भी था, पर मजाल है जो किसी पोनी वाले या सुरक्षा बलों को सतर्क किया हो। आखिर 3000 रुपए लिए थे।

खाना पीना खाकर, ये तीनों नीच कायर एग्जिट और एंट्री पॉइंट पर तैनात हो गए ताकि कोई बचकर न जाने पाए।

इनमें फ़ैसल के पास एम4 कार्बाइन थी। ये अमरीकी दंबूक है, प्रति सेकंड 12 गोलियों की बौछार करने की क्षमता रखती है। बाक़ी दोनों के पास टिपिकल सेंतालीस थी।

फिर इन्होंने नाम पूछकर, कमला पढ़वाकर जो किया वो तो खून खौलाने लायक था ही।
पर और ज़्यादा खून तब खौला जब अपने ही देश के लोगों ने आर्मी पर सवाल उठाने शुरु कर दिए कि पहलगाम वालों को पकड़ क्यों नहीं पाई फोर्सेस? खुद सरकार ने ही हमला करवाया होगा।

अब आर्मी ने जो किया वो एनआईए की पूरी खुली रिपोर्ट चार्जशीट में दर्ज है।

तो ऑपरेशन सिंदूर के साथ-साथ ही ऑपरेशन महादेव भी चला था। याद है न? ऑपरेशन महादेव घर के अंदर की दीमक मारने के लिए था।

इस ऑपरेशन के समय ही 1100 से अधिक लोकल्स को डिटैन किया गया था, इसपर बवाल बहुत हुआ पर इन्हीं में से परवेज़ अहमद और उसका मामा बशीर पकड़ में आए थे। जब उनसे उगलवा लिया तो बाक़ी तीनों को ठोकना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं रहा।

फिर भी डेन्स जंगल हैं वहाँ, लोकल्स की मदद होती है तो चूहों को बिल से निकालना मुश्किल होता है। पर फिर भी फोर्सेज़ ने दौड़ा-दौड़ा के मारा सबको। एक को तो नेचरल केव के अंदर भूख से व्याकुल होने तक सब्र किया फोर्स ने। फिर मारा।

फोटोज़ भी रिलीज़ की थी।

बस एक सूअर था, मास्टरमाइन्ड लँगड़ा, जो कोई दस महीने तक यहाँ से वहाँ टहलाता रहा, जस्ट बिकाउज़ उसको लोकल हेल्प हासिल थी और बॉर्डर के आर-पार भ्रमण लगा रहता था।

लेकिन उसको भी 10 महीने बाद, पॉइंट ब्लैंक ठाँ कर दिया इंडियन आर्मी ने।

इसलिए कभी इंडियन आर्मी पर शक़ नहीं करना चाहिए।

कोई करे तो उसे बता देना कि हम यूएस या भिखारी पड़ोसी की तरह पीआर टीम के भरोसे आर्मी नहीं चलाते, हम आर्मी चलाते हैं हिम्मत, हौसले और शौर्य से!

हम नीच हरकत करते नहीं, निहत्थों को मारते नहीं, और कोई नीचता करे तो उसे छोड़ते नहीं। 300 किलोमीटर अंदर भी छुप के बिल में बैठ जाए तो ठोक के आते हैं।

आई फ़ील सेफ बिकाज़, वी हैव द इंडियन आर्मी!

एनआईए की पूरी डीटेल रेपोर्ट्स अवैलबल हैं ऑनलाइन। जब मन हो फ़ैक्ट्स वेरीफाई कर लेना। (तस्वीर प्रतीकात्मक है)

Jay hind

03/05/2026

करीब 15 वर्षो से कह रहा हु यह दस नियम लागु करो,,फिर कोर्ट ओर प्रशासन भी हमारे लिए काम करेगी अधीक तेजी से.....
1, समय से शादी करना,,,लडकी 16 से 20 लडका 18 से 24 तक शादी हो जाना चाहिए ।।
2,, परिवार नियोजन,,, 4 से अधिक आज के समय" ।।
3, गुरुकुल मे शिक्षा होना चाहिए..ईशाकुल मे नही ।।
4,, घर घर गीता क्लास लगाकर ज्ञान प्रचार हो ।।
5,, दान केवल गुरूकुल मे ही दे..या बेक से अपने आप ही कटने की व्यवस्था बनै ।।
6,,घर वापसी करवाना हर सनातनी का धर्म हे यह लोगो को समझाकर..उसके लिए आर्य समाज व इस्कॉन का सहयोग देकर ।।
7,, लोगो को एक्स मुस्लिम अभियान से जोडकर...
8,, पेसा देकर...घर वापसी करने पर कई प्रकार से घन दिया जाय व सुरक्षा ।।
9,,धर्म सुरक्षा नाम से कठोर दण्ड देने वाली सेना बने व कानून ।।
10,, ज्ञान यज्ञ के द्वारा...लोगो को सही गलत की जानकारी देकर राष्ट्र को बचाए।।
# यह विचार मे स्वयं साक्षात बृह्मदर्शी होने के नाते से दे रहा हुं,,
किसी भी तरहा कि जिम्मेदारी व बहस के लिए त्यार हुं,,,🕉🙏

हर हर महादेव

This is the face of Ravindra Patil.Those who know his story and his tragic end, will never watch a Salmon Khan movie.Pat...
03/05/2026

This is the face of Ravindra Patil.

Those who know his story and his tragic end, will never watch a Salmon Khan movie.

Patil was a Mumbai Police constable and the prime witness in the 2002 hit-and-run case involving Salmon Khan.

𝗧𝗵𝗲 𝗥𝗼𝗹𝗲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗪𝗶𝘁𝗻𝗲𝘀𝘀

​In 2002, Patil was a 24-year-old constable assigned as Salmon Khan’s bodyguard following threats from the underworld.

He was in the vehicle on the night of September 28, 2002, when the car crashed into the American Express Bakery in Bandra, killing one person and injuring four others.

​Patil filed the original FIR and consistently testified that :

​Salmon Khan was driving the car, not his driver.

​The actor was under the influence of alcohol.

​Patil had warned him to slow down while driving at 90-100 km/h, but the warning was ignored.

