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08/05/2019
28/04/2019
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अनेक रोगों में प्रभावी है होम्योपैथी दवा आर्निका मोंटाना (Arnica Montana)होम्योपैथी में चोट लगने पर आर्निका मोंटाना का प...
10/09/2018

अनेक रोगों में प्रभावी है होम्योपैथी दवा आर्निका मोंटाना (Arnica Montana)

होम्योपैथी में चोट लगने पर आर्निका मोंटाना का प्रयोग सबसे पहले किया जाता है। चोट लगने या गिरने के कारण किसी भी तरह की बीमारी के लिए आर्निका काफी उपयोगी होती है।

चोट या मोच से होने वाले नीले या काले दागों को भी यह दवा एंटीसेप्टिक की तरह ठीक करती है। डिलीवरी के बाद 30 पोटेंसी में दी गई आर्निका महिला के दर्द और तकलीफ को कम करती है। इसे दिन में पांच बार लगभग 10-15 दिन तक लेना होता है।

मोच आने, याददाश्त कमजोर होने, पक्षाघात, मस्तिष्क में गड़बड़ी, बेहोशी, अनजाने में पाखाना-पेशाब होना, उदासीनता, खून की खराबी से होने वाली बीमारियां और दर्द वाले फोड़े-फुंसियों आदि में इसका प्रयोग किया जाता है.

आर्निका टायफॉइड, मुंह में लगातार लार या पानी आने और खट्टी डकारों में भी फायदा करती है। इसे लेते समय खट्टी चीजों से परहेज करना चाहिए।

अनेक रोगों में प्रभावी है होम्योपैथी दवा आर्निका

लखनऊ में यहां मनाई जा रही 'ईको फ्रेंडली बकरीद'। बकरे की जगह बकरे की तस्वीर वाली केक काटी।यहां लोगों ने ईद पर जानवर को का...
22/08/2018

लखनऊ में यहां मनाई जा रही 'ईको फ्रेंडली बकरीद'। बकरे की जगह बकरे की तस्वीर वाली केक काटी।

यहां लोगों ने ईद पर जानवर को काटने की बजाय केक काटने का फैसला किया है। इन लोगों का कहना है कि बकरीद पर बकरे की कुर्बानी की प्रथा ठीक नहीं है, हम सबसे अपील करते हैं कि इस बकरीद को जानवर काटकर नहीं बल्कि केक काटकर मनाएं।
शिया मौलवी ने की थी अपील
इस बार राजधानी में कुछ बेकरी बकरा केक बेच रही हैं जिसको कई लोगों ने खरीदा। बेकरी में आए एक ग्राहक ने कहा कि “बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी ठीक नहीं है। मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि लोग इस त्योहार पर जानवर काटने के बजाए केक काटें।” ये त्योहार कुर्बानी का जरूर है लेकिन, इसके पीछे मकसद ये समझाने का होता है कि हर इंसान अपने जान-माल को अपने भगवान की अमानत समझे और उसकी रक्षा के लिए किसी भी त्याग या बलिदान के लिए तैयार रहे।

जहां पूरा प्रदेश बकरीद मना रहा है वहीं राजधानी के कुछ लोगों ने इसे अनोखे अंदाज में मनाया।

11/06/2018

Now this is what I have always craved in all my days .. My first book cover "Sanity Of Soul" ...A book which tumbles down into the aesthetics of humanity.
A book which celebrates friendship ,the caring soul of a father, the love of someone, the holy bells of temple which awakens everyone and gives life a soulful beginning.

The book will come soon....😊😊💐

11/06/2018

*"सर फरोशी की तमन्ना बस हमारे दिल में है।*
*देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है।।"*
अमर शहीद के चरणोंनमें शत-शत नमन।
"सर्वे भवन्तु सुखिनः।"
*वन्दे मातरम्।*
🕉🇮🇳🙏💐🌸🍁🌹🙏

*भारत माता के महान सपूत महान क्रांतिकारी पं राम प्रसाद बिस्मिल को जन्म जयन्ती पर कोटिशः नमन*
राम प्रसाद 'बिस्मिल' (11 जून 1897-19दिसम्बर 1927) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षड्यन्त्र व काकोरी-काण्ड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के प्रमुख सदस्य थे।

राम प्रसाद एक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू तखल्लुस (उपनाम) था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है आत्मिक रूप से आहत। बिस्मिल के अतिरिक्त वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे।

शुक्रवार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (निर्जला एकादशी) विक्रमी संवत् 1954 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में जन्मे राम प्रसाद को 30 वर्ष की आयु में सोमवार पौष कृष्ण एकादशी (सफला एकादशी) विक्रमी संवत् 1894को वे शहीद हुए। उन्होंने सन् 1016 में 19 वर्ष की आयु में क्रान्तिकारी मार्ग में कदम रखा था। 11 वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और स्वयं ही उन्हें प्रकाशित किया। उन पुस्तकों को बेचकर जो पैसा मिला उससे उन्होंने हथियार खरीदे और उन हथियारों का उपयोग ब्रिटिश राज का विरोध करने के लिये किया। 11 पुस्तकें ही उनके जीवन काल में प्रकाशित हुईं और ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त की गयीं।

बिस्मिल को तत्कालीन संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध की लखनऊ सेण्ट्रल जेल की 11 नम्बर बैरक में रखा गया था। इसी जेल में उनके दल के अन्य साथियोँ को एक साथ रखकर उन सभी पर ब्रिटिश राज के विरुद्ध साजिश रचने का ऐतिहासिक मुकदमा चलाया गया था। उन्हें 19 दिसम्बर 1927 को गोरखपुर जेल में फाँसी दी गई और वे अमर हो गए |

21/05/2018

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