AhleChaman

AhleChaman क्या बीत गई अब के 'फ़राज़' अहल-ए-चमन पर
यारान-ए-क़फ़स मुझ को सदा क्यूँ नहीं देते

बड़ा अजीब सा सफर है ये ज़िंदगी का,कोई समझ नहीं पाया दर्द किसी के दिल का।हंसते चेहरों के पीछे कई गहरे राज़ हैं,हर मुस्कान...
30/10/2024

बड़ा अजीब सा सफर है ये ज़िंदगी का,
कोई समझ नहीं पाया दर्द किसी के दिल का।
हंसते चेहरों के पीछे कई गहरे राज़ हैं,
हर मुस्कान के पीछे छुपे कई आँसुओं के साज़ हैं।
😏

दर्द छुपा बैठा हूँ.....😒"दिल की गहराइयों में कहीं दर्द छुपा बैठा हूँ,अपनों के बीच होते हुए भी तनहा सा बैठा हूँ।वो कहते ह...
29/10/2024

दर्द छुपा बैठा हूँ.....😒
"दिल की गहराइयों में कहीं दर्द छुपा बैठा हूँ,
अपनों के बीच होते हुए भी तनहा सा बैठा हूँ।
वो कहते हैं कि अपना समझ कर देख लेना,
मैं उसी अपनेपन के इंतजार में बैठा हूँ।।"

उस वक़्त का हिसाब क्या दूँ,जो तेरे बग़ैर कट गया है | माज़ी की क्या सुनाऊ कहानी,लम्हा लम्हा गुज़र गया है | | ~ अहमद नज़ीम क़ासम...
27/10/2024

उस वक़्त का हिसाब क्या दूँ,
जो तेरे बग़ैर कट गया है |
माज़ी की क्या सुनाऊ कहानी,
लम्हा लम्हा गुज़र गया है | |
~ अहमद नज़ीम क़ासमी

तुम चाहो जिधर देखो.....🥰अदू के ताकने को तुम इधर देखो उधर देखो,मगर हम तुम को देखे जाएँ तुम चाहो जिधर देखो \\लड़ाई से यूँह...
26/10/2024

तुम चाहो जिधर देखो.....🥰
अदू के ताकने को तुम इधर देखो उधर देखो,
मगर हम तुम को देखे जाएँ तुम चाहो जिधर देखो \\
लड़ाई से यूँही तो रोकते रहते हैं हम तुम को,
कि दिल का भेद कह देती है तुम चाहो जिधर देखो \\ ~बेख़ुद देहलवी

तुम आती हो.......🥰                     बजते नि:स्वर नूपुर छम-छम,सांसों में थमता स्पंदन-क्रम,तुम आती हो, अंतस्थल मेंशोभा ...
08/10/2024

तुम आती हो.......🥰


बजते नि:स्वर नूपुर छम-छम,
सांसों में थमता स्पंदन-क्रम,
तुम आती हो, अंतस्थल में
शोभा ज्वाला लिपटाती हो।

अपलक रह जाते मनोनयन
कह पाते मर्म-कथा न वचन,
तुम आती हो, तंद्रिल मन में
स्वप्नों के मुकुल खिलाती हो।
~सुमित्रानंदन पंत

मोहब्बत..मुझे हर बार होती है... ❤"कहते हैं मोहब्बत एक बार होती है, पर मैं जब-जब तुझे देखता हूँ, मुझे हर बार होती है।तेरी...
07/10/2024

मोहब्बत..मुझे हर बार होती है... ❤

"कहते हैं मोहब्बत एक बार होती है, पर मैं
जब-जब तुझे देखता हूँ, मुझे हर बार होती है।
तेरी आँखों में बसा है मेरा हर ख़्वाब जैसे,
मैं जागता हूँ रात भर बस मेरी ये आँखे ही सोती हैं ।"

कल का सोचते रहे , आज जी न पाओगे!..🙂रहो खुश रास्तो में, रास्ते ही साथ हैंमंज़िलों का क्या पता, बदलती हर बार है !कल कुछ छूट...
05/10/2024

कल का सोचते रहे , आज जी न पाओगे!..🙂

रहो खुश रास्तो में, रास्ते ही साथ हैं
मंज़िलों का क्या पता, बदलती हर बार है !
कल कुछ छूटा, कल कुछ पाओगे ,
कल का सोचते रहे , आज जी न पाओगे!

उम्मीद की 'सुबह' रात से पूछता हूँ कैसे सहती हो यह एकांत अपनी छाती पर अकेले रात हँसती है मेरी देह पर एक शब्द लिखकर: 'सुबह...
04/10/2024

उम्मीद की 'सुबह'

रात से पूछता हूँ
कैसे सहती हो यह एकांत
अपनी छाती पर अकेले
रात हँसती है
मेरी देह पर एक शब्द लिखकर: 'सुबह'

बांधो न नाव इस ठांव बंधु!..😊पूछेगा सारा गांव बंधु, यह घाट वही जिस पर हंसकरवह नहाती थी धंसकर, आंखें रह जाती थी फंसकरकंपते...
03/10/2024

बांधो न नाव इस ठांव बंधु!..😊

पूछेगा सारा गांव बंधु, यह घाट वही जिस पर हंसकर
वह नहाती थी धंसकर, आंखें रह जाती थी फंसकर
कंपते थे दोनों पांव बंधु, बांधो न नाव इस ठांव बंधु
वह हंसी बहुत कुछ कहती थी, फिर भी अपने में रहती थी
सबकी सुनती थी सहती थी, देती थी सबके दांव बंधु
बांधो न नाव इस ठांव बंधु!
~सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

तेरी बाहों में अब भी मेरा दिल धड़कता है...🥰“सफेद बालों में भी वो पहली सी चमक है,तेरी बाहों में अब भी मेरा दिल धड़कता है।...
02/10/2024

तेरी बाहों में अब भी मेरा दिल धड़कता है...🥰

“सफेद बालों में भी वो पहली सी चमक है,
तेरी बाहों में अब भी मेरा दिल धड़कता है।
हमने उम्र की बंदिशों को कभी नहीं माना,
तेरे साथ हर लम्हा आज भी जवां सा लगता है।”

प्रेम हवा में है, महसूस करो!...❤️हवा में घुली है खुशबू तेरे प्यार की,जैसे फूलों ने बात की हो बहार की।हर झोंके में अहसास ...
27/09/2024

प्रेम हवा में है, महसूस करो!...❤️

हवा में घुली है खुशबू तेरे प्यार की,
जैसे फूलों ने बात की हो बहार की।
हर झोंके में अहसास है तेरा,
मन भीगता है स्पर्श से हवाओं के किनारा।

नज़रें ढूंढती हैं तुझको आसमान में,
चाँदनी रात, तारे गिनती ख्वाबों में।
तेरी हँसी का गूँजता संगीत,
दिल में भर देता अनोखी प्रीत।

नर हो, न निराश करो मन को...😊“सँभलो कि सुयोग न जाए चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपनापथ आप प्रशस्त करो अ...
27/09/2024

नर हो, न निराश करो मन को...😊

“सँभलो कि सुयोग न जाए चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
अखिलेश्वर है अवलंबन को
नर हो, न निराश करो मन को ”
~मैथिलीशरण गुप्त

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