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palash ke phool literature based on life experiences.

10/06/2026

सादगी का सौंदर्य

आज की दुनिया में जहाँ दिखावे की चमक-दमक को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं सादगी हमें भीतर की शांति और संतोष का रास्ता दिखाती है।
सादा जीवन का अर्थ अभाव नहीं, बल्कि आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच संतुलन बनाना है। कम साधनों में भी खुश रहना, छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढ़ लेना और स्वयं से जुड़कर जीना ही सच्ची समृद्धि है।
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#सादगी #संतोष #जीवन_दर्शन #मीरा_ठाकुर

माँ के प्यार की कोई सीमा नहीं होती... #ममता # ख़ुशी  #प्यार #असलियत #
28/05/2026

माँ के प्यार की कोई सीमा नहीं होती...
#ममता # ख़ुशी #प्यार #असलियत #

26/05/2026

पिछली पीढ़ी के साथ

एक दिन माँ-बाप भी बच्चों जैसे हो जाते हैं,
उम्र से नहीं,अपनी ज़रूरतों के कारण वे बदल जाते हैं।

एक दौर ऐसा भी आएगा जब उनकी याददाश्त कमज़ोर हो जाएगी।
अभी कही बात भी, वो थोड़ी ही देर में भूल जाएँगे।

जब उनके कदम धीमे पड़ जाएँ और वो एक ही बात बार-बार पूछें,
जिन्हें जीवन में हर काम आसान लगता था, आज वे ही सहारा चाहें।

तो उनकी जरूरत को तुम कोई बोझ मत समझना,
बचपन में जो प्यार पाया था, उसे चुकाने का अवसर समझना।

अब उनसे बातें ज़्यादा किया करो, बिना कारण भी उनके साथ बैठा करो,
जब तक वो पास हैं, अपनी आवाज़ से प्यार छलकाया करो।

इस ज़िंदगी का भरोसा नहीं, एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब उस ओर से कोई फ़ोन नहीं आएगा, ये सिलसिला हमेशा के लिए थम जाएगा।

मीरा ठाकुर

25/05/2026

आज आदमी न रहा…

आज, आज आदमी न रहा,
भाई, वह नेता हो गया,
बात-बात पर भाषण देता,
घर भी उसका मंच हो गया।
अब, पति–पति न रहा,
अब वह श्रोता हो गया,
पत्नी की हर बात सुनता,
पर मन से कहाँ जुड़ा रहा?
माँ की आँखों का वह बेटा,
मोबाइल में खो गया,
दो मीठे शब्दों के बदले
ऑनलाइन सा हो गया।
दोस्त, दोस्त न रहा अब,
बस “फॉलोवर” हो गया,
रिश्तों की गर्मी छूटी,
सब कुछ डिजिटल हो गया।
बाप का साया थक गया,
बेटा व्यस्त बड़ा हो गया,
संस्कारों की बातें करते,
पर भीतर से खो गया।
आज आदमी न रहा,
चेहरों का मेला हो गया,
सच की कीमत कम पड़ गई,
झूठ का सिक्का चल गया।
कहाँ गया वो सादा मन,
जो दिल से दिल तक जाता था?
अब हर रिश्ता लाभ-हानि का
हिसाब किताब बताता है।
आज आदमी न रहा,
सिर्फ किरदार बचा रह गया,
भीतर का इंसान सो गया,
बस बाहरी चेहरा रह गया।

-मीरा ठाकुर

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ...
21/05/2026

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ...

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19/05/2026
19/05/2026

गुलाब
कल रात मैंने गुलाब से किया सवाल,
क्यों दुनिया में मचा है इतना बवाल?
मुस्कुराकर उसने धीमे से कहा—
ये कसूर नहीं मेरा, न ही हालात का,
कुछ रंग तो चढ़ते हैं इंसानी ख़्यालात का।
माला में पिरोया जाए तो पूजा बन जाती है,
और हाथों में आए तो इज़हार बन जाती है,
पर जब मन में उठे लालच की लाली,
तब हर चाहत बस सवाल बन जाती है।
गुलाब ने फिर हौले से समझाया मुझे@,
रंग मेरा नहीं, नीयत रंग लाती है,
वरना मैं तो खुशबू ही बाँटता हूँ—
ये दुनिया ही मुझसे मतलब निकाल जाती है।

मीरा ठाकुर

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