Mayank shukla

Mayank shukla Public Figure

07/02/2026

Aaiye Is Valentine Day Per Prem Nagri Chaliye❤🌹✨ .

जब संजू को ओपनिंग का मौका मिला, तो उसने वही इंटेंट दिखाया जो आधुनिक T20 की मांग है। वह थोड़ा समय जरूर ले रहा है, लेकिन उ...
01/02/2026

जब संजू को ओपनिंग का मौका मिला, तो उसने वही इंटेंट दिखाया जो आधुनिक T20 की मांग है। वह थोड़ा समय जरूर ले रहा है, लेकिन उसकी बैटिंग की तकनीक में रत्ती भर भी कमी नहीं है। वह रिस्क ले रहा है क्योंकि वह टीम के लिए तेज़ खेलना चाहता है, न कि अपने निजी स्वार्थ के लिए आंकड़े जुटाना। आज कमेंट बॉक्स में सवाल उठाने वालों, याद रखना कि जब मैनेजमेंट ही खिलाड़ी का रोल बार-बार बदले, तो दोष बल्ले का नहीं, बल्कि बिगड़ी हुई रणनीति का होता है।

न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर संजू सैमसन का बल्ला भले ही खामोश रहा हो, लेकिन उनकी काबिलियत पर शक करना सूरज की रोशनी पर सवाल उठाने जैसा है। भारतीय पिचों पर मिली यह विफलता उनके टैलेंट का अंत नहीं, बल्कि उनके धैर्य की एक कड़ी परीक्षा है। एक सच्चा कलाकार वही है जो अपनी ही जमीन पर गिरकर भी मुस्कुराना न भूले... लोग कह रहे हैं संजू फ्लॉप है, पर कोई यह क्यों नहीं देखता कि टीम मैनेजमेंट ने उसे नंबर 6 पर धकेलकर उसका मनोबल तोड़ने की कोशिश की।

संजू वो निडर योद्धा है जो टीम की ज़रूरत के लिए अपनी विकेट की परवाह नहीं करता। न्यूजीलैंड के खिलाफ यह सीरीज भले ही कठिन रही हो, पर संजू का कद इन परिस्थितियों से कहीं ऊंचा है। जिसे तुम अंत मान रहे हो, वह उनकी अगली ऐतिहासिक पारी का आगाज़ है। संजू की सादगी और निस्वार्थ खेल ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। बहुत जल्द उनका बल्ला अपनी सही जगह पर आकर सबकी बोलती बंद कर देगा। संजू कल भी श्रेष्ठ थे और हमेशा अपराजेय रहेंगे।
💎🔥

मेरी ज्योतिषीय परामर्श से सभी को सलाह है..... सोना और चांदी को बेचने का सही समय अभी है इसके बाद में चांदी और सोना धड़ाम ...
01/02/2026

मेरी ज्योतिषीय परामर्श से सभी को सलाह है.....
सोना और चांदी को बेचने का सही समय अभी है इसके बाद में चांदी और सोना धड़ाम से नीचे गिरेंगे?
मई जून जुलाई तक
सोने का भाव 1लाख से 1लाख 20 हजार प्रति 10 ग्राम
चांदी 1लाख से 1लाख 53000 प्रति किलो होंगी।
उत्तरा भाद्रपद से शनि जब अस्त होगा तब यह भाव गिरेंगे

19/01/2026
शाहरुख खान जब सम्राट अशोक बने थे, तो भी पर्दे पर शाहरुख खान ही दिख रहे थे, अशोक नहीं। फिर डॉन में ऐसा लगा कि उन्हीं एक्स...
18/01/2026

शाहरुख खान जब सम्राट अशोक बने थे, तो भी पर्दे पर शाहरुख खान ही दिख रहे थे, अशोक नहीं। फिर डॉन में ऐसा लगा कि उन्हीं एक्सप्रेशन के साथ अशोक कपड़े बदलकर डॉन बन गया है। दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे, राजू बन गया जेंटलमैन, कुछ कुछ होता है, कभी हां कभी ना, कभी खुशी कभी गम, मैं हूं ना... हर मूवी में शाहरुख एक ही एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलीवरी देता रहे।

