10/04/2026
दिनांक 5 जून 2026 रोजी, सायंकाळी 8.30 वाजता, यशवंत नाट्य मंदिर, माटुंगा
मोहब्बत किसी व्यक्ति के प्रति गहरी आत्मीयता, आकर्षण, समर्पण और अटूट विश्वास से उपजी एक सशक्त मानवीय भावना है। प्रेम केवल देहिक आकर्षण तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें निःस्वार्थ स्नेह, साथ निभाने का संकल्प और गहरा भावनात्मक जुड़ाव समाहित होता है।
मिर्ज़ा ग़ालिब कहते हैं —
“मौत पर भी मुझे यक़ीन है, तुम पर भी ऐतबार है,
देखना है पहले कौन आता है, हमें दोनों का इंतज़ार है।”
बँटवारे के दौर में जब सरहदें खींची जा रही थीं और कौमें जुदा की जा रही थीं, उसी समय दो दिलों में प्रेम अंकुरित हो रहा था।
“शफ़क” बेइंतहा मोहब्बत करने वाले उन दो दिलों की दास्तान है।
प्रतिमा विजय कांबळे लिखित व दिग्दर्शित 'शफ़क़' ह्या नाटकाचा दुसरा प्रयोग