22/08/2026
एक दफा आशा भोसले जी ने महान किशोर कुमार के बारे में एक ऐसी बात बताई थी जिससे किशोर दा के फैंस हैरान रह गए थे। आशा जी ने कहा था,"किशोरदा अक्सर रिकॉर्डिंग के वक्त किसी अदृश्य बच्चे के साथ आते थे। किशोर दा उस अदृश्य बच्चे के साथ खूब बात करते थे। मज़ाक करते थे। ज़ोर-ज़ोर से हंसते थे।"
"कई दफा तो वो मुझे भी साथ बैठा लेते थे उस बच्चे संग बात करने के लिए। मुझे तो कुछ समझ में नहीं आता था कि क्या चल रहा है। मुझे कैसे रिएक्ट करना चाहिए। मुझे वो सब अजीब नहीं लगता था। बल्कि मेरा तो खूब मनोरंजन होता था।"
कई लोग कहते थे कि किशोर दा स्कीज़ोफ्रेनिक बिहेवियर के शिकार थे। लेकिन उन्हें जानने वाले लोगों का मानना था कि किशोर दा इतने मनमौजी थे कि वो हमेशा मज़ाक के मूड में ही रहते थे। किशोर दा की इन्हीं आदतों का ज़िक्र एक दफा पंचम दा ने भी अपने एक इंटरव्यू में उनके बारे में बात करते हुए किया था।
पंचम दा ने बताया था,"मैं साल 1952 में कलकत्ता मुंबई आया था। मेरे पिता मुझे कारदार स्टूडियो लेकर गए जहां एक रिकॉर्डिंग होनी थी। जैसे ही हम मेन गेट से अंदर घुसे, मैंने देखा कि एक आदमी सफेद कुर्ता पाजामा पहने और गले में मफलर लपेटे बाउंड्री वॉल पर बैठा है।"
"मेरे पिता एस.डी.बर्मन साहब ने मुझसे कहा,"इस आदमी ने मुझे बड़ा परेशान किया है। देखो बाउंड्री पर कैसे बेखबरों की तरह बैठा है।" जैसे ही मेरे पिता जी स्टूडियो में गए, मैं उस आदमी के पास गया। मैंने उनसे पूछा,"आप यहां क्या कर रहे हैं?" वो बोले,"मैं कारदार साहब की नकल करने की कोशिश कर रहा हूं।"
इस दौरान दीवार पर बैठे हुए वो अपने पैर ज़ोर-ज़ोर से हिले रहे थे। तभी उनका एक जूता निकलकर नीचे गिर गया। उन्होंने मुझसे अपना जूता उठाकर देने की गुज़ारिश की। मैंने दे दिया। जूता पहनकर वो नीचे उतरे और बोला,"थैंक्यू साधू।"
"मैंने उनसे फिर एक सवाल पूछा। मैंने कहा,"आप अशोक कुमार के भाई हैं ना?" "हां। तभी तो कोई मुझे काम नहीं देता।" उन्होंने जवाब दिया।" मैंने अपना परिचय दिया और अपना नाम बताया। उन्होंने अपनी भौंहे उचकाकर कहा,"मैं जानता हू्ं। और मैं ये भी जानता हूं कि तुम्हें पंचम नाम मेरे बड़े भाई अशोक कुमार ने दिया है।"
इसके बाद वो अशोक कुमार की नकल करने लगे। मुझे बड़ी हंसी आई उन्हें ये करते देखकर।" "मैं हूं डॉक्टर जैकिल और मिस्टर हाईड। मैं हर रात अपनी पर्सनैलिटी बदलता हूं।" किशोर कुमार ने पंचम दा से कहा। उस वक्त तो पंचम दा को ये बातें अजीब लगी थी। बाद में उन्हें भी किशोर दा की शख्सियत के उस पहलू की आदत हो गई।