​𝗧𝗵𝗲 𝗗𝗼𝘄𝗻𝗳𝗮𝗹𝗹

​Following his testimony, Patil's life spiraled downward :

▪︎ ​𝗟𝗲𝗴𝗮𝗹 & 𝗣𝗿𝗼𝗳𝗲𝘀𝘀𝗶𝗼𝗻𝗮𝗹 𝗣𝗿𝗲𝘀𝘀𝘂𝗿𝗲 : He reportedly faced immense pressure from several quarters to change his statement.

▪︎ He went missing for a period to avoid harassment from both the legal defense and allegedly from within the policε force.

▪︎ 𝗗𝗶𝘀𝗺𝗶𝘀𝘀𝗮𝗹 : Because he missed court dates during his absence, a non-bailable warrant was issued against him

▪︎ The court didn't care for the fact that he was literally running for his own life, as he was under threat from powerful Bollywood and underworld personalities.

▪︎ Instead of putting him under a witness protection program; ironically, he was jailed in Arthur Road Jail alongside hardened criminals.

▪︎ In prison, he was harassed and tormented by criminals, who were delighted to find a cop in their midst. This was deliberately done to break him down.

▪︎ His sεniors told him that if he changed his testimony and gave a clean chit to Salmon, he would be released from prison. However he refused to do the same.

▪︎ In 2006, he was dismissed from the police force for being absent from duty (because he was in prison!).

▪︎ ​𝗦𝗼𝗰𝗶𝗮𝗹 𝗜𝘀𝗼𝗹𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 : His family eventually disowned him (they were under pressure as well), and he was left without a job or support system.

​𝗙𝗶𝗻𝗮𝗹 𝗗𝗮𝘆𝘀

​The "after" photo on the right shows Patil in a state of extreme physical decay.

In 2007, he was found on the streets of Mumbai suffering from a drug-resistant strain of Tuberculosis.

He was admitted to Sewri TB Hospital, where he was reportedly reduced to a "pile of bones," weighing only about 30 kg.

​Ravindra Patil died on October 4, 2007, at the age of 30.

His last words to a friend were reportedly "𝙄 𝙨𝙩𝙤𝙤𝙙 𝙗𝙮 𝙢𝙮 𝙨𝙩𝙖𝙩𝙚𝙢𝙚𝙣𝙩 𝙩𝙞𝙡𝙡 𝙩𝙝𝙚 𝙚𝙣𝙙, 𝙗𝙪𝙩 𝙢𝙮 𝙙𝙚𝙥𝙖𝙧𝙩𝙢𝙚𝙣𝙩 𝙙𝙞𝙙 𝙣𝙤𝙩 𝙨𝙩𝙖𝙣𝙙 𝙗𝙮 𝙢𝙚."

Years after his death, in 2015, the Bombay High Court ultimately acquitted Salmon Khan, partly because Patil had died and could no longer be cross-examined, leading the court to deem his earlier statements "unreliable."

02/05/2026

बीते दिनों बेटे का टूर्नामेंट था। आयोजन नोएडा के एक प्रतिष्ठित स्कूल में था।
हम दोनों बाप बेटा एक लंबी ड्राइव के बाद आयोजन स्थल पर पहुंचे।
स्कूल की चकाचौंध देखते ही बनती थी।
बेटा बड़े गौर से इर्द गिर्द देख रहा था। वह महसूस कर रहा था के वह एक अजनबी जगह पर अजनबी लोगों के बीच आ गया है।
अंडर 13 ऐज ग्रुप में उसका पहला मैच उसी स्कूल के लड़के के साथ था।
उसके चेहरे से झलक रहा था के उस नए माहौल में वह दबाव में है।
नई जगह पर जा कर एडेप्ट होने में समय लगता है और 11 साल के बालक के लिये तो स्वयं को उन परिस्थितियों में एक दम से ढाल लेना मुश्किल था।

मैच शुरू हुआ और दबाव खेल पर झलकने लगा। विपक्षी हावी हो रहा था और उसके फेवर में दबा कर हूटिंग हो रही थी।
बेटा मैच हार गया।

उस दिन लीग सिस्टम के हिसाब से कुल 4 मैच होने थे अभी 3 मैच शेष थे।

झल्लाहट और गुस्सा ऊसके चेहरे से टपक रहा था। झल्लाहट आंसुओं में तब्दील हो रही थी।
मैं पास खड़ा था और उसके शांत होने का इंतजार कर रहा था।
उसने घूंट भर पानी पिया।
मैंने उसे सहलाया।
कुछ मिनट बाद मैंने उससे पूछा के हार का क्या कारण रहा।

कुछ समय वह निशब्द खड़ा रहा। फिर बोला "नया कोर्ट है, कुछ समझ में नहीं आया"

मैं उसके बताने से पहले ही समझ चुका था के नई जगह और एक दम से एडेप्ट करने में उसे झिझक हो रही है।

हम देसी आदमी हैं। परिस्थिति विकट होती है तो #राम याद आते हैं।

बातों बातों में मुंह से निकल गया "लंका भी तो राम जी के लिये नई जगह थी ? राम जी तो प्रेशर में ना आये। उलटा रावण को ही उसके होम ग्राउंड पर पछाड़ दिया"
बेटे ने मेरी ओर देखा।

"और हिमालय, जब बजरंग बलि हिमालय गए, संजीवनी लेने तो उनके लिये भी तो हिमालय नया कोर्ट था ? नया ग्राउंड था?"