सलमान तो खैर एक्टिंग के नाम पर ऐसा काला धब्बा है कि उसकी किसी फिल्म में निभाए गए किरदार का नाम याद ही नहीं रहता, हर किरदार में सल्लू भाई रहते हैं बाकी फिल्म में उस किरदार की कोई आइडेंटिटी नहीं रहती। ट्यूबलाइट में भी भाई उतने ही बचकाने थे जितने दबंग में, और दबंग में भी भाई का उतना ही जलवा था जितना वांटेड में।

आमिर भी एक्टिंग के नाम पर अपने ही बुने कोकून से बाहर नहीं आ पाते, पीके में उनके वही हाव भाव थे जो रंग दे बसंती में थे, और रंग दे बसंती में भी वो वैसे ही थे जैसा वो अंदाज़ अपना अपना में थे।

अक्षय भी हर मूवी में सिर्फ अक्षय कुमार है। यहां तक कि एक्टिंग के नाम पर मशहूर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी भी हर फिल्म में एक जैसे ही चरसी टाइप एक्सप्रेशन लिए रहता है चाहे वो गैंग्स ऑफ वासेपुर हो, बाबूमोशाय बंदुकबाज हो या सैक्रेड गेम्स हो। उसका बोलने का लहजा भी एक ही रहता है चाहे वो शुद्ध मराठी गणेश गायतोंडे बना हो या धुर झारखंडी फैजल खान या उर्दू नफीस मंटो।

पर इरफान.... इरफान ऐसा कलाकार हैं जिनकी पर्दे पर कोई आइडेंटिटी नहीं। वो हासिल में सिर्फ रणविजय थे, उसमें इरफान का कोई अंश नहीं था। इरफान को आप पान सिंह तोमर में भी ढूंढ़ते रह जाएंगे पर आपको वो नहीं मिलेगा, आपको सिर्फ डाकू पान सिंह तोमर दिखेगा। यही था इरफान, पर्दे पर सिर्फ उसका किरदार जिंदा रहता था और इरफान खुद को उस किरदार के सामने ख़तम कर देता था। इस हद तक कि पर्दे पर इरफान की खुद की कोई हैसियत नहीं होती थी पर जिस किरदार को वो जी लेते थे वो किरदार अमर हो जाता था। आप वली खान को लंचबॉक्स के साजन फर्नांडिस के सामने खड़ा कर देंगे तो दोनों एक दूसरे को नहीं पहचान पाएंगे। ये साली ज़िन्दगी का अरुण कभी बिल्लू से बाल नहीं कटवाएगा। रोग का इस्पेक्टर उदय राठौर कभी नहीं समझ पाएगा कि हिंदी मीडियम का राज बत्रा इतना जिंदादिल कैसे है। करीब करीब सिंगल का खुशमिजाज योगी कितना भी कोशिश कर ले पर ब्लैकमेल के अंतर्मुखी देव कौशल में कॉन्फिडेंस पैदा नहीं कर पाएगा।

जहां तथाकथित सुपरस्टार्स एक्टिंग के नाम पर सिर्फ अपना ही कैरीकेचर निभाते रहते हैं वहीं इरफान, के के मेनन, मनोज बाजपेई, पंकज कपूर ये सब सुपरस्टार नहीं हैं, बल्कि उम्दा कलाकार हैं। ये सुपरस्टार बन भी नहीं सकते क्योंकि इनके अंदर का कलाकार हर फिल्म में इनको ख़तम कर देता है इनके किरदारों को ज़िंदा करने के लिए! ये अपने किरदारों को अपने पसीने से सींचते हैं, इसलिए फिल्मों में इनकी खुद की कोई पहचान नहीं होती।

इरफान तुम बहुत बड़े कलाकार हो जब भी पर्दे पर किसी अच्छी स्क्रिप्ट के साथ किसी स्टार की घटिया एक्टिंग को देखेंगे तुम याद आओगे। जब भी नवाज़ुद्दीन को एक ही लहजे में दो अलग बोली बोलने वाले किरदारों को निभाते देखूंगा तुम याद आओगे। जब भी कोई आमिर खान को एक्टिंग में मिस्टर परफेक्शनिस्ट बोलेगा तुम याद आओगे। जब भी कबीर सिंह में शाहिद की एक्टिंग की तारीफ किसी के मुंह से सुनूंगा और खोजने की कोशिश करूंगा कि हैदर और कबीर सिंह में शाहिद के एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलीवरी में क्या अंतर था तब तुम फिर याद आओगे। यूं कि तुम होते तो कैसे करते, कैसे बोलते, कैसे निभाते... इसलिए तुम्हारी याद हमेशा आती रहेगी गुरु!


