07/01/2025
इसे पूरा पड़ियेगा फिर अपने कमेंट भी दीजिये
स्मार्ट कीड़े और स्मार्ट बीमारियां
प्रकृति एक सिद्धांत पर चलती है जिसमे एक जीव दूसरे जीव का पोषण करता है। जियो और जीने दो के सिद्धांत पर सभी चलते थे। सबके अपने अपने इलाके और काम निर्धारित थे कोई किसी में हस्तक्षेप नहीं करता था। कीड़े अपने हिसाब से जीते थे, जंगली जानवर अपने हिसाब से पक्षी अपने हिसाब से और मनुष्य अपने हिसाब से कोई किसी के अधिकार क्षेत्र में दखलंदाजी नहीं करता था। सभी प्राकृतिक रूप से जीवन जी रहे थे।
फिर धीरे-धीरे मनुष्य समझदार बना और अपने लाभ के लिए दुसरो के अधिकार क्षेत्र में जबरदस्ती घुसना शुरू किया। इंसानी हस्तक्षेप खेत से बढ़ता हुआ मेड पर पहुंचा और वहां से बढ़ता हुआ जंगलो और नदियों तक पहुँच गया। इस हस्तक्षेप की बदौलत पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लग गया। धीरे धीरे इंसान और स्मार्ट होने लग गया उसको अपने सामने सभी कुछ तुच्छ लगने लगा। दुसरो के हक़ पर अपना कब्ज़ा जमाने लग गया। सब कुछ उसे अपने अनुसार चाहिए होता है। वो खुद को शहंशाह की भूमिका में समझने लग गया, उसका मन करता है में आदेश दूँ और ये तुच्छ जिव उसका पालन करें और नहीं करें तो में उन्हें दंड दूँ।
लेकिन वो भूल जाता है की जिसने इंसान बनाये उसी ने कीड़े, फफूंद, जीवाणु और वायरस भी बनाये है और इंसानो से ज्यादा स्मार्ट बनाये है। इंसानो को जिस बदलाव में लाखो साल लग जाते है वो बदलाव उनमे कुछ दिनों और महीनों में हो जाते है। इंसानो को चुनौती हमेशा इन्ही तुच्छ जीवों ने दी है जिसका ताजा उदाहरण कोरोना के रूप में देखा होगा।
ये तुच्छ जीव उन्ही छोटे जीवों मे से एक है जिन्होंने इंसानो द्वारा दी गयी हर चुनौती का सामना किया और हार बार एक नयी चुनौती लेकर इंसान के सामने खड़ा हो गया। इन कीड़ो और तुच्छ फ़फ़ूँदो की स्मार्टनेस इतना बढ़ गयी है की इंसान रुपी किसान या किसान रूपी इंसान कुछ भी कह लो इनसे बड़ा परेशान है।
कीड़ो ने इंसानी चुनौतियों का जवाब अपने आप को परिस्थितियों के अनुकूल बनाकर किया है। आज अनियंत्रित रसायनो के उपयोग के कारण कीड़ो, फ़फ़ूँदो और जीवाणुओं में प्रतिरोधकता आ चुकी है।
कीड़ो की फसल चयन की आदतें बदल चुकी है। उनका जीवन चक्र बदल गया है। लीफ माइनर कीट जो टमाटर को प्रभावित करता था आज रसायनो के छिड़काव के बाद भी नियंत्रण में नहीं आ रहा है हाँ हम जरूर जहरीले टमाटर खा रहे है। टमाटर का कीड़ा आज बेंगन और मिर्च में भी दिखने लग गया है कल ही मैंने इसे मकोय के पौधे पर देखा जो की एक खरपतवार है जीने के लिए कुछ भी करेगा। बेंगन का फल और तना छेदक दूसरा कीड़ा है जिसको नियंत्रित करना किसानो के लिए चुनौती बन चूका है उपज का 50 प्रतिशत भाग नष्ट हो जाता है। पत्ता गोभी का डायमंड बैक मोथ भी इसी श्रेणी का कीड़ा है जिसने इंसानी वर्चस्व को धत्ता दिखा रखा है। फाल आर्मी वर्म जो कभी मक्का का कीड़ा हुआ करता था आज दूसरी फसलों में भी अपना प्रकोप दिखा रहा है जिसमे गेंदा, स्ट्रॉबेरी और अफीम में इसका प्रकोप स्वयं मेरे द्वारा देखा गया है। ऐसे और भी बहुत से कीड़े है जिन्होंने इंसानी चुनौती को स्वीकार करते हुए कीटनाशियों के प्रति रेजिस्टेंस विकसित कर लिया है या अपने होस्ट प्लांट को बदल लिया है अपनी खाने की आदतें बदल ली है। आज कुछ किसान भाइयों में गेहूं में इल्ली, निम्बू में मकड़ी और ऐसे ही कुछ और कीड़े और बिमारियों के फोटो भेजे जो वैसे इन फसलों में पहले लगते हुए नहीं पाए गए थे।
यही कारण है की अपनी ज्यादा बुद्धिमानी की वजह से इंसान और जानवर भले ही नष्ट हो जाएँ कीड़े, फफूंद, बैक्टीरिया और वायरस जैसे तुच्छ जीव लाखो वर्षो से जिन्दा है और आगे भी रहेंगे। इन्हे चुनौती देना इंसान के लिए नुकसान दायक होगा वो तो खुद को बदल कर बच जायेंगे नुकसान इंसानो का ही होना है। बेहतर होगा इनसे सावधानी और प्रेम से निपटा जाए जोर आजमाइश में दिक्कत हमें ही होने वाली है।
एक किसान जो अफीम की फसल में 3 छिड़काव में 8 दवाइया और जमीन में अलग से दवाइयों का प्रयोग कर चूका है फिर भी फसल ख़राब हो रही है को देखकर मन में आये हुए विचार है।
"इनसे जीत नहीं पाओगे इसलिए इनके साथ जीना सीखना पड़ेगा"