"वो तो भगवान थे" लड़के ने सुबकते हुए कहा।

"तो हम उनके भक्त हैं" अनायास ही मेरे मुंह से निकल गया।

अगले कुछ समय में हमने अगले 3 मैच के विषय पर चर्चा की।

पीठ ठोकने या तारीफ के लिये नहीं कह रहा लेकिन अगले 3 मैच लड़के ने एकतरफा जीते। ना माथे पर शिकन ना दिल में डर। निर्भीक, निडर हो कर खेला। बिंदास होकर खेला।
उस मैदान को उस कोर्ट को, अपना कोर्ट समझ कर खेला। उसकी जीत उसके खेल में नहीं थी, वह समझ रहा था के वह संजीवनी खोजने निकला है और खाली हाथ वापिस नहीं आ सकता।
उसकी जीत इस विचार में थी जो उसके मन मस्तिष्क में कौंध रहा था।


कौन कहता है #राम केवल #रामायण में हैं, जीवन के हर कदम पर हर परिस्थिति में राम हमारा हाथ पकड़ कर चल रहे हैं।

हमारे साथ श्री रघुनाथ, फिर किस बात की चिंता।
शरण में रख दिया जब माथ, फिर किस बात की चिंता।।

पोस्ट साभार 🙏

ये भाई साहब अमरावती जिले के निवासी उमेश प्रहलादराव कोल्हे शहर में 25 सालों से केमिस्ट की दुकान चलाते थे,,।।2006 में उनकी...
17/04/2026

ये भाई साहब अमरावती जिले के निवासी उमेश प्रहलादराव कोल्हे
शहर में 25 सालों से केमिस्ट की दुकान चलाते थे,,।।

2006 में उनकी मुलाकात डॉ यूसुफ से हुई यूसुफ वेटरनरी हॉस्पिटल मे काम करते थे उमेश के रेग्युलर ग्राहक थेउधार दवाई ले जाते रहते थे.मतलब व्यवासायिक रिश्ता था मगर फ़िर दोस्ती हो गयी..यूसुफ की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी उमेश कोल्हे एक सच्चे दोस्त के नाते उसकी हमेशा ही आर्थिक मदद करते थे..

यूसुफ तब्लीगी जमात से जुड़ा था रिलिजियस् था
किन्तु व्यवहार से गंगा जमुनी तहज़ीब झलकती थी।।

यूसुफ की बहन की शादी के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी.
इस संबंध में जब उसने उमेश से बात की तो उमेश
ने यूसुफ को रुपए दिए लेकिन यूसुफ ने वो पैसे कभी
वापस नहीं लौटाए. फ़िर भी उमेश उसको फोर्स नहीं किये

यूसुफ ने उन्हें अपने बच्चों को एक मुस्लिम स्कूल में
एडमिशन दिलाने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल
करने के लिए कहा था.तो उमेश ने स्कूल के प्रधानाचार्य
विशेष रूप से आग्रह किया उनकी सिफारिश के कारण है
कि यूसुफ के बच्चे को स्कूल में एडमिशन मिल पाया,,
यूसुफ और उमेश कोल्हे का एक दूजे के घर आना जाना था
दोनों एक दूजे के परिवार से भली भाँति परिचित थे..
उमेश प्रहलादराव कोल्हे बेहद शांत प्रिय सज्जन व्यक्ति थे
उनका किसी से कोई झगड़ा नहीं था, वह तेज आवाज में
कभी किसी से बात भी नहीं करते थे. उनके 24 साल के
मेडिकल स्टोर व्यवसाय में कभी कोई विवाद नहीं हुआ..
___इस मित्रता को 16 वर्ष हो चुके थे_____

26 मई 2022 को दिल्ली मे एक न्यूज चैनल पर डिबेट
चल रही थी। उसी दौरान BJP की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा
ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर दी।
देश भर के मुस्लिमों मे इससे गुस्सा भड़क गया।
मोहम्मद् साहब पर टिप्पणी को लेकर माहौल गर्म था
मुस्लिम समुदाय गुस्ताख नबी की एक सजा STSJ
का नारा सड़क से सोसल मीडिया तक लगा रहा था.

नूपुर का ये वीडियो सोशल मीडिया में सर्कुलेट होने लगा।
पूरे भारत मे बीजेपी नेता नूपुर शर्मा पर FIR होने लगी

दिल्ली से 1100 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के अमरावती में

8 जून को इरफान खान और मौलाना मुशिफिक अहमद के साथ कुछ लोग नूपुर शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कराने नागपुरी गेट पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने उनकी FIR दर्ज नहीं की, क्योंकि दिल्ली, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के ही दूसरे जिलों में इस मामले में पहले ही केस दर्ज हो चुके थे। इरफान और मुशिफिक पुलिस की
इस दलील से संतुष्ट नहीं थे.....

9 जून को दोनों ने नूपुर शर्मा पर FIR और 10 जून को बुलाए गए भारत बंद के बारे में एक वॉट्सऐप ग्रुप ‘मीटिंग only’ के जरिए मीटिंग बुलाई। इसमें काफी डिस्कशन के बाद तय हुआ कि मुस्लिम समुदाय के लोग न तो केस दर्ज कराएंगे और न ही भारत बंद में शामिल होंगे। इरफान खान, मुशिफिक, शेख शकील और
उनके साथी इस फैसले से खुश नहीं थे ...

21 जून 2022 रात के करीब 10.30 बजे उमेश कोल्हे
अपना मेडिकल स्टोर बन्द करके थोड़ी ही दूर गए थे...
अचानक कुछ लोगो ने उनको घेर लिया उनको घुटने
पर जबरन बैठाया सड़क पर उनका गला रे #त दिया
और मौके पर ही उमेश कोल्हे तड़,प तड़,प म #,र गए

पुलिस ने लाश को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया...

अमरावती के सेंट्रल हॉस्पिटल की ओर से 22 जून
2022 को जारी पोस्टमॉर्टम के मुताबिक उमेश कोल्हे
के गले पर कई गहरे घाव मिले थे। उनकी दिमाग
और आंखों की नसें भी पुरी तरह डैमेज हो गई थीं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने और इस जघन्य ह् #त्या की CCTV
फुटेज ने उमेश के साथ हुई बेरहमी बयान कर दिया
जैसे बकरे का गला का #,टते हैं वैसे ही का,,टा गया था
बिल्कुल हलाल तरीके से ताकि झ #टके में मौ #त न आये
बल्कि खु #न बहता रहे और शिकार तड़*प तड़*प के मरे
मामले की गंभीरता और क्रू #रता किसी गहरी साजिश
का इशारा कर रहे थे अमरावती पुलिस महाराष्ट्र ATS
के साथ NIA भी केस में शामिल हो चुकी थी.....
उधर उमेश प्रहलादराव कोल्हे की नृशंश ह्त् #या से उनके
परिजन ही नही उनके परम मित्र यूसुफ भी दुखित थे
उमेश के अंतिम संस्कार में भी यूसुफ शामिल हुए थे..

