tahir m shah

tahir m shah बस इतना तुझसे चाहिए ऐ खुदा
अगर जमीन पे बैठू तो लोग उसे बड़ाप्पन कहे ओकात नही �

30/01/2024

ये भी हकीकत है की भूखे थे मेरे शहर के लोग जो बा ज़मीर थे

बे ज़मीरों ने तो ज़मीर की नीलामी से दौलत के महल बना लिए

26/01/2024

अहले वतन को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं❤️

06/01/2024

तुम पढ़ नहीं पाओगे उदासियां मेरी,
मुस्कराने के हुनर में हम इतना माहिर हैं

06/01/2024

लफ़्जों से इतना आशिकाना ठीक नहीं जनाब,
किसी के दिल के पार हुए तो इल्जाम कत्ल का लगेगा

01/01/2024

एक ओर ईट गिर गई दीवार ए जिन्दगी से ,

ओर नादान कह रहे है नया साल मुबारक हो.💕

29/12/2023

हक़ीक़त रूबरू हो तो अदाकारी नहीं चलती ,
__खु़दा के सामने बंदों की मक्का़री नहीं चलती ,,

तुम्हारा दबदबा फक़त तुम्हारी जिंदगी तक है ,
__क़बर के अंदर किसी की जमींदारी नहीं चलती

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