24/06/2022
जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर परम आदरणीय "डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी" को 11 मई, 1953 में शेख़ अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने हिरासत में ले लिया, क्योंकि उन दिनों कश्मीर में प्रवेश करने के लिए भारतीयों को एक प्रकार से पासपोर्ट के समान एक परमिट लेना पडता था और डॉ. मुखर्जी बिना परमिट लिए जम्मू-कश्मीर चले गए थे, क्योंकि उनका यह स्पष्ट रूप से मानना था कि अपने देश में किसी को भी कही बसने, रहने की आजादी होनी चाहिये।
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जम्मू-कश्मीर में उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया गया। वहाँ गिरफ्तार होने के कुछ दिन बाद ही 23 जून, 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु का खुलासा आज तक नहीं हो सका है। भारत की अखण्डता के लिए आज़ाद भारत में यह पहला बलिदान था। इसका परिणाम यह हुआ कि आज 'धारा 370' खत्म हो चुकी है और कश्मीर आज भारत का और अभिन्न मजबूत अंग बना चुका है। इसका सर्वाधिक श्रेय डॉ. मुखर्जी को ही दिया जाता है।
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आज के दिन उनके बलिदान दिवस (23 जून.1953) के अवसर पर उन्हें शत-शत नमन.….🙏🙏