पुलिस ने जांच शुरू की जो ATS से होते हुए NIA के पास आई। जांच में सामने आया कि उमेश के 16 साल पुराने डॉक्टर दोस्त यूसुफ ने ही 10 और लोगों के साथ मिलकर इस क #त्ल की साजिश रची थी।

NIA की चार्ज शीट पुलिस की जांच मे क्या खुलासा हुआ
आँख कान दिमाक खोलकर पढ़ें समझें और सोचना...

उमेश कोल्हे #ब्लैक_फ्रीडम’ नाम के एक
वॉट्सऐप ग्रुप में जुड़े थे। यूसुफ खान इस ग्रुप का इकलौता मुस्लिम मेंबर था और उमेश कोल्हे ग्रुप के एडमिन थे...

14 जून को उमेश कोल्हे ने इसी ग्रुप में नूपुर शर्मा के
समर्थन में उनकी फोटो के साथ एक मैसेज पोस्ट किया

उमेश के पुराने खास मित्र यूसुफ ने भी यह पोस्ट देखा
और उसका स्क्रीन शॉट लेकर उमेश का मोबाइल
नंबर मेडिकल शॉप का पता और एक मैसेज के साथ
कई वॉट्सऐप ग्रुप में सर्कुलेट कर दिया। मैसेज
में लिखा था कि इसका अंजाम इसको दिखाना है।
यह मैसेज #कलीम_इब्राहिम वॉट्सऐप ग्रुप’ में भी
शेयर किया गया। #इरफान_खान इसी ग्रुप से जुड़ा था।

यूसुफ खान ने इस बारे में #आतिब_रशीद से भी बात की। आतिब उसका क्लाइंट था। 18 जून को आतिब रशीद अपने साथी #मोहम्मद_शोएब से मिला। दोनों में उमेश कोल्हे के बारे में बात हुई। इसके बाद आतिब ने इरफान खान से भी बात की। इरफान ‘कलीम इब्राहिम’ ग्रुप से जुड़ा था, इसलिए उसे मामला पहले से पता था।

ये मैसेज उसे ‘हंसी मजाक’ नाम के एक अन्य ग्रुप पर
भी मिला था, जिसे #अब्दुल_तौफीक_शेख ने भेजा था। #अब्दुल_मुशिफिक #अहमद, #शेख_शकील और #मुदस्सिर_अहमद के साथ पहले से नूपुर शर्मा के मामले
में बहुत एग्रेसिव थे। आतिब रशीद और इरफान खान ने
19 जून को दोबारा गौसिया हॉल में मिलने की बात तय की। #मोहम्मद_शोएब के साथ #शहीम_अहमद
नाम के शख्स को भी इसमें बुलाया गया।

अगले दिन मोहम्मद शोएब, आतिब रशीद, इरफान खान
और शहीम अहमद #गौसिया_हॉल में मिले और तय
किया कि उमेश कोल्हे ने पैगंबर मोहम्मद की शान
में गुस्ताखी की है। इसकी उसे सजा दी जानी चाहिए
मोहम्मद शोएब, आतिब रशीद और
शहीम अहमद ने इसकी जिम्मेदारी ली।

इरफान ने कहा कि वह इसके लिए हर तरह की मदद देने को तैयार है। उसने तीनों से कहा कि वे मोबाइल लेकर न जाएं, ब्लैक टीशर्ट और ट्रैक पैंट पहनकर और चेहरा ढंककर जाएं, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। इस गैंग को इरफान ही लीड कर रहा था।
इसके बाद आतिब रशीद बाइक से मोहम्मद शोएब को उमेश कोल्हे की पहचान के लिए उसकी मेडिकल शॉप पर ले गया। दोनों उस जगह भी गए, जहां हत् #या करना तय हुआ था।

हत् #या की पूरी साजिश मोहम्मद शोएब, आतिब रशीद,
इरफान खान और शहीम अहमद ने रची। चारों को इसमें #मुशिफिक_अहमद का साथ मिला, जो #मौलवी था। मुशिफिक, इरफान खान का करीबी भी था। ये दोनों नूपुर
शर्मा के खिलाफ FIR न लिखे जाने से नाराज थे ...

20 जून 2022 की रात करीब 9:30 बजे मोहम्मद शोएब और शहीम अहमद बाइक से घंटाघर लेन पहुंचे, जहां उमेश कोल्हे को मा #रा जाना था। काफी इंतजार के बाद भी उमेश नहीं आए तो वे उन्हें देखने मेडिकल शॉप पहुंचे। शॉप बंद हो चुकी थी, इसलिए वे उमेश की हत् #या नहीं कर पाए।

इसके बाद मोहम्मद शोएब और शहीम अहमद, आतिब रशीद से मिले और प्लान फेल होने के बारे में बताया। आतिब रशीद ने
यही बात इरफान को और इरफान ने शाहरुख खां और अब्दुल तौफीक शेख को बताई। उन्हें कोल्हे की रेकी करने की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह वे भी इस साजिश में शामिल हो गए।

21 जून को तीन लोगों ने रेकी की, तीन ने म #र्डर

आतिब और इरफान के कहने पर 21 जून को मुदस्सिर अहमद, शाहरुख खां और अब्दुल तौफीक शेख रेकी के लिए उमेश कोल्हे की मेडिकल शॉप के पास पहुंचे। शाहरुख खां ऐसी जगह खड़ा हो गया, जहां से वह उमेश कोल्हे की लोकेशन देख सकता था। उसने गमछे से चेहरा ढंक रखा था। तीनों मोबाइल पर एक-दूसरे को उमेश की मूवमेंट के बारे में बताते रहे।

शाहरुख खां एक NGO ेल्पलाइन’ की एम्बुलेंस
चलाता था। अब्दुल तौफीक शेख भी रहबर हेल्पलाइन से जुड़ा था। मोहम्मद शोएब, आतिब रशीद, शहीम अहमद इसी के ऑफिस में मिले। उन्होंने अपने मोबाइल वहीं एम्बुलेंस में रख दिए, ताकि उनकी लोकेशन क्राइम सीन पर न मिले।

