12/04/2026
कई दिनों से हो रही बरसात के बाद दिल ने कहा .....
अब मेरे शहर में भी बारिश है,
दिल के आँगन में भी कुछ ख्वाहिश है।
सूखी रेतों का जो इल्ज़ाम मिला,
आज हर ज़र्रे में भी नमी सी है।
तुम जो कहते थे वीरान यहाँ,
देख लो—रूह में भी रौनक सी है।
ज़िंदगी रुकती नहीं हालातों से,
हर धड़कन में सफ़र की गुंजाइश है।
रेत के शहर का ताना था जिन्हें,
अब उन्हें कह दो—यहाँ भी बारिश है।
मीरा ठाकुर