17/01/2026
घरेलू महिलाओं के साथ हो रहे संविधानिक भेदभाव को समझते हैं।
कि जिस महिला का पति अपने गृह जनपद से तीसरे जनपद में उत्तर प्रदेश पुलिस में नोकरी कर रहा है उस व्यक्ति की पत्नी जो गांव में चूल्हा झोंकेंती है और अपने सास ससुर की सेवा करती है अपने बच्चों का पालन पोषण करती है।
अब उस पुलिस कर्मी पर आते हैं कि विभाग के अधिकारी उसको उसका पर्याप्त अवकाश उपलब्ध करा पाते हैं, उत्तर नही। क्या सप्ताहिक रेस्ट दिया जाता है उत्तर नही, साप्ताहिक रेस्ट के कभी कभी वादे हुए लेकिन धरातल पर नतीजा शून्य रहा, शर्त ये भी की मुख्यालय नही छोड़ोगे, क्या साहब वह सिपाही एक दिन में लंदन घूमकर आ सकता है जो उसको मुख्यालय नही छोड़ने दोगे, घर तक जाने के लिए पता नही कितने यतन दिमाग मे उपजाए घूमकर वह सिपाही लगातार ड्यूटी करता है, ऐसे में अगर चोरी छिपे वह सिपाही डग्गामारी करके अपने घर पहुँच भी जाता है तो डयूटी पर उपस्थित होने के लिए आने वाली फोन कॉल उसका अकाल बनकर पीछा करती है और जल्दबाजी का नतीजा होता है कि एक सिपाही की बाइक सड़क दुर्घटना में मौत।
यदि कोई सिपाही अपने अवकाश के प्रार्थना पत्र में लिख देगी उसे अपनी पत्नी की बहुत याद आ रही है और वह अपने घर जाना चाहता है उसके अवकाश के प्रार्थना पत्र को मज़ाक का पत्र बनाकर पुलिस विभाग वायरल कर देता है, लेकिन क्या उसे सिपाही की पीड़ा किसी ने समझी, उतर नही।
इसी लिए कोई सिपाही ऐसे वास्तविक कारण नहीं लिख कर लिखा जाता है कि घर पर आवश्यक कारण है या मां, पिता अथवा पत्नी, बच्चा बीमार है, जबकि सच तो ये है कि उसके घर मे कोई बीमार नही है बीमार है तो पुलिस का सिस्टम, मानसिक रूप से पुलिस के अधिकारी।
किसी भी पुलिस वाले से भी पूछ लीजिए घर से दूर रहने की दिक़्क़त क्या है तो सिर्फ़ अपना दुखड़ा रोयेगा । परिवार के उस दुःख को नहीं बताएगा जो उसके दूर रहने से हो रहा है याद करना ।
अब आते हैं मुद्दे पर, पुलिस विभाग में मात्र 5 प्रतिशत पुलिस कर्मी आपस मे शादी शुदा है। बाकी पुलिस कर्मियों की पत्नी गृहणी हैं और अपनी जिम्मेदारी अपने पति की गैर मौजूदगी में भी बखूबी निभा रही हैं लेकिन कौन है जो अपनी जिम्मेदारी निभाने से बच रहा है उत्तर है उत्तर प्रदेश सरकार और उसके अधिकारी।
यदि सरकार चूल्हा झोंके वाली उस गृहणी की वेदना को समझती है तो उसके पति को गृह जनपद अथवा पड़ोसी जनपद में पोस्टिंग देकर उनपर उपकार करें।
एक घरेलू महिला को और उसके सास ससुर तथा बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ भेदभाव को रोके और उस सिपाही को भी उसका मूल कर्तव्यों का निर्वहन करने दे।
यदि ऐसा लगता है कि कोई सिपाही अपने गृह जनपद और पड़ोस के जनपद में रहकर ऐसा कोई कृत्य करता है कि उसे विभाग की छवि धूमिल होती है तो उसे सिपाही को प्रदेश के दूसरे छोर पर भेज देना चाहिए इससे अन्य पुलिस कर्मियों को भी सबक मिलेगा।