इसके बाद मोहम्मद शोएब, शहीम अहमद ने चाकू लिए और आतिब रशीद के साथ बाइक से निकल गए। तीनों ने उस रास्ते पर पोजिशन ले ली, जहां से उमेश गुजरने वाले थे। उमेश कोल्हे अपनी शॉप बंद कर रात 10:20 बजे घंटाघर लेन पहुंचे। तीनों ने उन्हें रोक लिया।उन्हें घुटनों पर बिठाया और मोहम्मद शोएब
ने चाकू से उमेश कोल्हे का गला का #,ट दिया

शहीम अहमद भी चाकू निकालने वाला था, तब तक उमेश के बेटे और बहू वहां आ गए। दोनों ने शोर मचाया तो शोएब और शहीम बाइक से भाग गए। उमेश के बेटे-बहू ने तीन आरोपियों को भागते देखा था। वे इस घटना के चश्मदीद गवाह हैं। दोनों उमेश को पास के हॉस्पिटल ले गए, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

इस दौरान शेख शकील उमेश कोल्हे के बारे में अपडेट
लेता रहा। इरफान खान के कहने पर अब्दुल अरबाज,
ये पता करने हॉस्पिटल गया कि उमेश कोल्हे जिंदा है
या नहीं। मौत की जानकारी मिलते ही सभी आरोपियों
ने #जश्न के तौर पर #पार्टी की .....

NIA के मुताबिक 11 में से किसी आरोपी की उमेश कोल्हे से दुश्मनी या रंजिश नहीं थी। वे सिर्फ नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने का बदला लेना चाहते थे।
हत्या का मकसद सिर्फ लोगों में दहशत फैलाना था।
सभी आरोपी एक-दूसरे को पहले से जानते थे और
उनमें लगातार मोबाइल पर बात हो रही थी।
चार्जशीट के मुताबिक उमेश कोल्हे का गला चाकू से काटने वाले मोहम्मद शोएब ने इसके लिए प्रैक्टिस
भी की थी जैसे प्रयागराज वाले लारेब ने की थी....

मर्डर के बाद शोएब ने उसी गौसिया हॉल में चाकू छिपा दिया, जहां मर्डर की प्लानिंग की गई थी। हत्या के बाद वह शहीम अहमद के साथ अमरावती से भाग गया था।

उमेश की हत् #या के मात्र 6 दिन बाद 28 जून को
राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल की
दिन दहाड़े उनकी दुकाम मे गला का,ट कर हत् #या की
गई कन्हैया ने भी नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट की थी।
इसका बदला लेने के लिए दो युवक मोहम्मद रियाज
और गौस मोहम्मद ने कन्हैया का गला का #ट दिया था।

गुस्ताख-ए- नबी की एक सजा, सर तन से जु #दा

NIA ने भी इस नारे का अपनी चार्जशीट में जिक्र किया है
। यही वो मोटिवेशन था, जिसकी वजह से इन 11
लोगों ने उमेश के मर्डर की साजिश रची। सिर्फ एक
पोस्ट का बदला लेने के लिए उमेश का गला का$,टा गया

उमेश प्रहलादराव कोल्हे का गला कट #वाने में उनका
16 साल से परम और मित्र यूसुफ खान 1मिंट नहीं
लगाया उमेश के सारे एहसान वर्षों की मित्रता इंसानियत
मानवता यूसुफ के मजहबी भावनाओं के आगे 0 हो गयी
एहसान फ़रामोश उमेश कोल्हे के अंतिम संस्कार में
शामिल होने इसलिए नही आया था की उसे दुख था
बल्कि इसलिए आया था की उस पे कोई शक ना करे

उमेश हत्याकांड के आरोपी तब्लीगी जमात से जुड़े थे,,,

कनहैया लाल के हत् #यारे गौस मोहम्मद और रियाज़ जब्बार मजहबी संगठन दावते-इस्लामी से जुड़े हुए थे...

यह चित्र स्वर्गीय उमेश प्रहलादराव कोल्हे जी का है...

यूसुफ ने सिर्फ़ उमेश को नहीं लाखों के भरोसे को मारा
गला काटने वाले कातिल हाथों में धोखे का खंजर मित्र
यूसुफ ने थमाया जिससे भरोसे का गला का #टा गया...

बाकी आरोपियों की फोटो कमेंट बॉक्स में है आप पहचान कर सकते हो

सावधान रहें सतर्क रहें, वंदे मातरम् 🇮🇳

चर्च का बिहार के लिए भविष्य तेजस्वी के कंधे से बिहार की कुर्सी पे आज नहीं तो १० साल में इनको CM बनाना है ये है तेजस्वी क...
17/10/2025

चर्च का बिहार के लिए भविष्य
तेजस्वी के कंधे से बिहार की कुर्सी पे आज नहीं तो १० साल में इनको CM बनाना है
ये है तेजस्वी की पत्नी रेचल गिदिन्हो और ईसि कड़ी में आपने देखा कैसे लालू परिवार का सबसे मजबूत वारिस tej प्रताप पार्टी और परिवार से बाहर हो गया
कैसे लालू की दोनों बेटिया मीसा और दूसरी वाली ragini या क्या नाम है वो दोनों खुल के तेजस्वी के विरोध में है मतलब लगभग उनको भी हाशिये पे डाल के परिवार और पार्टी से बाहर करने की तैयारी पूरी

हाल में लालू ने खुद जिन ख़ास बड़े वरिष्ठ नेताओं को पार्टी का सिंबल दिया तेजस्वी ने सबको बुला के बोला सिंबल वापस करो अब ये सब बड़े नेता है टिकेट इनको ही देना है लेकिन तेजस्वी देगा लालू नहीं इस कदम से लालू को भी हाशिये पे डाला जा रहा है

दूसरी तरफ तेजस्वी पालतू कुत्ते के तरह कांग्रेस और राहुल से मिलने दिल्ली के चक्कर काट रहा है जबकि खुद कांग्रेस वाले बिहार में इस बात से डर रहे है की राजद बड़ी पार्टी है कही अकेले उतर गयी चुनाव में तो कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिलेगी लेकिन उसके बाद भी तेजस्वी किस दबाव में कांग्रेस और १० जनपथ के सामने झुका हुआ है

