09/12/2025
‘बिहार को 30 साल बाद अपना भविष्य बदलने का मौका मिला था लेकिन लोगों ने उसे गंवा दिया।’ ऐसा इसलिये कहा जा रहा है क्योंकि बिहार जिस बदहाली में पिछले 30-35 साल से जी रहा है उससे बाहर निकलने का मौका उसे इस विधानसभा चुनाव में मिला था। इस बार बिहार के पास बदहाल शिक्षा-स्वास्थ्य, पलायन और बेरोज़गारी को खत्म करने का मौका था लेकिन बिहार इस बार फिर उसी दलदल में और अंदर धंस गया जिसमें वो लगातार 30 साल से धंसता जा रहा है।
BJP सरकार ने 2014 में ही बिहार में टेक पार्क लगाने, फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने, चीनी मिल को चालू करवाने और पलायन खत्म करने की बात की थी लेकिन ठगी का आलम देखिये कि इस सरकार को 11 साल पहले किये गए वादे इस चुनाव में फिर से दोहराने पड़े। ऐसे तो बिहार के लोगों को राजनीतिक रूप से सबसे सजग जनता के रूप में जाना जाता है। लेकिन इस बार जनता ने चूक कर दी। बिहार के नेता बिना किसी डर के करोड़ों-अरबों के घोटाले करते रहे और लोगों ने आंख पर पट्टी बांधकर अपना बेशकिमती वोट फिर से उन्हें दे दिया।
बिहार में कुर्सी कुमार की अगुआई में नई सरकार बनने के बाद दो बार कैबिनेट की बैठक हुई लेकिन दोनों ही बैठकों में पलायन खत्म करने और दूसरे राज्यों में अपना शरीर गला रहे बिहारियों को लेकर कोई बात नहीं की गई। रेलवे स्टेशनों पर बिहार के लोगों की भीड़ अब भी पहले की तरह ही है। लेकिन आखिर ये स्थिति बदलेगी कैसे? लोगों ने बिहार को बदलने के प्रशांत किशोर के मजबूत प्लान को छोड़कर मुफ्त बिजली, 10,000 और हिंदू-मुस्लिम के नाम पर वोट दिया तो आखिर सरकार आम लोगों के बारे में क्यों सोचेगी। पुलिस सरकार की, प्रशासन सरकार का और वोट तो उसे वैसे भी फिजूल के मुद्दों पर मिल जाएगा तो आखिर सरकार जनता से क्यों डरेगी। आखिर कब बिहार के लोगों को उनकी बदहाली का अहसास होगा? और कितनी पीढ़ियों को दूसरे राज्यों में गा’लियां सुननी होंगी।
कई लोगों ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज की हार प्रशांत किशोर की हार है लेकिन असलियत में यह हर उस बिहारी की हार है जो अपने राज्य वापस आना चाहता था, जो अपने बच्चों के लिये बेहतर शिक्षा चाहता था, जो अपने इलाज के लिए सस्ता और भरोसेमंद अस्पताल चाहता था, जो पुलिस-प्रशासन से डरे बिना सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन जीना चाहता था और गर्व से बिहारी कहलाना चाहता था। और इतना तय है कि जब तक बिहार का यह सपना पूरा नहीं हो जाता तब तक प्रशांत किशोर प्रयास करते रहेंगे। प्रशांत किशोर ने तमाम सुख-सुविधाओं, धन-संपत्ति, सत्ता-रसूख को छोड़कर बिहार को सुधारने का मुश्किल काम चुना है। चाहे जितनी भी रुकावटें आ जाएं लेकिन बिहार को ऊंचाई पर पहुंचाए बिना प्रशांत किशोर के कदम नहीं रुकेंगे।