The Insane People

The Insane People Samskrit Hindi English poetry

आइए मिलते हैं.......
01/10/2021

आइए मिलते हैं.......

25/02/2021

14/10/2020

याद उसे इन्तेहाई करते हैंसो हम उसकी बुराई करते हैं~jaun elia
13/10/2020

याद उसे इन्तेहाई करते हैं
सो हम उसकी बुराई करते हैं

~jaun elia

वक़्त यूँ भी कुछ अब नुमाया करे, गीत मेरे भी वो गुनगुनाया करे।।मै मुकर्रर रहूँ इस क़दर दरबदर, हाल दिल का मुझे ही सुनाया क...
11/10/2020

वक़्त यूँ भी कुछ अब नुमाया करे, गीत मेरे भी वो गुनगुनाया करे।।

मै मुकर्रर रहूँ इस क़दर दरबदर, हाल दिल का मुझे ही सुनाया करे।।

वो बदन हो भले ही ढँका क्यूँ न पूरा, बस हया से वो पलकें झुकाया करे।।

मैं तरन्नुम, रदीफत में उलझा रहूँ, वो बस मुझे देखकर मुस्कुराया करे।।

हाल रब भी दुरुस्त ही बख्शे यकीनन, जो माँ बाप के पास जाया करे।।

हाथ थामो सभी का खुशी से ए-अविरल, जो भले क्यूँ न तुमको पराया करे।।

ए गुज़रते कैलेंडर क्या कभी ऐसा होगा? फिर से बाबा वो कहानी सुनाया करें।।

सुना है वो नींदें उड़ाता है सबकी, कहना मेरे भी ख्वाबों में आया करे।।

10/10/2020

चाहत का संसार है झूटा प्यार के सात-समुंदर झूट
सारी दुनिया बोल रही है कितने सुंदर सुंदर झूट

अश्कों को मोती कहता हूँ रुख़्सारों को फूल
मैं लफ़्ज़ों का सौदागर हूँ मेरे बाहर अंदर झूट

28/08/2020
बाबा नागार्जुन की अलौकिक छवि!!😍😍😍😍
28/08/2020

बाबा नागार्जुन की अलौकिक छवि!!
😍😍😍😍

....भवानीप्रसाद जी !!!    ____ ________गीतफरोश_____________जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ,मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ,...
27/08/2020

....भवानीप्रसाद जी !!!

____ ________गीतफरोश_____________

जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ,
मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ,
मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ !

जी, माल देखिए, दाम बताऊँगा,
बेकाम नहीं है, काम बताऊँगा,
कुछ गीत लिखे हैं मस्ती में मैंने,
कुछ गीत लिखे हैं पस्ती में मैंने,
यह गीत, सख्त सरदर्द भुलाएगा,
यह गीत पिया को पास बुलाएगा !

जी, पहले कुछ दिन शर्म लगी मुझको;
पर बाद-बाद में अक्ल जगी मुझको,
जी, लोगों ने तो बेच दिये ईमान,
जी, आप न हों सुन कर ज्यादा हैरान -
मैं सोच-समझकर आखिर
अपने गीत बेचता हूँ,
जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ,
मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ,
मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ !

यह गीत सुबह का है, गाकर देखें,
यह गीत गजब का है, ढाकर देखे,
यह गीत जरा सूने में लिक्खा था,
यह गीत वहाँ पूने में लिक्खा था,
यह गीत पहाड़ी पर चढ़ जाता है,
यह गीत बढ़ाए से बढ़ जाता है !

यह गीत भूख और प्यास भगाता है,
जी, यह मसान में भूख जगाता है,
यह गीत भुवाली की है हवा हुजूर,
यह गीत तपेदिक की है दवा हुजूर,
जी, और गीत भी हैं, दिखलाता हूँ,
जी, सुनना चाहें आप तो गाता हूँ !

जी, छंद और बे-छंद पसंद करें,
जी, अमर गीत और ये जो तुरत मरें !
ना, बुरा मानने की इसमें क्या बात,
मैं पास रखे हूँ कलम और दावात
इनमें से भाएँ नहीं, नए लिख दूँ,
मैं नए पुराने सभी तरह के
गीत बेचता हूँ,
जी हाँ, हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ,
मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ,
मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ !

जी गीत जनम का लिखूँ, मरण का लिखूँ,
जी, गीत जीत का लिखूँ, शरण का लिखूँ,
यह गीत रेशमी है, यह खादी का,
यह गीत पित्त का है, यह बादी का !
कुछ और डिजायन भी हैं, यह इल्मी,
यह लीजे चलती चीज नई, फिल्मी,
यह सोच-सोच कर मर जाने का गीत !
यह दुकान से घर जाने का गीत !
जी नहीं दिल्लगी की इस में क्या बात,
मैं लिखता ही तो रहता हूँ दिन-रात,
तो तरह-तरह के बन जाते हैं गीत,
जी रूठ-रुठ कर मन जाते है गीत,
जी बहुत ढेर लग गया हटाता हूँ,
गाहक की मर्जी, अच्छा, जाता हूँ,
मैं बिलकुल अंतिम और दिखाता हूँ,
या भीतर जा कर पूछ आइए, आप,
है गीत बेचना वैसे बिलकुल पाप
क्या करूँ मगर लाचार हार कर
गीत बेचता हूँ।
जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ,
मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ,
मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ !

अंकित पाठक@ "बतरस"
27/08/2020

अंकित पाठक@ "बतरस"

राजकवि गंग जी!!🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷""रती बिन साधु, रती बिन संत, रती बिन जोग न होय जती को॥रती बिन मात, रती बिन तात, रती बिन मानस...
26/08/2020

राजकवि गंग जी!!

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

""रती बिन साधु, रती बिन संत,
रती बिन जोग न होय जती को॥
रती बिन मात, रती बिन तात,
रती बिन मानस लागत फीको।
'गंग कहै सुन शाह अकबर,
एक रती बिन पाव रती को॥""

आकाशधर्मा व्यक्तित्व!!गुरुवर श्री द्विवेदीजी🙏🙏
26/08/2020

आकाशधर्मा व्यक्तित्व!!
गुरुवर श्री द्विवेदीजी🙏🙏

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