Happy Marriage Anniversary

Happy Marriage Anniversary आपकी खूबसूरत यादें ताजा करने के लिए
(2540)

22/05/2024
आज 30-35 साल तक के बच्चों के विवाह नहीं हो रहे है?  कारण क्या है ? 👇👇एक 24 वर्षीय लड़की के पिताजी को नजदीक के रिश्तेदार न...
18/05/2024

आज 30-35 साल तक के बच्चों के विवाह नहीं हो रहे है? कारण क्या है ? 👇👇

एक 24 वर्षीय लड़की के पिताजी को नजदीक के रिश्तेदार ने शादी के लिए एक रिश्ता बताया कि लड़का शहर में नौकरी करता है।
... दिखने में खूबसूरत है।... अच्छे व्यवहार वाला है।.. माँ बाप भी अच्छे और पैसे वाले हैं

लड़के की उम्र 25 साल है, सबकुछ अच्छा है।

लड़की के पिताजी ने कहा कि वो सब ठीक है पर लड़के की कमाई कितनी है?

बिचौलिए ने बताया की अच्छी है। 30 हजार रुपये है। पैसे वाले परिवार से है।

लड़की के पिताजी ने जवाब दिया कि हूँ !! शहर में 30 हजार से क्या होता है? परिवार की कमाई से हमें क्या लेना-देना!!

बिचौलिए ने कहा कि एक दूसरा लड़का भी है।...

दिखने में ठीक ठाक है।

तनख्वाह अच्छा.... 50 हजार है।

सिर्फ उसकी उम्र थोड़ी ज्यादा है।

वह 28 साल का है।

लडके पिताजी ने कहा कि 50 हजार ?

शहर में 1BHK फ्लैट भी वह खरीद सकता है क्या!

सिर्फ 50 हजार में ?...

तो मेरी बेटी को कैसे खुश रख पायेगा वो!

बिचौलिए ने हिम्मत नहीं हारी और एक बताया कि एक और भी है।
... लड़का दिखने मे ठीक ठाक है। ... सिर्फ थोड़ा मोटा है।
.... थोडे से बाल झड़ गए है
....दिमाग से काम करने के कारण!
.... तनख्वाह भी ज्यादा है।
... 1 लाख महीना है।
... पर उम्र मात्र 32 साल है !!
... देखो अगर आपको जँचता हो तो!*

लड़की के पिताजी ने गुस्से में कहा कि क्या चाटना है 1 लाख पगार को?
... मेरी बेटी को तो खूबसूरत ही लड़का ही चाहिए।
... और वो भी अकेला रहने वाला या बहुत छोटा परिवार।
...कमाई भी ज्यादा होनी चाहिए, वरना लड़की को खुश कैसे रखेगा!
... मेरी लड़की भी कमाती है!
... कोई अच्छा रिश्ता बताइये जी
...लड़का कम उम्र का हो,....

ऐसे ही बातो में 3 से 5 साल निकल गए।
... फिर बिचौलिए को बुलाकर बात की उसने कहा की
अब मेरे पास आपकी लड़की के अनुरूप 30 से 35 साल वाले लड़के ही मेरी नजर में है।

आप बोलो तो बताऊ

लड़की के पताजी : "कोई भी लड़का बताइये!
... इस उम्र में कही शादी हो जाये! ये क्या कम बड़ी बात है!!!
.. लड़की की उम्र भी तो 29/30 हो रही है!!
...अब मेरी लड़की ही बहुत बड़ी हो गयी है
. तो मैं ज्यादा क्या उम्मीद रखूं।
ऐसी बातें करके लड़की और लड़को की जिंदगी के साथ खिलवाड़ रोज देखता हूँ! अंत में समझौता ही करते देखा जाता है!

...आप अपने आस पास देखेंगे,
.. तो बहुत बार शादी के बाद व्यक्ति का सब कुछ चला जाता है
.... इसलिए पैसे को ही एकमात्र आधार नहीं बनाये!
...सिर्फ एक सवाल का उत्तर दें कि जब आपकी शादी हुई थी तब आप कितना कमाते थे?

