Ayan Rehan

Ayan Rehan Ofssore releated vedeo
Short vedeo of ocean

21/03/2025

एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !"

पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही।

धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई।

एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी।

उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।"

पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई।

पति उस पत्नी को बाड़े में लेकर गए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकती हो?"

पत्नी ने कहा, "नहीं जी"

पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द, दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं, जिनकी भरपाई भविष्य में तुम कभी नहीं कर सकते !"

सन्देश : जब भी आपको क्रोध आये तो सोचिएगा कि कहीं आप भी किसी के दिल में कील ठोंकने तो नहीं जा रहे 😀😀

post

21/03/2025

Ramadan की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी सब मुसलमान को पता होना चाहिए.
Ramadan इस्लामी कैलेंडर का 9 वाँ महीना है और यह पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में मुसलमान रोज़े रखते हैं, इबादत करते हैं, दुआ मांगते हैं, और अल्लाह की रहमत पाने की कोशिश करते हैं। रमज़ान का महीना रूहानी पाकीज़गी, खुद को बेहतर बनाने, और दूसरों की मदद करने का समय होता है।
रमज़ान की अहमियत (Ramzan ki Ahmiyat):
रोज़ा (Roza): रमज़ान के दौरान रोज़ा रखना इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। रोज़ा सिर्फ खाने-पीने से परहेज़ करना नहीं है, बल्कि यह बुरे ख्यालात, गलत कामों, और नकारात्मक सोच से बचने का भी मौका है।
कुरान का नुज़ूल (Quran ka Nazool): रमज़ान के महीने में ही कुरान पाक नाज़िल हुआ था। इसलिए, इस महीने में कुरान पढ़ने, समझने, और उस पर अमल करने पर खास जोर दिया जाता है।
तरावीह की नमाज़ (Taraweeh ki Namaz): रमज़ान में रात को तरावीह की नमाज़ पढ़ी जाती है, जो एक खास नमाज़ है और इसे जमात के साथ पढ़ा जाता है।
ज़कात और सदक़ा (Zakat aur Sadqa): रमज़ान में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने पर खास ध्यान दिया जाता है। ज़कात देना भी इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है।
शब-ए-क़द्र (Lailatul Qadr): रमज़ान के आखिरी 10 दिनों में एक रात को "शब-ए-क़द्र" (लैलतुल क़द्र) कहा जाता है, जो हज़ार महीनों से भी बेहतर मानी जाती है। इस रात में इबादत करने का खास सवाब है।
रमज़ान का अंत (Ramzan ka Ekhtetaam):
रमज़ान का अंत ईद-उल-फित्र के साथ होता है, जो एक खुशी का त्योहार है। ईद के दिन मुसलमान सुबह की नमाज़ के बाद एक-दूसरे को गले मिलकर ईद मुबारक कहते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं। यह दिन भाईचारे, मोहब्बत, और खुशी का दिन होता है।
रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए रूहानी सफाई, खुद पर काबू पाने, और अल्लाह के करीब आने का मौका होता है। इस महीने में नेकियाँ बढ़ जाती हैं और गुनाहों की माफी का मौका मिलता है।

21/03/2025

देखते ही जानें, शाकाहारी है या मांसाहारी!

एक बार एक चिंतनशील शिक्षक ने अपने 10th स्टेंडर्ड के बच्चों से पूछा कि
आप लोग कहीं जा रहे हैं और
सामने से कोई कीड़ा मकोड़ा या कोई साँप छिपकली या कोई गाय-भैंस या अन्य कोई ऐसा विचित्र जीव दिख गया, जो आपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा हो, तो प्रश्न यह है कि
आप कैसे पहचानेंगे कि
वह जीव अंडे देता है या बच्चे ?
क्या पहचान है उसकी ?

अधिकांश बच्चे मौन रहे
जबकि कुछ बच्चों में बस आंतरिक खुसर-फुसर चलती रही...।

मिनट दो मिनट बाद
फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने स्वयम ही बताया कि
बहुत आसान है,,
जिनके भी कान बाहर दिखाई देते हैं वे सब बच्चे देते हैं
और जिन जीवों के कान बाहर नहीं दिखाई देते हैं
वे अंडे देते हैं.... ।।
फिर दूसरा प्रश्न पूछा कि–
ये बताइए आप लोगों के सामने एकदम कोई प्राणी आ गया... तो आप कैसे पहचानेंगे की यह शाकाहारी है या मांसाहारी ?
क्योंकि आपने तो उसे पहले भोजन करते देखा ही नहीं,
बच्चों में फिर वही कौतूहल और खुसर फ़ुसर की आवाजें.....