अब एक बात बताइए तेजस्वी को सब तरफ से अकेला किया जा रहा है लालू की जिंदगी बहुत लम्बी है नहीं न सेहत है राबड़ी की काबिलियत नहीं है की वो किसी से २ बात अपने दिमाग से कर सके और तेजस्वी आज नहीं तो कल घोटालो में जेल जायेगा जमानत पे बाहर आ भी गया तो चुनाव नहीं लड़ सकेगा तो पार्टी की कमान किसके हाथ में जाएगी ज्यादा से ज्यादा अगर तेजस्वी नहीं काबू हुआ तो दुनिया से भी मुक्त हो सकते है

अब इन सब को मिलाने की कोशिश कीजिये गाँधी परिवार और उसमे सोनिया की आमद और उसके बाद के घटनाक्रम से समझ आ जायेगा कौन सी कहानी दोहराई जा रही है बिहार झारखण्ड ओडिशा और छत्तीसगढ़ चार राज्यों में चर्च की ताकत समझिये नक़्शे पे एक देश की कल्पना कीजिये इन चार राज्यों को मिला के और इसको जोड़ने की सोचिये नार्थ ईस्ट से जहा चर्च पहले ही कब्ज़ा कर चूका है और ६० से 90 % आबादी इसाई है अब नक्शा बनाइये

जिओपॉलिटिक्स के प्लान कई दशको के भविष्य के हिसाब से बनाए जाते है बिहार वालो ने कभी इस नजरिये से सोचा नहीं सोचना शुरू कर दीजिये या भविष्य में हल्लेलुइया बोलना और जिंदगी भर कमाई का १०% चर्च को देने और आज से भी बदतर गरीबी में जीने की तैयारी कर लीजिये क्युकी चर्च जता सत्ता में आता है ये सब लाता है

जय श्री राम
कालीन भैया

17/10/2025

यह खुशफहमी कतई नहीं है कि लव जिहाद पूरी तरह से समाप्त हो गया है मगर इतना जरूर है कि बहुत हद तक इसे चोट पहुंचा दी है।

लव जिहाद असल मे गजवा ए हिन्द का ही एक भाग है जिसका उद्देश्य भारत को इस्लामिक देश बनाने का था। लेकिन गौतम बुद्ध का ध्येय वाक्य कि चेतना से ही तृष्णा को मारा जा सकता है, शत प्रतिशत लागू हुआ।

लव जिहाद का उद्देश्य साफ था कि हिन्दू महिलाओ को प्रेम प्रसंग के माध्यम से निशाना बनाया जाए। इसमें इन्हे बड़े स्तर पर सफलता भी मिली क्योंकि तब्लीगी जमात ऐसे मुस्लिम युवाओं को आर्थिक मदद देती थी जो हिन्दू स्त्री का सतित्व खत्म करते थे।

कैसे महिलाओ के भोजन मे ड्रग्स मिलाये जाते थे, कैसे उन्हें बताया जाता था कि उनका धर्म हेय है और जो है बस इस्लाम है। वो सब हम केरल स्टोरी मे देख चुके है, आज भी यह समस्या पहले से कम मगर बनी हुई है।

इस्लाम कोई सामाजिक व्यवस्था नहीं है अपितु सैन्य व्यवस्था है, कम से कम भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश मे तो है शेष इस्लामिक देश अब धीरे धीरे आधुनिकता की ओर बढ़ रहे है। मगर इन तीनो देशो मे इस्लाम कोई पद्धति नहीं है एक कर्ज है जो हर मुसलमान को चुकाना है, तब्लीगी जमात भी यही चाहता था।

शुरुआत मे सऊदी अरब ने बहुत पैसा लुटाया, उसी पैसे से एक इकोसिस्टम बना जिसमे लव जिहाद को प्रमोट करने के लिए फिल्मे बनी और हिन्दुओ को जाति मे बांटकर जाति समीकरण मुसलमानो के अनुरूप बनाया गया। इससे कई हिन्दुओ ने मुसलमानो को वोट करना बहुत हद तक स्वीकृत कर लिया था।

दिक्क़त शुरू हुई ज़ब 2016 मे नोट बंदी हुई, जमात का करोड़ो रुपया स्वाहा हो गया। जेहादियों को बांटने के लिए पैसा नहीं रहा, जैसे तैसे व्हाइट करने का प्रयास किया तो GST ने खेल बिगाड़ दिया। नोटबंदी इसीलिए गेम चेंजिंग थी क्योंकि NGO के माध्यम से जो कैश यहाँ वहाँ घुमाया जा रहा था वो रद्दी बनकर रह गया।

समस्या यही नहीं रुकी 2021 मे तब्लीगी जमात को सऊदी अरब ने आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और सारी फंडिंग कट गयी। ऊपर से हिन्दुओ मे जो जागरूकता आयी वह भी कारगर रही, इसलिए आजकल यदि आप लव जिहाद की घटना यदि सुनेंगे तो 90% मे मुस्लिम युवा नाम बदलकर छल करता है।

जबकि पहले मुस्लिम पहचान के साथ भी हिन्दू लड़की को ठगना बहुत आसान था, खुद मुसलमान ये कहते देखे है कि किसी हिन्दू लड़की से बात करने मे लिंचिंग का डर लगता है। ये इतिहास का वो विरलय क्षण है ज़ब हिन्दू जागा नहीं भी तो कम से कम मरा भी नहीं।

अब समय आ गया है ज़ब समाज मे ये जागरूकता भी लायी जाए कि किसी अंजान से फ़ौरन दोस्ती ना करें, दोस्ती हो भी तो उसके साथ खाना पीना तब तक ना करें ज़ब तक उसके हिन्दू होने का पुख्ता सबूत ना मिल जाए। चाहे आधार कार्ड ही क्यों ना देखने पड़े, हिन्दू युवाओं को भी चाहिए कि वे असहज ना हो।