... आज क्या आपके पास नहीं है!

लड़का-लड़की दोनों बराबर है ऐसे वक़्त मे आप भी थोड़ा लड़की एवं लड़के के पीछे खड़े रहिये।

पर लड़के-लड़कियों की शादी योग्य उम्र में करिये या होने दीजिए।
. और मां-बाप द्वारा शादी की बात करने पर घर में झगड़ा आम हो चुका है।
.अपने माता पिता की भी ख्वाहिशों एवं पसंद का ध्यान रखिए।

.. आप भले ही डिग्री में उनसे ज्यादा हैं।
.. पर आपके माता पिता आपसे बहुत ज्यादा तज़ुर्बेकार हैं।

... और कोई भी अपने बच्चों के लिए गलत रिश्ते नहीं देखता है।

कई जगह तो अच्छे लड़कों को इसलिए छोड़ दिया क्यों कि लड़कियां जॉब कर रही थी और पढ़ाई में लड़कों से ज्यादा थी।
..जबकि लड़के भले ही उनसे कम पढ़े थे .... परंतु उनके जैसी सैलरी वाले तो उनके परिवारिक व्यवसाय में जॉब कर रहे थे।
... शादी के बाद जॉब करने वाली नहीं बल्कि परिवारिक काम में मददगार बहु चाहिए!.
.. उनके माता पिता तो तैयार थे.... पर बच्चे नहीं माने!! उम्रभर पैसा और नौकरीं तो आते-जाते रहेगी....पर "जवानी" और "उम्र" वापस नहीं आएगी...

एक बार सोचे।

दहेज, दिखावा, महँगी शादी ज़िन्दगी जीने का तरीका नही है।

पोस्ट पसंद आयी हो तो पोस्ट को लाइक करके शेयर जरूर करना 🙏🙏

,,     बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं 👏🏻अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं। समा...
15/05/2024

,, बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं 👏🏻

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं।

समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं।

समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत ज्यादा हैं ! इस प्रकार के कई उदाहरण हैं।

ऐसे लोगों के कारण समाज की छवि बहुत खराब हो रही है।

सबसे बडा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है।

पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ हद तक।

पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व अच्छा घर-परिवार होना चाहिये।

ज्यादा धन के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। "संपति खरीदी जा सकती है लेकिन गुण नहीं।"

मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर में अच्छे रिश्ते हाथ से नहीं जाने दें।

सुखी वैवाहिक जीवन जियें।

30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता समझौता होता है और मेडिकल स्थिति से भी देखा जाए तो उसमें बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

आज उससे भी बुरी स्थिति कुंडली मिलान के कारण हो गई है।

आप सोचिए जिनके साथ कुंडली मिलती है लेकिन घर और लड़का अच्छा नहीं और जहाँ लड़के में सभी गुण हैं वहां कुण्डली नहीं मिलती और हम सब कुछ अच्छा होने के कारण भी कुण्डली की वजह से रिश्ता छोड़ देते हैं

आप सोच के देखें जिन लोगो के 36 में से 20 या फिर 36/36 गुण भी मिल गए फिर भी उनके जीवन में तकलीफें हो रही हैं, क्योंकि हमने लडके के गुण नहीं देखे |

पढे लिखे आधुनिक समाज को एक सदी और पीछे धकेल दिया !

आजकल समाज में लोग बेटी के रिश्ते के लिए (लड़के में) चौबीस टंच का सोना खरीदने जाते हैं, देखते-देखते चार पांच साल व्यतीत हो जाते हैं |

उच्च "शिक्षा" या "जॉब" के नाम पर भी समय व्यतीत कर देते हैं। लड़के देखने का अंदाज भी समय व्यतीत का अनोखा उदाहरण हो गया है?

खुद का मकान है कि नहीं? अगर है तो फर्नीचर कैसा है? घर में कमरे कितने हैं ? गाडी है कि नहीं? है तो कौनसी है? रहन-सहन, खान-पान कैसा है? कितने भाई-बहन हैं? बंटवारे में माँ-बाप किनके गले पड़े हैं? बहन कितनी हैं, उनकी शादी हुई है कि नहीं? माँ-बाप का स्वभाव कैसा है? घर वाले, नाते-रिश्तेदार आधुनिक ख्यालात के हैं कि नहीं?

