05/12/2023
. डॉक्टर ने आई.सी.यू. के दरवाजे से
बाहर निकल कर कहा
"सबको बुला लीजिए ।वक्त बहुत कम है ।"
अलग अलग शहरों से पहली उड़ान ले
खड़े थे खून के रिश्तें तमाम
उस आई सी यू लिखे कैदखाने के सामने ।
इस जमावड़े से बेखबर और बेअसर वो
हर हिचकी के साथ जाने क्या सोच रहा होगा ..
साँसे आखरी बार चाहती होंगी एक आत्मीय की खुशबू
मुँह में लगे आक्सीजन मास्क से ज्यादा ।
कभी आँगन का लहलहाता बरगद था जो
आज ठूँठ बन ढह रहा है वो ।
कुछ भी नही बदल रहा है सिर्फ
संसार के कहकहों में एक खिलखिलाहट ही कम हुई
दुनिया के कोलाहल में केवल एक आवाज़ ही गुम हुई
भागती दुनिया की रेलम पेलम में
एक जोड़ी पाँव की पदचाप ही जम गई
वो लहजा जिसकी लज्ज़त का कोई मुकाबला नही
अब महज़ एक किस्सा बन गया ।
ज्यादा बड़ा हादसा नही हुआ केवल
एक जोड़ी पलके जुड़ गई
कभी ना खुलने के लिए ।
सब कुछ इतनी खामोशी से हुआ
कि कुदरत को कानों कान खबर ना हुई ।
अब भी आँगन में अनार के पेड़ पर
नन्हें लाल फूल
हौले हौले डोल रहे है ।
ढलता सूरज रोज की तरह ही
धुंधलाता सरक रहा है ।
झोंके हवा के तफरी कर रहे है
छत, मुंडेर, फुनगियों , कलगियों ,
कचनार और पगडंडियों में
हमेशा की तरह ।
शाम के झुटपुटे में वो बछड़ा
चिपका चिपका उछल रहा है माँ से ।
इन सबको मालूम नही
धरती से एक स्पंदन कम हो गया ।
एक जिस्म बिना हरकत ,
एक मन बिना ख्वाहिश ,
एक दिल बिना धड़कन ,
इंतज़ार कर रहा था
सीने से मशीनों के बोझ के हटने का
जैसे परिंदा बैचैन
पिंजरा खुलने के लिए ।
कौन कहता है लोग दुनिया से कुछ नही ले जाते है ।
वो ले जाते है अपने संग आई सी यू के बाहर खड़े लोगों की दुनिया का एक टुकड़ा ..।
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Madhu-writer at film writer's association -Mumbai