ज्यादातर लव जिहाद के जो मामले अब आ रहे है उनमे या तो जेहादी हिन्दू नाम से छल करता है या फिर सीधे दुष्कर्म करके अपने कुकृत्य को दिशा देता है। इसलिए यदि कोई लड़की आपके प्रति स्वागत के भाव ना लाये तो असहज ना हो, ये बल्कि अच्छा ही है।

बाकि अब भी जहाँ कही लड़कियां मौत के कुएँ मे जा रही है उन्हें अब ना ही रोके क्योंकि एक का शव सौ को जागृति भी देता है।

✍️परख सक्सेना✍️

14/10/2025

कुमार एस जी की पोस्ट

दक्षिणी कनाडा में जब फसलों की कटाई शुरू होती है और चंद्रमा की एक विशेष तिथि को, जब रात में पर्याप्त चाँदनी होती है, तो वहां से लाखों करोड़ों कीट उड़कर दूर आकाश में छा जाते हैं। कीटों का यह झुंड दक्षिण की तरफ बड़ी वेग से प्रवास करता है क्योंकि बाद में सर्दियां आने वाली होती है।

ठीक उसी समय अमेरिका के उत्तर में स्थित गुफाओं से करोड़ों चमगादड़ एक साथ रात को बाहर निकलते हैं और इन कीटों से टकराते हैं। कीटों ने दिन के उजाले में पक्षियों से बचने की तो ट्रेनिंग ले रखी होती है मगर रात के अंधेरे में चमगादड़ों से बचने का उनका कोई अनुभव नहीं होता।

इस प्रकार वे आहार बनते हैं। पेट भरने के बाद, सुबह होने से पहले पहले चमगादड़ गुफाओं में जाकर उल्टा लटक जाते हैं।

ये चमगादड़ कुछ दिन पहले ही कई किलोमीटर की यात्रा कर इन गुफाओं में आये हैं। ये यहाँ बच्चे देते हैं और 6 माह बाद जब वे वयस्क होंगे, चमगादड़ों का यह टोला अपने मूल गंतव्य यानि दक्षिणी अमेरिका को लौट जाएगा।

हजारों वर्षों से यह इकोसिस्टम चल रहा है। चमगादड़ दक्षिण अमेरिका के जंगलों से उत्तरी अमेरिका की गुफाओं में आते हैं, यहाँ बच्चे पैदा करते हैं, कनाडा से आये कीटों का भक्षण करते हैं और लौट जाते हैं।

इधर चमगादड़ अपनी उड़ान की तैयारी करते हैं उधर कनाडा के कीट अपनी तैयारी। यदि किसी कारणवश कैनेडा के खेत, जंगल जल जाएं तो ये चमगादड़ भूखे ही मर जायेंगे।

चमगादड़ों को यह पता भी नहीं होता कि प्रकृति उनके लिए इतना शानदार आहार तैयार कर रही है। लेकिन आहार तैयार हो रहा होता है। उधर कीटों के मांबाप भी नहीं जानते कि वे जो बच्चे पैदा कर रहे हैं उनका भविष्य क्या है।

दुनिया भर में गैर-मुस्लिम लोग जब बेटियां पैदा कर रहे होते हैं तब वामपंथी इकोसिस्टम उन्हें लवजिहाद में फँसाये जाने के कार्य पर सतत काम कर रहा होता है।
इकोसिस्टम को ध्यान है कि कुछ वर्ष बाद ये लड़कियां टीनएजर होंगी, उनमें हार्मोनल बदलाव होंगे, उनकी रुचि माता पिता से हटकर किसी यौन साथी की खोज की तरफ भटकेगी और तब पिक्चर में कैसे चमगादड़ों की एंट्री करवानी है ताकि जो आहार है वह आराम से उनके मुख में चला जाये।

चमगादड़ों की एंट्री बहुत बाद में होती है। उससे पहले इन लड़कियों ने स्कूल और मीडिया के माध्यम से इतना पढ़ सुन लिया होता है, इतने "सीन" देख लिए होते हैं, इतनी फंतासाइज हो चुकी होती है कि बस कोई चिंगारी भड़के और वे बस उसमें कूदकर जल जाएं।
इन कीटों को तैयार ही इस तरह से किया गया है कि यदि कोई हिन्दू लड़का सामने आ भी जाये, ये उधर नहीं जाएंगी, इन्हें बस वही चाहिए।

और जब ये #उड़ान_भरती है, इनका सामना चमगादड़ों से करवाया जाता है।
लवजिहाद का सबसे बड़ा कारण मुल्लो की हार्मोन्स आधारित रणनीति है।

जिस नँगई, उच्छृंखलता और सधी हुई भाषा से वे इसमें इन्वॉल्व होते हैं, उनकी विशेषज्ञता देखकर आश्चर्य होता है।
लड़कियां मां बाप को पहचानने से मना कर देती हैं।
मां बाप की गोद से उसके बच्चे छीन लेना, उसे उनका शत्रु बना देना, दुनिया की इससे दुर्दांत और सफल युद्धनीति क्या होगी?
हिंदू लड़कियों को फंसाने के खेल में शिक्षा, मीडिया, प्रशासन, #कानूनके_लूपहोल्स और स्वयं परिवार शामिल है।

जवान होती बेटियों की भावनाओं को उभार कर, उन्हें M के अनुकूल बनाने की शुरुआत बहुत पहले ही हो जाती है, तब.... जब M वहाँ पिक्चर में भी नहीं होता। सबके शरीर और संस्कार एक जैसे नहीं होते और ये लड़कियां प्रवाह में बह जाती हैं।