बच्चे का कद क्या है?रंग-रूप कैसा है?शिक्षा, कमाई, बैंक बैलेंस कितना है? लड़का-लड़की सोशल मीडिया पर एक्टिव है कि नहीं? उसके कितने दोस्त हैं? सब बातों पर पूछताछ पूरी होने के बाद भी कुछ प्रश्न पूछने में और सोशल मीडिया पर वार्तालाप करने में और समय व्यतीत हो जाता है। हालात को क्या कहें माँ-बाप की नींद ही खुलती है 30 की उम्र पर। फिर चार-पाँच साल की यह दौड़-धूप बच्चों की जवानी को बर्बाद करने के लिए काफी है। इस वजह से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं और माँ-बाप अपने ही बच्चों के सपनों को चूर चूर-चूर कर देते हैं।

एक समय था जब खानदान देख कर रिश्ते होते थे। वो लम्बे भी निभते थे | समधी-समधन में मान मनुहार थी। सुख-दु:ख में साथ था। रिश्ते-नाते की अहमियत का अहसास था।

चाहे धन-माया कम थी मगर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थी। कभी कोई ऊँची-नीची बात हो जाती थी तो आपस में बड़े-बुजुर्ग संभाल लेते थे। तलाक शब्द रिश्तों में था ही नहीं | दाम्पत्य जीवन खट्टे-मीठे अनुभव में बीत जाया करता था। दोनों एक-दूसरे के बुढ़ापे की लाठी बनते थे और पोते-पोतियों में संस्कारों के बीज भरते थे। अब कहां हैं वो संस्कार? आँख की शर्म तो इतिहास हो गई। नौबत आ जाती है रिश्तों में समझौता करने की।

लड़का-लड़की अपने समाज के नही होंगे तो भी चलेगा, ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं।

आज समाज की लडकियाँ और लड़के खुले आम दूसरी जाति की तरफ जा रहे हैं और दोष दे रहे हैं कि समाज में अच्छे लड़के या लड़कियाँ मेरे लायक नहीं हैं। कारण लडकियाँ आधुनिकता की पराकाष्ठा पार कर गई है। जब ये लड़के-लड़कियाँ मन से मैरिज करते हैं तब ये कुंडली मिलान का क्या होता है ? तब तो कुंडली की कोई बात नहीं होती‌ | यही माँ बाप सब कुछ मान लेते हैं। तब कोई कुण्डली, स्टेटस, पैसा, इनकम बीच में कुछ भी नहीं आता।

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागेंगे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो जाएंगी। समाज के लोगों को समझना होगा कि लड़कियों की शादी 22-23-24 में हो जाये और लड़का 25-26 का हो। सब में सब गुण नहीं मिलते।"

घर, गाड़ी, बंगला से पहले व्यवहार तोलो। माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में बह रहे है । पैसे की भागम-भाग में मीलों पीछे छूट गए हैं, रिश्ते-नातेदार।

टूट रहे हैं घर परिवार | सूख रहा है प्रेम और प्यार।

परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा तमाशा किया है कि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी "संस्कार"।

समाज को अब जागना जरूरी है अन्यथा रिश्ते ढूंढते रह जाएंगे।" #शादी #विवाह #तलाक

26/04/2024

स्त्रीधन पर पति या ससुराल वालों का कोई हक नहीं', सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जानिए क्या-क्या आता है स्त्रीधन में, बड़े सवालों के जवाब 👇

देश में हो रहे लोकसभा चुनाव के बीच कुछ शब्द बार-बार सुनाई दे रहे हैं, जिनमें मंगलसूत्र और स्त्रीधन आम हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्त्रीधन को लेकर गुरुवार को एक अहम फैसले में कहा कि महिला का स्त्रीधन उसकी पूर्ण संपत्ति है. जिसे अपनी मर्जी से खर्च करने का उसे पूरा अधिकार है. इस स्त्री धन में पति कभी भी हिस्सेदार नहीं बन सकता, लेकिन संकट के समय पत्नी की रजामंदी से इसका इस्तेमाल कर सकता है.

