09/07/2026
एक कहानी आज के इन राम भक्तों की सुनों,
कह रहें जो पांच वर्षों के लिए हमको चुनों।
जिनके दिलों में आज तक केवल रही है बाबरी,
आज तक करते रहे जो मुस्लिमों की मुखबरी।
जिनके दिलों में रामभक्तों के लिए थी गालियां,
और जो घावों को देकर पीटते थे तालियां।
रोज छपती थी खबर गुंडों की तब अखबार में,
देश को क्या मिल गया अखिलेश की सरकार में।
तीस अक्टूबर का दिन उन्नीस सौ नब्बे सुनो,
जो लगाता है अयोध्या पर कई धब्बे सुनो।
राम का जयघोष करती थी हजारों बोलियां,
बाबरी पर चढ़ गई थी राम जी की टोलियां।
राम भक्तों के लहू से खेलते थे होलियां,
भूल कैसे जाऊं उनकी छातियों पर गोलियां।
तब बहुत विध्वंश कारी नीतियां थीं देश की,
याद होगा आपको सरकार थी अखिलेश की।
क्यों रही हरदम मवाली की तरफदारी कहो,
घूमता था क्यों खुला मुख़्तार अंसारी कहो।
क्यों खुला था घूमता अहमद भरी बाज़ार में?
क्यों नहीं मारा गया वो आपकी सरकार में?
जब जहां देखीं मजा़रे सिर तुम्हारा झुक गया,
रामभक्तों का यहीं पर प्रश्न आकर रूक गया।
जब बना मंदिर तो तुमने न्यौता ठुकरा दिया,
पूछता है देश तुमने राम के हित क्या किया?
अब मजारों की जगह ये धाम कैसे जग गए?
कालनेमी के हृदय में राम कैसे जग गए।
क्यों अचानक फ़िक्र तुमको राम की होने लगी?
और चोरी पर तुम्हारी आंख क्यों रोने लगी?
ये मगरमच्छों के आंसू कालनेमी का ये तन,
आपकी करतूत काली जानता है ये वतन।
ओ सनातन धर्म के प्रहरी सुनो इस देश को,
सौंपना मत कौरवों के हाथ में परिवेश को।
जो करे कल्याण भारतवर्ष का उसकी सुनो,
पांच वर्षों के लिए सरकार तुम ऐसी चुनों।।
गौरव गौरवान्वित