fans

डिफेंडर और पोर्श के बाद आज सतुआ बाबा ने मर्सिडीज भी खरीद ली। जिसकी कीमत 4 करोड़ के आस पास बताई जा रही है।माघ मेले में सतु...
17/01/2026

डिफेंडर और पोर्श के बाद आज सतुआ बाबा ने मर्सिडीज भी खरीद ली। जिसकी कीमत 4 करोड़ के आस पास बताई जा रही है।
माघ मेले में सतुआ बाबा अपने लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर चर्चा में बने हुए हैं।
#सतुआबाबा #माघमेला

लखनऊ में जब पहली बार म्युनिसिपैलिटी के चुनाव हुए,तो चौक से अपने ज़माने की मशहूर तवायफ़, महफ़िलों की रौनक और नज़ाकत की मि...
16/01/2026

लखनऊ में जब पहली बार म्युनिसिपैलिटी के चुनाव हुए,

तो चौक से अपने ज़माने की मशहूर तवायफ़, महफ़िलों की रौनक और नज़ाकत की मिसाल — दिलरुबा जान — उम्मीदवार बनीं। उनके रुतबे और लोकप्रियता का ऐसा असर था कि कोई भी उनके मुक़ाबिल खड़ा होने को तैयार न हुआ।

उन्हीं दिनों चौक में एक नाम बड़े अदब से लिया जाता था — हकीम शम्शुद्दीन साहेब। दवाख़ाना भी था, शोहरत भी, और मरीज़ों की भीड़ भी। दोस्तों ने ज़ोर-ज़बरदस्ती उन्हें दिलरुबा जान के मुक़ाबिल मैदान-ए-इंतिख़ाब में उतार दिया।

दिलरुबा जान का प्रचार शबाब पर था। चौक में हर शाम महफ़िलें सजतीं, मशहूर नर्तकियाँ बुलायी जातीं, और हुजूम उमड़ पड़ता। उधर हकीम साहेब के साथ बस वही गिने-चुने दोस्त थे, जिन्होंने उन्हें इस आज़माइश में धकेला था।

हकीम साहेब खिन्न होकर बोले, “तुम लोगों ने तो मुझे पिटवा ही दिया, हार अब मुक़द्दर है।”

दोस्तों ने हिम्मत न हारी और एक नारा गढ़ा —

“है हिदायत चौक के हर वोटर-ए-शौक़ीन को, दिल दीजिए दिलरुबा को, वोट शम्शुद्दीन को!”

जवाब में दिलरुबा जान ने अपनी नज़ाकत से तराशा हुआ नारा दिया —

“है हिदायत चौक के हर वोटर-ए-शौक़ीन को, वोट दीजिए दिलरुबा को, नब्ज़ शम्शुद्दीन को!”

नतीजा वही हुआ जो लखनवी ज़ेहनियत से मेल खाता था। हकीम साहेब का नारा दिलों में उतर गया और वो चुनाव जीत गए।

लखनऊ की तहज़ीब देखिए कि दिलरुबा जान ख़ुद हकीम साहेब के घर तशरीफ़ लाईं, मुबारकबाद पेश की और मुस्कुराकर बोलीं —

“मैं इंतिख़ाब हार गई और आप जीते, मुझे इसका कोई मलाल नहीं। मगर आपकी जीत ने एक हक़ीक़त साबित कर दी है

‘लखनऊ में मर्द कम हैं, मरीज़ ज़्यादा
#तहज़ीब ゚viralシalシ fans

Credit Kamlesh Chaturvedi

15/01/2026

"बनारस में करीब 150 उन मंदिरों को तोड़ दिया गया जिनका जिक्र पुराणों में है"
बनारस की जनता बनारस की पहचान मिटाने वाले को कभी नहीं भूलेगी

174000 लाशे गिरी थीं ,,700 मुगलों को अपने हाथों से काटने वाले योद्धा ,,यह थे श्रीराम मंदिर रक्षक पण्डित देवीदीन पाण्डेय ...
09/12/2025