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्त्रीधन को लेकर दायर एक वैवाहिक विवाद पर सुनवाई करते हुए कहा था कि महिला को अपने स्त्रीधन पर पूरा अधिकार है, जिसमें शादी से पहले, शादी के दौरान या बाद में मिलीं हुईं सभी चीजें शामिल हैं, जैसे कि माता-पिता, ससुराल वालों, रिश्तेदारों और दोस्तों से मिले गिफ्ट, धन, गहने, जमीन और बर्तन आदि.
क्या होता है स्त्रीधन?
ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर स्त्रीधन क्या है और इसके दायरे में क्या-क्या आता है? दरअसल स्त्रीधन एक कानूनी टर्म है, जिसका जिक्र हिंदू धर्म में देखने को मिलता है. स्त्रीधन का अर्थ है महिला के हक का धन, संपत्ति, कागजात और अन्य वस्तुएं. एक आम धारणा ये है कि महिलाओं को शादी के दौरान जो चीजें उपहारस्वरूप मिलती हैं, उन्हें ही स्त्रीधन माना जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है.
स्त्रीधन में किसी महिला को बचपन से लेकर भी जो चीजें मिलती हैं, वह भी स्त्रीधन के दायरे में आती हैं. इनमें नकदी से लेकर सोना, हर तरह के तोहफे, संपत्तियां और बचत भी शामिल हैं. आसान शब्दों में कहें तो जरूरी नहीं है कि शादी के दौरान या शादी के बाद मिले इस तरह के उपहारों को ही स्त्रीधन माना जाए. स्त्रीधन पर अविवाहित स्त्री का भी कानूनी अधिकार है. इसमें वे सारी चीजें आती हैं, जो किसी महिला को बचपन से लेकर मिलती रही हों. इसमें छोटे-मोटे तोहफे, सोना, कैश, सेविंग्स से लेकर तोहफे में मिली प्रॉपर्टी भी आती है.
किस कानून के तहत है स्त्रीधन का अधिकार?

हिंदू महिला का स्त्रीधन का हक हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 27 के तहत आता है. यह कानून शादी से पहले, शादी के समय या शादी के बाद महिला को स्त्रीधन अपने पास रखने का पूरा हक देता है. महिला चाहे तो स्‍त्रीधन को अपनी मर्जी से किसी को दे सकती है या बेच सकती है.
इसके साथ ही घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12 भी महिलाओं को ऐसे मामलों में स्त्रीधन का अधिकार देती है, जहां वे घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं. वे इन कानूनों की मदद से अपना हक वापस ले सकती हैं.
लेकिन कई ऐसे भी मामले होते हैं, जहां मंगलसूत्र को छोड़कर ज्यादातर स्त्रीधन महिला के ससुरालवाले रख लेते हैं, ये कहकर कि वे संभालकर रखेंगे. ऐसी स्थिति में कानून उन्हें स्त्रीधन का ट्रस्टी मानता है. जब भी महिला उन चीजों को मांगती है, तो इसे देने से मना नहीं किया जा सकता.
किसी स्थिति में अगर महिला का स्त्रीधन कोई अपने पास जबरन रख लेता है तो महिलाओं को पूरा अधिकार है कि वे उस शख्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई ले सकें.
दहेज से कितना अलग है स्त्रीधन?

स्त्रीधन और दहेज दो अलग-अलग चीजें हैं. दहेज मांगस्वरूप दिया या लिया जाता है जबकि स्त्रीधन में प्रेमस्वरूप चीजें महिला को दी जाती हैं. अगर स्‍त्रीधन को ससुराल पक्ष ने जबरन अपने कब्‍जे में रखा है तो महिला इसके लिए क्‍लेम कर सकती है. अगर पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस लगा है, तो उसके साथ में स्‍त्रीधन को लेकर अलग से केस दर्ज कराया जा सकता है.
क्या महिला के पास स्त्रीधन को बेचने का हक है?

