Amazing place kotdwara

Amazing place kotdwara karnvanagri kotdwara Confess your confessions here

🎉 I earned the emerging talent badge this week, recognising me for creating engaging content that sparks an interest amo...
13/01/2026

🎉 I earned the emerging talent badge this week, recognising me for creating engaging content that sparks an interest among my fans!

10/01/2026

शानदार और दमदार अंधेरी रात, सुनसान सड़क और जंगल का अविश्वसनीय नजारा 🐆🐆🌳

07/01/2026

उत्तराखंड रोडवेज: सिर्फ एक बस नहीं, पहाड़ों की जीवनरेखा है।
"मंज़िल की तलाश में... कोटद्वार डिपो के साथ।”

06/01/2026

पशुपतिनाथ और उनके नंदी।
"महादेव का एक नाम 'पशुपतिनाथ' भी है, जिसका अर्थ है— इस संसार के समस्त जीव-जंतुओं के स्वामी और रक्षक। 🔱
आज सड़क किनारे इस भीषण ठंड में अग्नि देव की शरण में बैठे इन नंदी महाराज और गौ माता को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो महादेव स्वयं अपने इन प्रिय पात्रों की सुध ले रहे हों। सनातन धर्म हमें यही सिखाता है कि हर जीव में ईश्वर का अंश है।
अक्सर हम मंदिरों में तो पत्थर के नंदी को नमन करते हैं, लेकिन सड़क पर चलते इन जीवित नंदी और गौ माता के कष्ट को भूल जाते हैं। कड़ाके की इस सर्दी में इन बेजुबानों के लिए अलाव जलाना या उन्हें सहारा देना, साक्षात महादेव की सेवा करने के समान है।
जब हम पशुपति के जीवों की रक्षा करते हैं, तभी हमारी पशुपतिनाथ की पूजा पूर्ण होती है। आइए, इस सर्दी में हम भी 'शिव भाव' अपनाएं और इन मासूम जीवों के लिए करुणा का हाथ बढ़ाएं।
हर हर महादेव। जय गौ माता। जय नंदी महाराज।"

05/01/2026

Have you ever visited this place.


04/01/2026






09/11/2024

तीलू रौतेली का मूल नाम तिलोत्तमा देवी था। इनका जन्म आठ अगस्त 1661 को ग्राम गुराड़, चौंदकोट (पौड़ी गढ़वाल) के भूप सिंह रावत (गोर्ला) और मैणावती रानी के घर में हुआ

उस समय गढ़नरेशों और कत्यूरियों में पारस्परिक प्रतिद्वंदिता चल रही थी। कत्यूरी नरेश धामदेव ने जब खैरागढ़ पर आक्रमण किया तो गढ़नरेश मानशाह वहां की रक्षा की जिम्मेदारी भूप सिंह को सौंपकर खुद चांदपुर गढ़ी में आ गया। भूप सिंह ने डटकर आक्रमणकारियों का मुकाबला किया परंतु इस युद्ध में वे अपने दोनों बेटों और तीलू के मंगेतर के साथ वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहीद हो गए।

धीरे-धीरे कुमांऊ में चंद वंश प्रभावशाली होते रहे और कत्यूरी इधर-उधर बिखरने लगे। उन्होंने चारों ओर लूटपाट और उत्पात मचाकर अशांति फैलाना शुरू किया। तीलू रौतेली के समय गढ़वाल एवं कुमाऊँ में छोटे-छोटे राजा, भड व थोकदारी की प्रथा थी। सीमाओं का क्षेत्रफल राजाओं द्वारा जीते गए भू-भाग से निर्धारित होता था

भूप सिंह ने डटकर आक्रमणकारियों का मुकाबला किया परंतु इस युद्ध में वे अपने दोनों बेटों और तीलू के मंगेतर के साथ वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहीद हो गए

पिता भाई और मंगेतर की शहादत के बाद 15 वर्षीय वीरबाला तीलू रौतेली ने कमान संभाली

उन्होंने सात वर्ष तक लड़ते हुए खैरागढ, टकौलीगढ़, इंडियाकोट भौनखाल, उमरागढी, सल्टमहादेव, मासीगढ़, सराईखेत, उफराईखाल, कलिंकाखाल, डुमैलागढ, भलंगभौण व चौखुटिया सहित 13किलों पर विजय पाई। 15 मई 1683 को विजयोल्लास में तीलू अपने अस्त्र शस्त्र को तट (नयार नदी) पर रखकर नदी में नहाने उतरी, तभी दुश्मन के एक सैनिक ने उसे धोखे से मार दिया। हालांकि तीलू रौतेली पर कई पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं तथा कई नाट्य मंचित भी हो चुके हैं, परन्तु इस महान नायिका का परिचय पहाड की कंदराओं से बाहर नहीं निकल पा रहा है।

27/04/2022
Which place?
24/04/2022

Which place?

23/04/2022

Address

Uttrakhand
Lalpur
246149

Telephone

7351748317

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Amazing place kotdwara posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share