शिक्षक ने कहा–
देखो भाई बहुत आसान है,,
जिन जीवों की आँखों की बाहर की यानी ऊपरी संरचना गोल होती है, वे सब के सब माँसाहारी होते हैं,
जैसे-कुत्ता, बिल्ली, बाज, चिड़िया, शेर, भेड़िया, चील या अन्य कोई भी आपके आस-पास का जीव-जंतु जिसकी आँखे गोल हैं वह माँसाहारी ही होगा है,
ठीक उसी तरह जिसकी आँखों की बाहरी संरचना लंबाई लिए हुए होती है, वे सब के सब जीव शाकाहारी होते हैं,
जैसे- हिरन, गाय, हाथी, बैल, भैंस, बकरी,, इत्यादि।
इनकी आँखे बाहर की बनावट में लंबाई लिए होती है ....

फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने बच्चों से पूछा कि-
बच्चों अब ये बताओ कि मनुष्य की आँखें गोल हैं या लंबाई वाली ?

इस बार सब बच्चों ने कहा कि मनुष्य की आंखें लंबाई वाली होती है...
इस बात पर
शिक्षक ने फिर बच्चों से पूछा कि
यह बताओ इस हिसाब से मनुष्य शाकाहारी जीव हुआ या माँसाहारी ??
सब के सब बच्चों का उत्तर था शाकाहारी ।

फिर शिक्षक से पूछा कि
बच्चों यह बताओ कि
फिर मनुष्य में बहुत सारे लोग मांसाहार क्यों करते हैं ?
तो इस बार बच्चों ने बहुत ही गम्भीर उत्तर दिया
और वह उत्तर था कि अज्ञानतावश या मूर्खता के कारण।

फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने बच्चों को दूसरी बात यह बताई कि
जिन भी जीवों के नाखून तीखे नुकीले होते हैं, वे सब के सब माँसाहारी होते हैं,
जैसे- शेर, बिल्ली, कुत्ता, बाज, गिद्ध या अन्य कोई तीखे नुकीले नाखूनों वाला जीव....
और
जिन जीवों के नाखून चौड़े चपटे होते हैं वे सब के सब शाकाहारी होते हैं,
जैसे-मनुष्य, गाय, घोड़ा, गधा, बैल, हाथी, ऊँट, हिरण, बकरी इत्यादि।

इस हिसाब से भी अब ये बताओ बच्चों कि मनुष्य के नाखून तीखे नुकीले होते हैं या चौड़े चपटे ??

सभी बच्चों ने कहा कि
चौड़े चपटे,,

फिर शिक्षक ने पूछा कि
अब ये बताओ इस हिसाब से मनुष्य कौन से जीवों की श्रेणी में हुआ ??
सब के सब बच्चों ने एक सुर में कहा कि शाकाहारी ।

फिर शिक्षक ने बच्चों से तीसरी बात यह बताई कि,
जिन भी जीवों अथवा पशु-प्राणियों को पसीना आता है, वे सब के सब शाकाहारी होते हैं,
जैसे- घोड़ा, बैल, गाय, भैंस, खच्चर, आदि अनेकानेक प्राणी... ।
जबकि
माँसाहारी जीवों को पसीना नहीं आता है, इसलिए कुदरती तौर पर वे जीव अपनी जीभ निकाल कर लार टपकाते हुए हाँफते रहते हैं
इस प्रकार वे अपनी शरीर की गर्मी को नियंत्रित करते हैं.... ।

तो प्रश्न यह उठता है कि
मनुष्य को पसीना आता है या मनुष्य जीभ से अपने तापमान को एडजस्ट करता है ??

सभी बच्चों ने कहा कि मनुष्य को पसीना आता है,

शिक्षक ने कहा कि अच्छा यह बताओ कि
इस बात से भी मनुष्य कौन सा जीव सिद्ध हुआ, सब के सब बच्चों ने एक साथ कहा –
शाकाहारी ।
सभी लोग विशेषकर अहिंसा में, सनातन धर्म, संस्कृति और परम्पराओं में विश्वास करने वाले लोग भी चाहे तो बच्चों को नैतिक-बौद्धिक ज्ञान देने अथवा सीखने-पढ़ाने के लिए इस तरह बातचीत की शैली विकसित कर सकते हैं,
इससे जो वे समझेंगे सीखेंगे वह उन्हें जीवनभर काम आएगा...
याद रहेगा, पढ़ते वक्त बोर भी नहीं होंगे....।

बच्चे अगर बड़े हो जाएं तो उनको यह भी बताएं कि कैसे शाकाहारी मनुष्य जानकारी के अभाव में मांसाहार का उपयोग करता है और कहता है कि जब अन्न नहीं उपजाया जाता था तब मनुष्य मांसाहार का सेवन करते थे, जो सरासर गलत है तब मनुष्य कंद-मुल एवं फलों पर जीवित रहते थे, जो सही है एवं उसके संरचना और स्वभाव से मेल भी खाता है। Tm

माहे रमजान का तीसरा जुमा मुबारक हो आप सबको भी
21/03/2025

माहे रमजान का तीसरा जुमा मुबारक हो आप सबको भी

Life of sea
28/04/2024

Life of sea

Duty time hai dosto
28/04/2024

Duty time hai dosto

08/07/2023

Hi friends this is my new page

Address

Ramkola
Kasia
274305

Telephone

+966548246317

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ayan Rehan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to Ayan Rehan:

Share

Category