अगर कोई महिला अपने स्वामित्व वाली संपत्ति जिसे स्त्रीधन कहा जाता है, उसे दान या तोहफे में देना चाहती है या फिर बेचना चाहती है. तो कानूनी रूप से इस पर रोक नहीं है. किसी तरह की जरूरत में महिला अपनी मर्जी से स्त्रीधन अपने पति को दे सकती है लेकिन उसे बाद में ये चीजें महिला को लौटानी पड़ेगी. लेकिन ये सब तभी होता है जब स्त्री के पास अपनी संपत्ति का कोई लेखाजोखा रहे. बता दें कि इस्लाम में स्त्रीधन का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है.
स्त्रीधन क्यों चर्चा में आया?
राजस्थान में चुनावी जनसभा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि पहले जब इनकी सरकार थी तब उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक मुसलमानों का है. इसका मतलब ये संपत्ति इकट्ठा करते किसको बांटेंगे? जिनके ज्यादा बच्चे हैं, उनको बांटेंगे. घुसपैठियों को बांटेंगे. क्या आपकी मेहनत का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा? आपको मंजूर है ये?
उन्होंने आगे कहा था कि ये कांग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है कि वो मां-बहनों के गोल्ड का हिसाब करेंगे. उसकी जानकारी लेंगे और फिर उसे बांट देंगे. और उनको बांटेंगे जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है. भाइयों-बहनों ये अर्बन नक्सल की सोच, मेरी मां-बहनों, ये आपका मंगलसूत्र भी नहीं बचने देंगे. ये यहां तक जाएंगे

विवाह के प्रकारधर्मसूत्र एवं धर्मशास्त्रों में विवाह के निम्नलिखित आठ प्रकारों का उल्लेख मिलता है-1. ब्रह्म विवाह - ब्रह...
13/01/2023

विवाह के प्रकार
धर्मसूत्र एवं धर्मशास्त्रों में विवाह के निम्नलिखित आठ प्रकारों का उल्लेख मिलता है-

1. ब्रह्म विवाह - ब्रह्म विवाह में माता-पिता के संरक्षण में पुत्र- पुत्रियों का विवाह होता था। कन्या का पिता उसे अच्छे वस्त्रों एवं आभूषणों से भली-भाँति अलंकृत करके योग्य वर को प्रदान करता था। यह विवाह सर्वोत्तम विवाह माना जाता था। विवाह निम्न विवाह
2. प्रजापात्य विवाह- यह विवाह संतान प्राप्ति के लिए किया जाता था। इस विवाह के अनुसार धर्म, अर्थ एवं कर्म में वर और वधू के अधिकार समान होते थे। इस प्रकार के विवाह में संपूर्ण विधि-विधान का पालन किया जाता था ।

3. आर्ष विवाह - इसमें कन्या का पिता वर पक्ष से गाय-बैल का जोड़ा प्राप्त कर कन्या का विवाह वर से कर देता था।

4. दैव विवाह - इसमें कन्या का पिता कन्या को देवकार्य में संलग्न योग्य एवं सुशील पुरोहित वर को सौंप देता था।

5. असुर विवाह- इसमें वरपक्ष से धन लेकर कन्या का विवाह किया जाता था।

6. गांधर्व विवाह – यह एक प्रकार का प्रेम विवाह था। इसमें वर और कन्या माता-पिता की अनुमति के बिना ही विवाह कर लेते थे। कामसूत्र में इस विवाह को आदर्श विवाह माना गया है। यह विवाह क्षत्रियों में अधिक लोकप्रिय था ।

7. राक्षस विवाह- इसमें कन्या को बलपूर्वक उसके पिता एवं परिवार वालों से छीनकर विवाह किया जाता था।

8. पैशाच विवाह - यह सबसे निम्नकोटि का विवाह था ।

Address

5RHX+XV Kota
Kota
324006

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Happy Marriage Anniversary posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share