Nazim nadeem poetry

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"सच  में यार निभाएंगे हां हम प्यार निभाएंगे, जब तक ये  जीवन है  हर किरदार  निभाएंगे,,✍️- नाजिम नदीम
13/02/2026

"सच में यार निभाएंगे
हां हम प्यार निभाएंगे,
जब तक ये जीवन है
हर किरदार निभाएंगे,,

✍️- नाजिम नदीम

हमनें  कांटे  नहीं गुलाब बेचें हैं सवालों के बदले जवाब बेचें हैंसारी दुनियां पा जानें की जिद में ना  जानें  कितनें  ख्वा...
10/02/2026

हमनें कांटे नहीं गुलाब बेचें हैं
सवालों के बदले जवाब बेचें हैं

सारी दुनियां पा जानें की जिद में
ना जानें कितनें ख्वाब बेचें हैं

-नाजिम नदीम

किसी  ज़रदार  वसीले  से  नहीं  आए हैंआप महफ़िल में सलीक़े से नहीं आए हैं हमको उड़ने के तरीक़े ना सिखाओ हम लोगपेड़  से  आ...
07/02/2026

किसी ज़रदार वसीले से नहीं आए हैं
आप महफ़िल में सलीक़े से नहीं आए हैं

हमको उड़ने के तरीक़े ना सिखाओ हम लोग
पेड़ से आए हैं पिंजरे से नहीं आए हैं

बात करनी थी ज़रूरी सो हुए हैं हाज़िर
क़त्ल करने के इरादे से नहीं आए हैं

हम उसे जीत के लाए हैं अना वालों से
भाग कर अपने क़बीले से नहीं आए हैं

एक बच्ची से ख़रीदे थे ये गजरे हमने
लौटकर हम किसी मुजरे से नहीं आए हैं

राहत साहब 💐✍️

Good morning freind ❤️🥰
07/02/2026

Good morning freind ❤️🥰

Good morning freinds 🥰
04/02/2026

Good morning freinds 🥰

आप सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ❤️🇮🇳🙏💐
26/01/2026

आप सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ❤️🇮🇳🙏💐

25/01/2026


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24/01/2026
23/01/2026

वसंत पंचमी के इस शुभ अवसर पर, आपके जीवन से अज्ञान का अंधकार मिटे और ज्ञान का प्रकाश फैले। माँ सरस्वती आपको हर क्षेत्र में सफलता और खुशियाँ प्रदान करें। यह वसंत आपके लिए नई शुरुआत और ढेर सारी खुशियाँ लेकर आए! आप सभी को बहुत शुभकामनाएँ।💐

चंद  कदमों   कि    ये    दूरी   क्या   है। हमें  पता   है   कि    जरूरी    क्या  है। अमीरों  को नाज है अपनी अमीरी पर, हम...
15/11/2025

चंद कदमों कि ये दूरी क्या है।
हमें पता है कि जरूरी क्या है।

अमीरों को नाज है अपनी अमीरी पर,
हम फकीरों से पूछते हैं फकीरी क्या है।

-नाजिम नदीम

लखन जब राम संग वन को चले,मां उर्मिला की आंख में आसूं पले,देवता भी रोए लखन भी रोनें लगे,देख ऐसा दृश्य धैर्य सब खोनें लगे,...
02/04/2024

लखन जब राम संग वन को चले,
मां उर्मिला की आंख में आसूं पले,
देवता भी रोए लखन भी रोनें लगे,
देख ऐसा दृश्य धैर्य सब खोनें लगे,

राम का वनवास लिखना है सरल सर्जक मगर,
उर्मिला की वेदना की वेदना क्या लिख सकोगे..?

रोते रोते कहने लगी ये मां उर्मिला,
एक ही है प्रश्न एक ही तुमसे गिला,
जा रहे हो क्या तुम बिन रह सकूंगी,
है बड़ी वेदना ये बताओ सह सकूंगीं,

राम का वनवास लिखना है सरल सर्जक मगर,
उर्मिला की वेदना की वेदना क्या लिख सकोगे..?

राम भी कहनें लगे सुनोंं प्रिय लखन,
तुम न आओ साथ मान लो ये वचन,
किंतु न मानी एक भी वन को चल पड़े,
जितनें थे सपन मां उर्मिला के जल पड़े,

राम का वनवास लिखना है सरल सर्जक मगर,
उर्मिला की वेदना की वेदना क्या लिख सकोगे..?

लखन की उर्मिला चौदह वर्ष सोती रहीं,
और सोते सोते जैसे वर्षो तक रोती रहीं,
सब अधूरा है बिन लखन सियाराम के,
है धरती गगन फिर भला किस काम के,

राम का वनवास लिखना है सरल सर्जक मगर,
उर्मिला की वेदना की वेदना क्या लिख सकोगे..?

-नाजिम नदीम

#आशुतोषराना

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