12/01/2026
एक अविस्मरणीय रंगमंचीय यात्रा
"कहते हैं कि एक सफल नाटक की चमक जितनी मंच पर दिखाई देती है, उसकी असली ऊर्जा पर्दे के पीछे यानी बैकस्टेज की खामोश मेहनत में छिपी होती है। आज हमारे नाटक 'भूतिया महल बिकाऊ है' के मंचन के दौरान मुझे इसी ऊर्जा का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला। निर्देशक दीपक जादौन जी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए हम पूरी टीम ने पिछले कई दिनों से दिन-रात एक कर दिया था। बैकस्टेज में रहकर हर प्रॉप्स की सही सेटिंग, समय पर दृश्यों का परिवर्तन और लाइटिंग व साउंड का वह सटीक तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन जब शो सुचारू रूप से आगे बढ़ा, तो वह सारी थकान एक सुखद अनुभव में बदल गई।
हमारे इस प्रयास को सबसे बड़ा सम्मान तब मिला, जब भारतीय सिनेमा की 'ड्रीम गर्ल' और सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना आदरणीय हेमा मालिनी जी ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से हमें अनुग्रहित किया। उन्हें अपने सामने देखना ही एक सपने जैसा था, लेकिन हमारे लिए सबसे भावुक और गर्व का पल वह था जब उन्होंने नाटक समाप्त होने के बाद विशेष रूप से हम जैसे बैकस्टेज काम करने वाले क्रू मेंबर्स की मेहनत को पहचाना। उन्होंने बड़े ही आत्मीय भाव से हमारे अनुशासन और मंच प्रबंधन की प्रशंसा की। हेमा जी जैसी महान कला साधिका से अपने काम के लिए शाबाशी मिलना यह दर्शाता है कि कला के क्षेत्र में पर्दे के पीछे रहने वालों का योगदान कितना महत्वपूर्ण होता है।
दीपक जादौन जी के कुशल निर्देशन ने हम सभी को एक सूत्र में पिरोए रखा। यह सफलता केवल मंच पर दिखने वाले कलाकारों की नहीं, बल्कि उस हर एक हाथ की है जिसने पर्दे के पीछे रहकर इस 'भूतिया महल' की दुनिया को जीवंत बनाया। हेमा मालिनी जी के प्रेरक शब्दों ने हम पूरी टीम के भीतर एक नया उत्साह भर दिया है। यह शाम केवल एक नाटक का अंत नहीं थी, बल्कि आने वाले कई और शानदार शो के लिए एक नई प्रेरणा और आत्मविश्वास की शुरुआत थी। पूरी टीम को इस सामूहिक जीत के लिए बहुत-बहुत बधाई और आदरणीय हेमा जी का सहृदय आभार।"