174000 लाशे गिरी थीं ,,700 मुगलों को अपने हाथों से काटने वाले योद्धा ,,
यह थे श्रीराम मंदिर रक्षक पण्डित देवीदीन पाण्डेय ।

पंडित देवीदीन जो सनेथू गांव अयोध्या के रहने वाले थे, जिनका जन्म सर्यूपारीण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वो एक कर्मकांडी पुरोहित थे लेकिन जब मुग़ल सेना राममंदिर को ध्वस्त करने के उद्देश्य से अयोध्या की ओर बढ़ी तब पण्डित देवीदीन पाण्डेय ने पुरोहित का कार्य त्यागकर आसपास के ब्राह्मणों व क्षत्रियों को लेकर बाबर सेना के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए हथियार उठा लिया और मीर बाकी के नेतृत्व वाली मुगल सेना से युद्ध किया।

ये युद्ध इतना विकराल था की युद्ध करते समय पण्डित जी ने 700 मुगलों को अपने हाथों से काट डाला। एक मुगल सैनिक ने पण्डित जी के पीछे आकर तलवार से ऐसा वार किया कि वह तलवार पण्डित जी का ऊपरी सर काटते हुए आर-पार हो गई और उनका सिर दो भागों में फट कर खुल गया। लेकिन उन्होंने अपने गमछे से सर को बांधकर लड़ाई लड़नी शुरू कर दी और अंत में मुगल सैनिकों द्वारा एक के बाद एक किये गए वार से वे काफी घायल हुए और वहीं पर वीरगति को प्राप्त हुए ! ऐसे धर्म रक्षक को हमारा बारंबार नमन 🚩🙏🙏

अमरूद को आयुर्वेद में शीतल, पाचक और त्रिदोष-नाशक फल कहा गया है, जब इसमें सेंधा नमक + गोल मिर्च डाली जाती है, तो इसका प्र...
02/12/2025

अमरूद को आयुर्वेद में शीतल, पाचक और त्रिदोष-नाशक फल कहा गया है, जब इसमें सेंधा नमक + गोल मिर्च डाली जाती है, तो इसका प्रभाव 3 गुना बढ़ जाता है।

1. सेंधा नमक अग्नि दीपक माना गया है,भारीपन, गैस और भोजन न पचना दूर करता है,गोल मिर्च कफ को पिघलाकर पाचन को और तेज करती है।

2.अमरूद का फाइबर + सेंधा नमक का हल्का लैक्सेटिव प्रभाव पेट साफ, कब्ज में आराम और ब्लोटिंग खत्म।

3. अमरूद का Vitamin-C + गोल मिर्च की पिपरीन (जो Vitamin-C का अवशोषण बढ़ाए)
तेज़ इम्युनिटी बूस्टर, सर्दी-खांसी में फायदा।

4. सेंधा नमक का pH संतुलन पेट को शांत करता है,
गोल मिर्च गैस बनने से रोकती है।

5. सेंधा नमक आयोडीन का प्राकृतिक स्रोत है
जो थायरॉयड के लिए मददगार,अमरूद का पोटैशियम BP को कंट्रोल में रखता है।

6. गोल मिर्च मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है,
अमरूद पेट देर तक भरा रखता है, लो-कैलोरी, हाई-फाइबर Weight Loss Snack।

👉 कैसे खाएं (Ayurvedic Method)
अमरूद को बड़े टुकड़ों में काटें ऊपर से 1 चुटकी सेंधा नमक + 1 चुटकी गोल मिर्च डालें खाने के बाद 20–30 मिनट तक पानी न पिएं

दोपहर/शाम में लेना सबसे अच्छा

दिन में कितना अमरूद खाना चाहिए?
आयुर्वेद के अनुसार – दिन में 1–2 मध्यम साइज के अमरूद पर्याप्त हैं।
👉 इससे फाइबर भी सही मात्रा में मिलता है
👉 पेट भी साफ रहता है
👉 और गैस/कब्ज की दिक्कत भी नहीं होती।

अमरूद पर सेंधा नमक + गोल मिर्च = एकदम देसी पावर स्नैक!

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Bandra
Mumbai

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