09/08/2026
✍️ बड़े नेताओं के बूथ पर भी पिछड़ी भाजपा: स्थानीय दिग्गजों के गढ़ में जन सुराज की सेंध
हालिया चुनावी आंकड़ों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि पार्टी के कई कद्दावर और बड़े नेताओं के अपने ही पोलिंग बूथों पर भाजपा उम्मीदवार पिछड़ गए हैं। 'दैनिक भास्कर' की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख क्षेत्रों में स्थानीय दिग्गजों के घरेलू बूथों पर प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों, विशेषकर प्रशांत किशोर (पीके) की पार्टी 'जन सुराज' को बढ़त मिली है।
विभिन्न बूथों से आए आंकड़े बताते हैं कि भाजपा के बड़े चेहरे अपने घरेलू मैदान या मतदान वाले बूथों पर भी मतदाताओं को पूरी तरह प्रभावित करने में असफल रहे:
* नितिन नवीन (बांकीपुर): बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन का बचपन बांकीपुर विधानसभा के पीरमुहानी इलाके में बीता। लेकिन इस बार उनके इस घरेलू बूथ पर भाजपा को केवल 88 वोट मिले, जबकि पीके (जन सुराज) के उम्मीदवार को 152 वोट मिले।
* रविशंकर प्रसाद (पटना): पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रविशंकर प्रसाद ने पटना वीमेंस कॉलेज स्थित बूथ संख्या-91 पर मतदान किया था। इस बूथ पर भाजपा उम्मीदवार को 89 वोट मिले, जबकि पीके की पार्टी को 91 वोट प्राप्त हुए।
* रामकृपाल यादव: पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रामकृपाल यादव ने जिस बूथ पर अपना वोट डाला, वहां भी भाजपा का प्रदर्शन कमजोर रहा। यहाँ भाजपा को 89 वोट मिले, जबकि जन सुराज के खाते में 91 वोट गए।
*डॉ. सीपी ठाकुर: वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी ठाकुर के बूथ पर भी भाजपा उम्मीदवार पीछे रहे। इस बूथ पर भी जन सुराज ने अपनी बढ़त बनाए रखी और भाजपा को पछाड़ दिया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जमीनी स्तर पर मतदाताओं का मूड बदल रहा है। भाजपा के परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले शहरी और संभ्रांत इलाकों के बूथों पर भी जनता अब नए राजनीतिक विकल्पों (जैसे जन सुराज) को तरजीह दे रही है। बड़े नेताओं के अपने ही बूथ पर पिछड़ना पार्टी के आंतरिक संगठन, स्थानीय रणनीति और जनता के बीच उनके व्यक्तिगत प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।