Friends

03/10/2025

मेरठ(उत्तर प्रदेश) के पास लोइया गांव में शबी अहमद के खेत से एक कुत्ता किसी मानव अंग को लेकर भाग रहा था।
कुत्ते को मानव अंग लेकर भागते हुए ईश्वर पंडित ने देखा और उन्हें शक हुआ। पुलिस को सूचना दी गयी। पुलिस ने आकर शबी अहमद के खेत की खुदाई की तो एक लाश मिली। लाश किसी महिला की थी जिसका सिर और दोनों हाथ गायब थे।
पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया और हत्यारे की खोजबीन शुरु कर दी। हत्यारे को पकड़ना इतना आसान न था क्योंकि लाश का सिर गायब था। इसलिए उस लाश की शिनाख्त भी नहीं हो सकती थी। गांव के आसपास ऐसी कोई महिला गायब भी नहीं थी जिसकी हत्या पर शक जाता हो।
तब वहां के एस एस पी साहनी ने एक तरक़ीब सोची,
उन्होंने सोचा हो न हो लड़की कहीं बाहर से गांव में लाई गई है। गांव में कोई कुछ बताने को तैयार न था। एसएसपी साहनी ने तय किया कि गांव के जितने भी लड़के गाँव से बाहर नौकरी करते हैं वहां जाकर छानबीन की जाए। वहां के सभी थानों से संपर्क करके पता किया जाए कि क्या वहां किसी लड़की के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है ?
एसएसपी साहनी की ये योजना काम कर गयी और पंजाब में लुधियाना से एक 23 वर्षीय युवती के गायब होने की सूचना मिली। लुधियाना के मोतीनगर थाने में इस युवती के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज थी जो कि बी.कॉम द्वितीय वर्ष की छात्र थी। इसके बाद पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए जो जांच पड़ताल की उससे जो कहानी निकलकर सामने आयी वो इस प्रकार है।
एकता देशवाल संभ्रांत और आधुनिक परिवार की लड़की थी जो बी.कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा थी।और वहीं उससे टकराया शाकिब अहमद। शाकिब वहां नौकरी करता था लेकिन उसने अपना काम और पहचान दोनों एकता से छिपाई। उसने एकता को अपना नाम "अमन" बताया।
उसे अपने प्रेम जाल में ऐसा फंसाया कि एकता उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो गयी। अमन ने उससे कहा कि वह घर से गहने लेकर आ जाए और वो लोग वहां से कहीं दूर जाकर नई जिन्दगी शुरु करेंगे।
वह अमन के झांसे में आ गयी और करीब 25 लाख कीमत के गहने और नकद लेकर वह घर से फरार हो गयी। अमन उसे लेकर सीधा मेरठ के दौराला पहुंचा जो कि एक कस्बा है।
वहां किराये पर एक कमरा लेकर दोनों करीब एक महीने तक रहे। इसके बाद ईद के मुबारक मौके पर अमन उसे लेकर अपने घर आ गया जहां एकता को उसकी असलियत सामने आयी कि वो अमन नहीं बल्कि शाकिब है। अमन का भांडा फूटते ही एकता को बड़ा झटका लगा।
ईद के दिन दोनों में दिनभर झगड़ा होता रहा।
शाकिब अब समझ गया कि अब इसे रास्ते से हटाने का समय आ गया है। बिना उसे रास्ते से हटाये 25 लाख के गहने उसके नहीं होंगे।और उसका लव जेहाद का मकसद भी पूरा नही होगा ! कही लड़की भाग गई तो भांडा भी फूट जाएगा और 25 लाख का घाटा हो जाएगा। इसलिए शाकिब ने ईद की उसी रात उसके हत्या की योजना बनाई। ईद की रात उसने एकता को कोल्डड्रिंक में नशीली दवा पिलाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद उसी बेहोशी की हालत में वह कुछ शांतिदूत समुदाय के दोस्तों और अपने परिवार के लोगो के साथ मिलकर खेत पर ले गया जहां शाकिब ने बेहोशी की हालत में अल्लाह हु अकबर की तकबीर के साथ एकता की गला काटकर हत्या कर दी।
गला काटने के बाद उसके दोनों हाथ भी काट दिये गये क्योंकि एकता ने अपने एक हाथ पर अपना नाम और दूसरे पर अपने प्यार "अमन" का नाम गुदवा रखा था। शाकिब को शक था कि अगर पुलिस को ये सबूत मिल गया तो भांडा फूट सकता है। लेकिन अमन गलत साबित हुआ। सालभर लगे लेकिन उसका भांडा फूटा। आज उस सिर कटी लाश के रहस्य से पर्दा उठ चुका है और शाकिब अपने दोस्तों और परिवार के कुछ लोगो सहित पुलिस की गिरफ्त में है
इस वीडियो में एकता देशवाल के मां-बाप हैं और वीडियो में जो सामने टेबल कपड़ों में लपेटकर रखा गया है यह वही फावड़ा है जिससे गड्ढा खोदकर एकता की सिरकटी लाश को दफन किया गया था।
ताजा खुलासा ये है कि एकता की हत्या में शाकिब का भाई मुस्सरत, पिता मुस्तकीम, भाभी रेशमा और इस्मत की पत्नी मुस्सरत भी शामिल थे।
सब ने मिलकर उस मासूम लड़की को पहले नंगा किया। फिर उसके दोनों हाथ काटे। सिर काटा। और हाथ और सिर को पास के तालाब में फेंक दिया। सिर कटी लाश को जमीन में दफन कर दिया। किसलिए ?
इंतहा तो ये है कि इसके बाद भी शाकिब एकता का मोबाइल आपरेट करता रहा। उसका फेसबुक एकाउण्ट चलाता रहा। एकता बनकर वह एकता के घरवालों को मैसेज की रिप्लाई भी करता रहा और घरवालों को लगता रहा कि बेटी भागकर जरूर गयी है लेकिन अमन के साथ खुश है।
लेकिन 20 मई को जब पहली बार पुलिस का फोन आया तो सच्चाई सामने आयी। अब कर भी क्या सकते हैं? बेटी हाथ से जा चुकी है। सामने है तो कफन में लिपटा वो सीलबंद फावड़ा जिससे उनके बेटी की कब्र खोदी गयी थी।‘’

भारत में इन कबाइली भेड़ियों की संख्या ज्यादा हो चुकी है इसलिए अपने घर के बच्चों को मा बहन बेटियों को इन दरिंदो के षड्यंत्र से सतर्क करते रहे।

ओर सभ्य समाज भी अब इन भेड़ियों के दांत तोड़ने की व्यवस्था कर ले क्योंकि इन वीडियो को दांतों में खून लग चुका है यह प्रतिदिन हिंदुओं की बहन बेटियों को शिकार के लिए निकल रहे हैं। अब ईनके दांत तोड़ना बहुत जरूरी है
साभार

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